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Last Updated :नई दिल्ली , शनिवार, 7 फ़रवरी 2026 (14:44 IST)

मोदी ने अमेरिका के हाथों देश बेच दिया, ट्रेड डील पर कांग्रेस का तीखा हमला, किसानों और व्यापारियों के लिए बताया 'काला दिन'

India US Trade Deal 2026
India US Trade Deal 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुए हालिया व्यापार समझौते (Trade Deal) को लेकर देश में सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस डील को 'भारत के आत्मसमर्पण' की संज्ञा दी है। कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री ने व्यक्तिगत दबाव में आकर देश के किसानों, व्यापारियों और लघु उद्योगों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है।

किसानों और व्यापारियों की थाली ट्रंप को सौंपी

कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि यह डील पूरी तरह से एकतरफा है और इससे केवल अमेरिका को फायदा होगा। विपक्षी दल के मुताबिक, "मोदी जी ने भारतीय बाजार को चांदी की थाली में सजाकर ट्रंप को सौंप दिया है। इस समझौते से हमारे छोटे व्यापारियों और किसानों की कमर टूट जाएगी।"
 

टैरिफ का गणित: भारत को झटका, अमेरिका को चांदी

कांग्रेस ने डील के आंकड़ों को साझा करते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं:
 
  • 18% टैरिफ का बोझ : कांग्रेस के अनुसार, अमेरिका भारतीय सामानों पर 18% टैरिफ वसूलेगा, जबकि पहले यह दर 3% से भी कम हुआ करती थी।
  • भारतीय बाजार पर कब्जा : इसके उलट भारत ने अमेरिका से आने वाले सामानों पर से या तो टैरिफ हटा दिया है या बहुत कम कर दिया है।
  • खेती पर असर : अमेरिका से आने वाले कृषि उत्पाद, फल, Dried Distillers’ Grains (DDGs), पशु चारा के लिए लाल ज्वार और ड्राई फ्रूट्स अब भारतीय बाजारों में बिना किसी बाधा के बिकेंगे, जिससे स्थानीय किसानों को भारी नुकसान होगा।

इन क्षेत्रों पर गिरेगी गाज

कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि भारत के प्रमुख निर्यात सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होंगे। 18% टैरिफ लगने के कारण निम्नलिखित उद्योगों में छंटनी और मंदी का खतरा है:
 
1. कपड़ा और परिधान (Textiles)
2. चमड़ा और जूते (Leather & Footwear)
3. प्लास्टिक और रबर
4. मशीनरी और कारीगर उत्पाद (Artisanal Products)
5. ऑर्गेनिक केमिकल और घर की सजावट का सामान
 

$500 बिलियन का 'बाय अमेरिकन' वादा

समझौते की एक और बड़ी शर्त, जिसने विपक्ष को नाराज किया है, वह है अगले 5 सालों में $500 बिलियन (लगभग 42 लाख करोड़ रुपये) का सामान अमेरिका से खरीदने का वादा। इसमें अमेरिकी तेल-गैस, विमान के पुर्जे, कोयला और टेक्नोलॉजी उत्पाद शामिल हैं। कांग्रेस का कहना है कि भारत पर 'बाय अमेरिकन' (Buy American) नीति थोपी गई है।

'एपस्टीन फाइल्स' का सनसनीखेज आरोप

कांग्रेस ने इस जल्दबाजी में की गई डील के पीछे एक चौंकाने वाला दावा किया है। बयान में कहा गया है कि मोदी सरकार पर 'एपस्टीन फाइल्स' (Epstine Files) को लेकर भयंकर अंतरराष्ट्रीय दबाव है। खुद को बचाने के चक्कर में प्रधानमंत्री ने ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
 
कांग्रेस का कहना है कि यह एक 'डिजिटल तराजू' जैसा है जहां एक तरफ मोदी का झूठा वादा है और दूसरी तरफ देश का कड़वा सच। अगर सरकार ने जल्द ही इस पर स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो विपक्ष इसे लेकर सड़क से संसद तक बड़ा आंदोलन छेड़ने की तैयारी में है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 
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