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Last Updated : रविवार, 28 नवंबर 2021 (20:02 IST)

हरिद्वार : दीक्षांत समारोह में राष्‍ट्रपति ने पतंजलि विवि के विद्यार्थियों को प्रदान की उपाधि

हरिद्वार : दीक्षांत समारोह में राष्‍ट्रपति ने पतंजलि विवि के विद्यार्थियों को प्रदान की उपाधि - President Ram Nath Kovind presents degrees to the students of Patanjali University at the convocation
देहरादून। उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार के प्रथम दीक्षांत समारोह में देश के राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद  ने गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्‍त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उच्च शिक्षामंत्री डॉ. धनसिंह रावत, पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, संकाय अध्यक्ष डॉ. साध्‍वी देवप्रिया भी उपस्थित थे।

इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि आधुनिक विज्ञान के साथ हमारी परंपरा की प्रासंगिक ज्ञान-राशि को जोड़ते हुए भारत को नॉलेज सुपर पावर बनाने का जो लक्ष्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने निर्धारित किया है उसे पतंजलि विश्वविद्यालय आगे बढ़ा रहा है।राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में हरिद्वार की पावन धरती पर रहने का और शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलना बड़े सौभाग्य की बात है।

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव ने योग की लोकप्रियता को बढ़ाने में अभूतपूर्व योगदान दिया है। भारत सरकार के प्रयासों से संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा 2015 में प्रतिवर्ष 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया। ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप सन् 2016 में ‘योग’ को यूनेस्को द्वारा 'विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर' की सूची में शामिल किया गया है।

राष्ट्रपति ने क्यूबा का उदाहरण देते हुए कहा कि योग को विश्व के हर क्षेत्र और विचारधारा के लोगों ने अपनाया है। राष्ट्रपति ने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय द्वारा जो प्रयास किए जा रहे हैं उनसे भारतीय ज्ञान-विज्ञान, विशेषकर आयुर्वेद तथा योग को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में विश्व पटल पर गौरवशाली स्थान प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। मुझे यह देखकर प्रसन्नता होती है कि पतंजलि समूह के संस्थानों में भारतीयता पर आधारित उद्यमों और उद्यम पर आधारित भारतीयता का विकास हो रहा है।

आज उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आलस्य और प्रमाद को त्याग कर आप सब योग परंपरा में उल्लिखित ‘अन्नमय कोश’, ‘मनोमय कोश’ और ‘प्राणमय कोश’ की शुचिता हेतु सचेत रहेंगे और ‘विज्ञानमय कोश’ और ‘आनंदमय कोश’ तक की आंतरिक यात्रा पूरी करने की महत्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ेंगे।

करुणा और सेवा के आदर्शों को आप अपने आचरण में ढाल कर समाज सेवा करते रहेंगे। करुणा और सेवा के अद्भुत उदाहरण हमारे देशवासियों ने कोरोना का सामना करने के दौरान प्रस्तुत किए हैं। आज हम गर्व के साथ यह कह सकते हैं कि हमारा देश विश्व के उन थोड़े से देशों में से है जिन्होंने न सिर्फ कोरोना के मरीजों की प्रभावी देखभाल की है अपितु इस बीमारी से बचाव हेतु वैक्सीन का भी उत्पादन किया है।

हमारे देश में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है। सृष्टि के साथ सामंजस्यपूर्ण जुड़ाव ही आयुर्वेद एवं योग शास्त्र का लक्ष्य है। इस सामंजस्य के लिए यह भी आवश्यक है कि हम सभी प्रकृति के अनुरूप जीवनशैली को अपनाएं तथा प्राकृतिक नियमों का उल्लंघन न करें।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय में छात्रों की अपेक्षा बेटियों की संख्या अधिक है। यह प्रसन्नता की बात है कि परंपरा पर आधारित आधुनिक शिक्षा का विस्तार करने में हमारी बेटियां अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मुझे विश्वास है कि आप सभी छात्राओं में से आधुनिक युग की गार्गी, मैत्रेयी, अपाला, रोमशा और लोपामुद्रा निकलेंगी जो भारतीय मनीषा और समाज की श्रेष्ठता को विश्व पटल पर स्थापित करेंगी।