एक व्यक्ति (डॉक्टर से)- 'डॉक्टर साहब, मुझे रात को बहुत बुरे-बुरे सपने आते हैं।' डॉक्टर- 'तुम स्वप्न में क्या देखते हो?' व्यक्ति- 'मैं रात को घोड़ा बन गया हूँ और घास खाने लगा हूँ।' डॉक्टर- 'इसमें परेशानी किस बात की है, सपना ही तो है।' व्यक्ति -'दिक्कत यह है कि जब मैं सुबह उठा, तो आधी चटाई खा चुका था।'
ओह नो टिंकू : 'मम्मी। बैंक में सर्विस करने वाली हमारी जो नई पड़ोसन आंटी हैं न, मुझे आज उनका नाम मालूम पड़ गया।' मम्मी : 'कैसे?' टिंकू : 'मैं आज जब भैया के साथ बैंक गया तो मैंने देखा वो आंटी वहीं काम कर रही थीं और पता है उनके सामने कांउटर पर उनकी नेमप्लेट भी रखी थी।' मम्मी : 'तो, क्या लिखा था नेमप्लेट पर?' टिंकू : 'चालू खाता'
गधा पुत्र (पिता से)- 'पिताजी-पिताजी ! दूल्हे को घोड़े पर क्यों बिठाते हैं, गधे पर क्यों नहीं ?' पिता- 'बेटे ! एक गधे को दूसरे गधे पर नहीं बैठाया जाता।'
पगडंडी एक मूर्ख- 'अगर तुम इस टॉर्च की पगडंडी पर ऊपर तक जाओगे, तो मैं तुम्हें तीन हजार रुपए दूँगा।' दूसरा मूर्ख- 'मैं इतना मूर्ख नहीं हूँ। मैं जानता हूँ जैसे ही मैं पगडंडी पर ऊपर पहुँच जाऊँगा, तुम टॉर्च बंद कर दोगे।'