गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026
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Written By WD

गांव की हवाएं

-ललित भारद्वाज

हिन्दी कविता
FILE
सुन्दर सा
छोटा सा
मिट्टी का कच्चा घर
गोबर से लिपा हुआ आंगन
घर की दीवारों पर
चूने व रोली से बने हुए मांडने
मन को बहुत भाते हैं
गम की सरहद के उस पार
दूर बरगद के पेड़ की घनी छांव के नीचे बने हुए
बड़े चबूतरे पर बैठे
हुक्का व चीलम पी रहे
गांव के कुछ बूढ़े-बुजुर्ग लोग
एक सुखद से वातावरण का अहसास करवाते हैं
गोधूली के समय
दूर के खेत-खलिहानों से
धूल उड़ाते हुए
कच्चे रास्तों पर से
अपने-अपने घरों को
आते हुए पालतू पशु
शहर के कोलाहल से कहीं दूर
खुशनुमा जिंदगी का अहसास करवाते हैं
पास से देखा गांव की मस्त हवाओं को
तो ही जाना
कितना सुखद होता है
छलरहित साफ-सुथरे भोले-भावों का
गांव का भोला-भाला
छोटा-सा संसार।