गांव की हवाएं
-ललित भारद्वाज
सुन्दर साछोटा सामिट्टी का कच्चा घरगोबर से लिपा हुआ आंगनघर की दीवारों परचूने व रोली से बने हुए मांडनेमन को बहुत भाते हैंगम की सरहद के उस पारदूर बरगद के पेड़ की घनी छांव के नीचे बने हुएबड़े चबूतरे पर बैठेहुक्का व चीलम पी रहेगांव के कुछ बूढ़े-बुजुर्ग लोगएक सुखद से वातावरण का अहसास करवाते हैंगोधूली के समयदूर के खेत-खलिहानों सेधूल उड़ाते हुए कच्चे रास्तों पर सेअपने-अपने घरों कोआते हुए पालतू पशु शहर के कोलाहल से कहीं दूरखुशनुमा जिंदगी का अहसास करवाते हैंपास से देखा गांव की मस्त हवाओं कोतो ही जानाकितना सुखद होता हैछलरहित साफ-सुथरे भोले-भावों कागांव का भोला-भालाछोटा-सा संसार।