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Last Modified: नई दिल्ली , शनिवार, 20 सितम्बर 2025 (12:01 IST)

पाकिस्तान को बड़ा झटका, इन 3 राज्यों को मिलेगा सिंधु का पानी

सिंधु जल संधि पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, पाकिस्तान के बजाए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को मिलेगा पानी

sindhu water
Sindhu Water : मोदी सरकार ने फैसला किया है कि पाकिस्तान जाने वाला सिंधु नदी का पानी दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को दिया जाएगा। इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। वहां जलसंकट बढ़ने के आसार है।
 
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुक्रवार को घोषणा की कि पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन के कारण बचा हुआ पानी अगले एक से डेढ़ साल के भीतर दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान को उपलब्ध कराया जाएगा।
 
उल्लेखनीय है पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु नदी के पानी को रोक दिया था। इस आतंकी हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे।
 
सिंधु के पानी पर सिर्फ भारत का हक : इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को अन्यायपूर्ण और एकतरफा करार देते हुए कहा था कि सिंधु नदी के जल पर भारत और उसके किसानों का एकमात्र अधिकार है। इस संधि ने भारत में कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है।
 
इस संधि की वजह से सिंधु के जल से हमारे दुश्मनों के खेतों की सिंचाई होती है, जबकि मेरे देश की धरती और मेरे देश के किसान प्यासे रहते हैं। मोदी ने कहा कि भारत का जो पानी है, उसका इस्तेमाल भारत के लिए होगा, सिर्फ भारत के किसानों के लिए होगा और हम अब ऐसी व्यवस्था बर्दाश्त नहीं करेंगे जो अपने किसानों को वंचित रखे।
 
पाकिस्तान क्यों है परेशान : असल में सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन कही जाती है। पाकिस्तान की 90 फीसदी फसलें सिंधु के पानी पर ही निर्भर हैं। पाकिस्तान का कहना है कि उनके देश में जितने भी पॉवर प्रोजेक्ट्स हैं, डैम हैं, वो सब इसी पानी पर बने हैं। यदि भारत हकीकत में इस पर अमल करता है तो पाकिस्तान प्यासा मर जाएगा।
 
क्या है सिंधु जल संधि : सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के उपयोग को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता है। यह संधि 19 सितंबर, 1960 को कराची में तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हस्ताक्षरित हुई थी।

इस संधि के तहत, सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों - सिंधु, झेलम, चिनाब (पश्चिमी नदियां) और रावी, ब्यास, सतलुज (पूर्वी नदियां) - के पानी का बंटवारा किया गया था। संधि के अनुसार, पूर्वी नदियों का लगभग पूरा पानी भारत को आवंटित किया गया, जबकि पश्चिमी नदियों का अधिकांश पानी पाकिस्तान को दिया गया। भारत को पश्चिमी नदियों पर कुछ सीमित उपयोग का अधिकार दिया गया, जैसे कि पनबिजली उत्पादन (रन-ऑफ-द-रिवर प्रोजेक्ट) और कृषि के लिए सीमित सिंचाई। पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को मानने से इनकार कर दिया।
edited by : Nrapendra Gupta
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