गुरुवार, 15 जनवरी 2026
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Written By WD

इदैन का बयान

ईद बक़राईद नमाज इदैन
अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है ऐ मेहबूब बेशक हमने तुम्हे बेशुमार खूबियाँ अता फरमाईं तो तुम अपने रब के लिए नमाज पढ़ो और क़ुरबानी करो (इस आयात की तफसिर में एक कौल यह भी है कि नमाज से मुराद नमाज़े ईद है) (कन्जूलईमान तर्ज़मे कुरान रुकु 33 सफा 962)

ईद व बक़राईद की नमाज वाजिब है मगर सब पर नहीं बल्कि सिर्फ उन्हीं लोगों पर जिन पर जुमा फर्ज़ है बिला-उज्रे शरई के ईद की नमाज छोड़ना सख्त गुनाह है। (रद्दुल मुहतार 555) व (कन्जूदकाईक सफा 45)

मसअला- इदैन की नमाज़ जायज़ होने की वही शर्तें हैं जो जुमा के लिए हैं सिर्फ इतना फर्क है कि जुमा का खुतबा शर्त है और इदैन का खुतबा सुन्नत है दूसरा फर्क यह है नमाजे जुमा का खुतबा नमाजे जुमा से पहले है और इदैन का खुतबा नमाजे इदैन के बाद है तीसरा फर्क यह है कि जुमा के लिए अजान व एकामत है और इदैन के लिए सिर्फ दो बार अस्सातुलजामेअह कहकर नमाज इदैन के ऐलान करने की इजाजत है।

मसअला- ईद व बक़रीद की नमाज़ का वक्त एक नेजह आफ़ताब बलंद होने के बाद से सूरज के ज्वाल के पहले तक है।

मसअला- ईदे अजहा तमाम अहकाम में ईदुलफित्र की तरह है। ईदुलफित्र में नमाज़ से पहले कुछ खाना बेहतर है और इदेअजहा में नमाज से पहले कुछ न खाना बेहतर है। ईदुलफित्र की नमाज़ किसी उज्र की वजह से दूसरे दिन पढ़ी जा सकती है तीसरे दिन नहीं। ईदे अजहा की नमाज़ किसी भी उज्र की वजह से तीसरे दिन भी पढ़ी जा सकती है। (सामाने आखेरत स. 197)

ईद की नमाज़ का तरीक़ा
पहले इस तरह नियत करें कि नीयत की मैंने दो रकअत नमाज ईदुलफित्र या ईदुज्जुहा कि छः तकबीरों के साथ खास-वास्ते अल्लाह तआला के लिए (मुक्तदी इतना और कहे पीछे इस इमाम के) मुँह मेरा तरफ काबा शरीफ के फिर कानों तक हाथ उठाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ नाक के नीचे बाँध लें फिर सना पढ़ें फिर कानों तक हाथ ले जाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ छो़ड़ दें फिर कानों तक हाथ उठाएँ और अल्लाहो अकबर कहकर हाथ बाँध लें खुलासा यह है कि पहली तकबीर के बाद हाथ बाँध लें और फिर चौथी तकबीर के बाद हाथ बाँधें और दूसरी और तीसरी तकबीर के बाद हाथ छोड़ दें यानी सिर्फ दो बार हाथ छोड़ना है। चौथी तकबीर के बाद इमाम आहिस्ता से अऊज़ुबिल्लाह व बिस्मिल्लाह पढ़कर बलन्द आवाज से अलहमदो और कोई सुरत पढ़ें और रुकु और सजदा से फारिग़ होकर दूसरी रकअत से पहले अलहमदो और सूरत पढ़ें फिर तीन बार कानों तक हाथ उठाकर हर बार अल्लाहो अकबर कहते हुए हाथ छोड़ दे, और चौथी बार बिला हाथ उठाए तकबीर कहता हुआ रुकु में जाएँ। बाकी नमाज दूसरी नमाजों की तरह पूरी करे और सलाम फेरने के बाद इमाम दो खुतबे पढ़ें फिर दुआ माँगें।

मसअला- पहले खुतबा शुरू करने से पहले नौ बार और दूसरे खुतबे से पहले सात बार और मेम्बर से उतरने से पहले चौदह बार अल्लाहो अकबर आहिस्ता कहना सुन्नत है। (दुर्रे मुख्तार स. 561)

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