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लगातार दूसरी बार मध्यावधि चुनाव, फिर बनी गठबंधन सरकार

शुक्रवार,मई 3, 2019
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चंद्रशेखर सरकार के 6 मार्च, 1991 को इस्तीफे के साथ ही लोकसभा भंग हो गई और महज डेढ वर्ष के भीतर ही देश को मध्यावधि चुनाव का सामना करना पडा। चंद्रशेखर मात्र 7 महीने तक प्रधानमंत्री के पद पर रहे। देश के इतिहास में यह दूसरा अवसर था जब मध्यावधि चुनाव हो ...
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नई दिल्ली। अपनी अदाकारी से लोगों के दिलों पर राज करने वाली बॉलीवुड हस्तियां चुनाव मैदान में भी अपने जलवे दिखाने में पीछे नहीं रहीं हैं और उन्होंने कई बार राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों को पछाड़ा है। लोकप्रियता और प्रशंसकों की पसंदगी की बदौलत चुनावी ...
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नई दिल्ली। वर्ष 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से बाहर हो गई तथा भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में पहली बार सरकार बनाई लेकिन इसके साथ ही केंद्र में राजनीतिक अस्थिरता का दौर तेज हो गया था।
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देश अप्रैल 1967 में आजादी के बाद चौथी चुनाव पूर्व की राजनीतिक गतिविधियों से गुजर रहा था। जिस कांग्रेस ने अब तक चुनावों में 73 प्रतिशत से कम सीटें नहीं जीती थीं, आगे आने वाला समय उसके लिए और बुरा साबित होने वाला था।
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लोकसभा का दूसरा आम चुनाव 1957 में हुआ। 1956 में भाषायी आधार पर हुए राज्यों के पुनर्गठन के बाद लोकसभा का यह आम चुनाव पहला चुनाव था। तमाम आशंकाओं के विपरीत 1952 के मुकाबले इस चुनाव में कांग्रेस की सीटें और वोट दोनों बढ़े।
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वर्ष 2014 में 16वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 282 सीटें मिली थीं, जो कि स्पष्ट बहुमत से 10 ज्यादा थीं।
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लोकसभा चुनाव 2019 : किस राज्य में कितनी सीटें...
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1971 में इंदिरा गांधी ने कांग्रेस को भारी बहुमत से जीत दिलाई। 'गरीबी हटाओ' के चुनावी नारे के साथ प्रचार करते हुए वे 352 सीटों के साथ संसद में वापस आईं। पिछले चुनावों की 283 सीटों के मुकाबले यह उल्लेखनीय सुधार था।
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भारत में सोलहवीं लोकसभा के लिए आम चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 तक 9 चरणों में संपन्न हुए। यह पहला अवसर था जब 9 चरणों में लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ। सभी नौ चरणों में औसत मतदान 66.38% के आसपास रहा जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
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नई दिल्ली। पांच वर्ष तक केंद्र में सफलतापूर्वक साझा सरकार चलाने वाली कांग्रेस ने 2009 के आम चुनाव में पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन किया और सहयोगी दलों के साथ मिलकर फिर से सरकार बनाई जबकि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार ...
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नई दिल्ली। केंद्र में पहली बार पांच वर्ष तक सरकार चलाने में सफल रही भारतीय जनता पार्टी को 2004 के चुनाव में जबर्दस्त झटका लगा जब जनता ने उसके ‘शाइनिंग इंडिया और फील गुड’ के प्रचार को धूल धूसरित कर दिया और कांग्रेस एक बार फिर सत्ता में आने में सफल ...
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नई दिल्ली। वर्ष 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में अस्थिरता का दौर समाप्त नहीं हुआ तथा एक बार फिर किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, भारतीय जनता पार्टी ने अन्य दलों के साथ मिलकर सरकार बनाई जो ज्यादा चल नहीं सकी।
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सातवीं लोकसभा के लिए 1980 में हुए चुनाव में एक बार फिर इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी हुई। जनता पार्टी के नेताओं के बीच की लड़ाई और देश में फैली राजनीतिक अस्थिरता ने कांग्रेस (आई) के पक्ष में काम किया, जिसने मतदाताओं को इंदिरा गांधी की मजबूत सरकार ...
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वर्ष 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एक बार फिर सत्ता से बाहर हो गई तथा भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र में पहली बार सरकार बनाई लेकिन इसके साथ ही केंद्र में राजनीतिक अस्थिरता का दौर तेज हो गया था। 11वें लोकसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी ...
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9वीं लोकसभा में 525 सीटों के लिए यह चुनाव 22 नवंबर और 26 नवंबर, 1989 को 2 चरणों में आयोजित हुए। नेशनल फ्रंट के लिए लोकसभा में यह आसान बहुमत प्राप्त हुआ और उसने वाम मोर्चे और भारतीय जनता पार्टी के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई।
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31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या ने कांग्रेस के लिए ऑक्सीजन का काम किया तथा उसके लिए सहानुभूति मत बनाए। इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद लोकसभा को भंग कर दिया गया और राजीव गांधी ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
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कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल की घोषणा 1977 के चुनावों में मुख्य मुद्दा था। राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक नागरिक स्वतंत्रताओं को समाप्त कर दिया गया था और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने व्यापक शक्तियां अपने हाथ में ले ली ...
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सन् 1962 में तीसरा आम चुनाव आते-आते प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सफेद चादर थोड़ी-थोड़ी मैली हो चुकी थी। उनके अपने ही दामाद सांसद फिरोज गांधी ने मूंदडा कांड का पर्दाफाश किया था, जिसके चलते नेहरू सरकार के वित्तमंत्री टीटी कृष्णामाचारी को इस्तीफा देना ...
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भारतीय लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। इसमें त्रिस्तरीय चुनाव होते हैं- लोकसभा, विधानसभा तथा नगर/ ग्राम पंचायत चुनाव। इसके अलावा मंडी जैसे निकायों के भी चुनाव संपूर्ण पारदर्शिता के साथ कराए जाते हैं। इन चुनावों में थोड़े-बहुत ...
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