ईद की सेवइयाँ
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ये सेवइयाँ ईद पर विशेषतौर पर बनाई जाती हैं। लोग एक-दूसरे के घर ईद की मुबारकबाद देने पहुँचते हैं, तो लोग सेवइयों से एक-दूसरे का मुँह मीठा कराते हैं। सेवइयों के अलावा भी कई मिठाईयाँ होती हैं, लेकिन सेवई का ईद पर अलग ही महत्व होता है। कोई बाजार से बनी-बनाई सेवइयाँ खरीदता है तो कोई अपने घर पर ही इसे तैयार करता है।
ऐसा माना जाता है कि सेवई एक ऐसा पकवान है, जिसे हर वर्ग का व्यक्ति खरीद सकता है या उसे घर पर भी तैयार कर सकता है। ये सेवइयाँ मूल रूप से आटे से तैयार की जाती हैं, और आटा हमारे भोजन में प्रमुखता से शामिल है। इसलिए सदियों से ईद पर सेवई खाने का चलन है। हर कोई इसे अपने सामर्थ्य के अनुसार तैयार करते हैं। यानी कोई तरह-तरह के मावे डालकर इसे और भी जायकेदार बनाते हैं तो कोई साधारण तरीके से तैयार की गई सेवइयों का ही मजा लेते हैं।
सेवइयाँ ही क्यों :
ऐसा माना जाता है कि रमजान का महीना खुदा का अपने बंदो के लिए तोहफे जैसा होता है। जब लोग रमजान के तीस दिनों के कठिन रोजे
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सेवई के प्रकार :
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क्या कहना है पुरानी पीढ़ी का :
पुरानी पीढ़ी के कुछ लोग अपने दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि ईद के मौके पर वे अपने घरों तक ही सिमटकर नहीं रह जाते थे। महिलाओं में भले ही पहले पर्दा प्रथा का काफी कट्टरता से पालन किया जाता था, लेकिन ईद के मौके पर मोहल्ले की महिलाएँ इकट्ठा होती थीं और हँसते-हँसाते सेवइयाँ तैयार करती थीं। सारे लोग एक जगह इकट्ठा होते और इन सेवइयों का आनंद लेते थे। अब उन्हें इस बात का अफसोस होता है कि अब पहले वाली बात त्यौहारों में नहीं रह गई है। वो हँसी-ठिठोली के साथ सेवइयों का मजा लेने वाले दिन तो जैसे लद ही गए। लेकिन फिर भी सेवइयों की वह मिठास अब भी बरकरार है।

