पीएम मोदी को चुनाव आयोग ने दी 'क्लीन चिट', नहीं किया आचार संहिता का उल्लंघन

Last Updated: मंगलवार, 30 अप्रैल 2019 (23:33 IST)
नई दिल्ली। ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के मामले में क्लीन चिट दे दी है। आयोग ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र के वर्धा में 1 अप्रैल को हुई चुनावी रैली में मोदी के भाषण में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन नहीं हुआ।
इस रैली में मोदी ने वायनाड से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा था। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी।

क्या कहा था मोदी ने : मोदी ने 1 अप्रैल को वर्धा में दिए अपने भाषण में कहा था कि गांधी वायनाड से चुनाव लड़ रहे हैं, जहां बहुसंख्यक कम हैं। पार्टी को बहुसंख्यक लोकसभा क्षेत्र से अल्पसंख्यक लोकसभा क्षेत्र की ओर भागना पड़ा। उन्होंने कांग्रेस पर वोट-बैंक की राजनीति करने के लिए ‘हिन्दू आतंक’ शब्द को उछालने और करोड़ों हिन्दुओं को आतंकवादी की तरह पेश कर उनकी भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया था।
उन्होंने यह भी कहा था कि हमारी 5,000 वर्ष पुरानी संस्कृति में, यह पहली बार है कि कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने शांतिपूर्वक रहने वाले हिन्दुओं को आतंकवादी कहने का पाप किया और पूरी दुनिया के सामने उनकी छवि धूमिल करने का काम किया।

उन्होंने कहा था कि कांग्रेस को कैसे माफ किया जा सकता है। जब आप लोग हिन्दू आतंकवाद की बात सुनते हैं तो क्या आप लोग दु:खी महसूस नहीं करते। एक समुदाय जो शांति, भाईचारा और सद्भाव के लिए जाना जाता है, उसे आतंकवाद से कैसे जोड़ा जा सकता है।
हजारों साल के इतिहास में एक भी ऐसा वाकया नहीं है जिसमें हिन्दू आतंकवाद का जिक्र हो, यहां तक कि ब्रिटिश भी यह नहीं कह सके। कांग्रेस ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी जिस पर आज फैसला आया है।

राहुल गांधी को हलफनामा दायर करने के निर्देश : उच्चतम न्यायालय ने राफेल विवाद में ‘चौकीदार चोर है’वाले बयान से जुड़े अदालत की अवमानना मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को मंगलवार को आड़े हाथों लेते हुए 6 मई तक नया हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने गांधी के हलफनामे से असंतोष जताया।

न्यायमूर्ति गोगोई ने हलफनामे में प्रयुक्त शब्द ‘रिग्रेट’ (खेद) को कोष्ठक में रखे जाने पर सवाल खड़े करते हुए कहा, “हम हलफनामे को समझ नहीं पाए।

इस पर गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायालय से कहा कि उनके मुवक्किल नया हलफनामा दायर करेंगे, इस पर न्यायालय ने उन्हें नए हलफनामे के लिए अगले सोमवार तक का समय दिया।
इससे पहले सुनवाई के दौरान सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल शीर्ष अदालत के हवाले से ‘चौकीदार चोर है’ के बयान को जोड़ने को लेकर खेद प्रकट करते हैं।

याचिकाकर्ता मीनाक्षी लेखी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि गांधी कभी बयान से मुकर जाते हैं तो कभी कहते हैं कि उन्होंने आदेश की समीक्षा नहीं की थी। इसलिए यह हलफनामा खारिज किया जाना चाहिए।
न्यायालय ने पुनर्विचार याचिकाओं को लेकर केंद्र सरकार की प्रारम्भिक आपत्तियों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद गांधी ने कहा था कि अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है। इसे लेकर लेखी ने अदालत की अवमानना का मामला दर्ज किया है।

 

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