पीने लायक नहीं है आगरा का पानी

आगरा (वार्ता)| वार्ता| पुनः संशोधित रविवार, 9 दिसंबर 2007 (15:05 IST)
जापान बैंक ऑफ इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) ने कहा है कि स्वास्थ्य के प्रति हानिकारक अवयवों की अधिकता की वजह से आगरा का पानी पीने लायक नहीं रह गया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जेबीआईसी तथा भारत के जाँच विशेषज्ञों ने हाल में आगरा में 1180 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने वाली योजना पर काम शुरू होने से पूर्व यहाँ पानी की स्थिति जानने के लिए एक सर्वेक्षण किया था।

इस सिलसिले में कल हुई समीक्षा बैठक में पेश रिपोर्ट के आधार पर विशेषज्ञों ने माना कि आगरा का पानी पीने लायक नहीं रह गया है।
नमूना सर्वेक्षण से प्राप्त नतीजों के अनुसार आगरा नगर महापालिका के 90 में से 22 वार्ड ऐसे हैं, जहाँ हल्के पीले या मटमैले रंग के पानी की आपूर्ति की जा रही है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा अधिकांश स्थानों पर अमोनिया की मात्रा काफी अधिक पाई गई। लगभग सात स्थानों पर पानी में अन्य नुकसानदेह अवयव भी पाए गए। अधिकांश स्थानों पर पानी में क्लोरीन समेत अन्य रासायनिक तत्वों की मात्रा खतरनाक रूप से ज्यादा पाई गई है।
चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. बीएम अग्रवाल ने बताया कि पानी में क्लोरोफॉर्म की अधिक मात्रा होने के कारण गैस्ट्रोएन्टाइटिस तथा डायरिया जैसी गंभीर बीमारियों के अलावा संक्रमण भी फैल सकता है।

उन्होंने बताया कि दूषित पानी पीने से टाइफाइड भी हो सकता है और ज्यादा क्लोरीन मिला पानी पीने से शरीर के तंत्रिका तंत्र पर भी खासा बुरा असर पड़ सकता है।

 

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