MP में पेट्रोल की कीमतों में आग,90 रुपए के पार दाम,32 रुपए टैक्स वसूल रही सरकार

डीजल-पेट्रोलियम एसोसिएशन ने लोगों को राहत देने के लिए सरकार से टैक्स कम करने की मांग की

Author विकास सिंह| Last Updated: सोमवार, 30 नवंबर 2020 (13:02 IST)
कोरोना महामारी से जूझ रहे लोगों की जेब पर अब की बड़ी मार पड़ रही है। मध्यप्रदेश में के दाम पर पहुंचकर 90 रुपए के पार पहुंच गए है। प्रदेश की राजधानी भोपाल में पेट्रोल 90.5 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। मध्यप्रदेश में पेट्रोल की कीमतें बढ़ने के पीछे सरकार के द्धारा वसूला जाने वाला एक्साइज और वैट भी बड़ा कारण है।

‘वेबदुनिया’से बातचीत में मध्यप्रदेश डीजल-पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह कहते हैं कि मध्यप्रदेश में वर्तमान पेट्रोल पर राज्य सरकार करीब 32 रुपए (39 फीसदी) टैक्स लगा रही है, वहीं पर 28 फीसदी टैक्स लगा रही है।

वह कहते हैं कि कोरोना काल में सरकार के द्धारा कोविड के लिए फंड जुटाने के लिए पेट्रोल और डीजल का आसान टारगेट बनाया और एक्साइज ड्यूटी में बड़े पैमाने पर इजाफा करने के साथ ही वैट और सेस भी बढ़ा दिया है। पेट्रोल और डीजल पर सरकार के बार-बार टैक्स बढ़ाने के पीछे बड़ा कारण अजय सिंह कहते हैं कि पेट्रोल और डीजल एक ऐसा प्रोडेक्ट है जिस पर सरकार का सौ प्रतिशत टैक्स की रिकवरी होती है, जैसे अगर हम सौ लीटर डीजल-पेट्रोल बेच रहे है तो पूरा टैक्स सरकार को जाता है, इसलिए सरकार को पैसा इक्ट्ठा करने का ये बहुत साफ्ट टारगेट लगता है।

पेट्रोल के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी के पीछे एक बड़ा कारण बताते हुए अजय सिंह कहते हैं कि दाम बढ़ने के पीछे बढ़ा कारण पेट्रोल और डीजल की डिमांड बढ़ाना है जिसके कारण क्रूड आयलों के दामों में लगातार इजाफा हो रहा है। कोरोना की वैक्सीन आने और कोरोना का डर कम होने से इकोनॉमी के मजबूत होने के संकेत मिल रहे है। वहीं ओपेक देशों द्धारा प्रोडक्शन कम करने का असर भी क्रूड के दामों पर पड़ रहा है।

कोरोना महामारी के चलते एक समय क्रूड की कीमतें 18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी लेकिन जैसे ही कोरोना महामारी थोड़ा नियंत्रण में आई और विश्व में स्थिति सामान्य हुई और थोड़ी सी तेजी आई और तो इसका सीधा असर क्रूड के दामों पर पड़ा। आज की तारीख में क्रूड के दाम 50 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गए है, जो पहले की तुलना में दोगुना से अधिक है,ऐसे में कंपनियों की मजबूरी हो गई वो दाम बढ़ाए और नुकसान को कवर करने के लिए तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरु कर दिए।




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