0

कटते जंगल और विनाश की दस्तक

सोमवार,जुलाई 6, 2009
0
1
पर्यावरण की समस्याओं पर विशेषज्ञों के विचार एवं विवाद इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में देखते व सुनते हैं। आज पर्यावरण दिवस है इसलिए आज हम सब इस दिन को याद कर रहे हैं। हालाँकि अब हम क्या करें कि किस प्रकार से पर्यावरण के बुरे प्रभावों को दूर कर ...
1
2

पोवई में हरियाली...

शुक्रवार,जून 6, 2008
जब हम किसी बिल्डर का नाम देखते है तो हमें कटे हुए पेड़ पौधे, बंजर ज़मीन एवं उस पर बनी ऊँचीं ईमारतों के दृश्य दिखाई पड़ते है। परंतु पोवई क्षेत्र के स्थानीय बिल्डर हीरानंदानी ने काँक्रीट जंगल का निर्माण न कर पोवई के सीमित होते पर्यावरण को फिर से ...
2
3

गुलमोहर

गुरुवार,जून 5, 2008
मुझ को खुशी मिली, तेरे जीवन से गुलमोहर तू मेरे दिल के साथ है बचपन से गुलमोहर रग़बत दर-ओ-दीवार से मुझ को नहीं ज़रा मैं तो बंधा हूँ बस तेरे बंधन से गुलमोहर
3
4
छोटा-सा तुलसी बिरवा। नन्ही-सी हरी कच एक नाजुक पत्ती। जब रोपा तो एक साथ कई स्वर उठे 'नहीं पनपेगा', 'जड़ नहीं पकड़ेगा'। मन का प्रबल विश्वास 'चेतेगा, पनपेगा, जरूर पनपेगा।' आत्मा की हर भावुक लहर से उसे सिंचित किया। संपूर्ण एकाग्रता से पोषित किया।
4
4
5
विश्व की वन्य प्रजातियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली स्विट्जरलैंड के एक संस्था इंटरनेशनल यूनियन फोर द कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IEUSN) ने वन्य प्राणियों और पौधों की 12 हजार से भी अधिक प्रजातियों की सूची जारी की है जिनके आने वाले कुछ सालों में लुप्त
5
6
'ये माटी सभी की कहानी कहेगी' नवरंग फिल्म के इस लोकप्रिय गीत के बोल आज अपने मायने बदल रहें हैं। सबकी कहानी कहने वाली मिट्टी को इंतजार है कि कोई उसकी कहानी भी सुनाए, कोई उसका दर्द भी समझे।
6
7

गोवा की पहाडिय़ाँ

बुधवार,जून 4, 2008
हम एक विशाल खदान और खूबसूरत जलकुंड के बीच खड़े थे। स्थानीय़ कार्यकर्ता मुझे समझा रहे थे कि यह लौह अयस्क की खदान सालौलिम जलस्रोत के जलग्रहण क्षेत्र में स्थित है, जो दक्षिण गोवा का एकमात्र जलस्रोत है।
7
8
मनुष्य को ईश्वर का दिया हुआ सबसे नायाब तोहफा है, प्रकृति। इस तोहफे की साज संभाल मनुष्य सहजता से कर लें, इसलिए हमारे धर्म में धरती को माता, नदियों को देवी और वृक्षों को देवता की संज्ञा दी है।
8
8
9
विभिन्न कंपनियों के विज्ञापन बोर्डों ने शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है। शहर का कोई ऐसा खाली हिस्सा नहीं बचा है, जहाँ पर ये विज्ञापन बोर्ड लगे न हों। इन विज्ञापन बोर्डों को लगाने में यदि बीच में कोई बड़ा पेड़ आया है तो उसको बेरहमी से काटने में संकोच ...
9
10
नीम, मेरी स्मृतियों के हरे-भरे बगीचे में एक खास जगह पर खड़ा है। मेरे लुभावने अतीत का 'मीठा' हिस्सा बनकर। नीम चाहे पुराना हो या नया, सूखा हो या हरियाता, कड़वा हो या मीठा, युवा हो या बूढ़ा। नीम हर रूप में मोहता है।
10
11
प्रकृति के इस चक्र में साफ-सफाई का काम करने वाले गिद्दों की संख्या पिछले एक दशकों में एकाएक घट गई है, लगभग सम्पूर्ण दक्षिण एशिया में विलुप्त हो रहे गिद्धों को बचाने के लिए भारत सरकार ने प्रयास शुरु कर दिए हैं। इसके तहत पशुओं को दी जाने वाली उस दवा ...
11
12

हरियाली का सपना

बुधवार,जून 4, 2008
वो पेड़ो की टहनियों पर झूलता बचपन वो नदी के पानी संग बहता यौवन, कहीं दूर बरसात में नाचते मोर की मस्‍ती वो बारिश के मौसम में हरी-हरी बस्ती क्यों सब परियों की कहानी-सा लगता है?
12
13

बहुत पुरानी बात है

बुधवार,जून 4, 2008
बहुत पुरानी बात है एक जंगल हुआ करता था जहाँ हुआ करता था वृक्षों का नृत्य और ठंडी हवाओं के साथ पत्तों की जुगलबंदी
13
14

एक चिड़िया

बुधवार,जून 4, 2008
एक चिड़िया दिनभर अपने बच्चों के लिए दाना चुगने के बाद लौट आती है अपने घोंसले में वैसे ही जैसे हर शाम
14
15
पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए पता नहीं क्यों शब्द काँप रहे हैं, भावनाएँ थरथरा रही हैं। किसे दें शुभकामनाएँ और कैसे दें। पिछले दिनों शहर में विकास के नाम पर वर्षों से अटल खड़े पेड़ों की निर्मम हत्या देखी।
15
16
ध्वनि प्रदूषण ने गंभीर समस्या का रूप धारण कर लिया है। यह एक ऐसी समस्या है जो छोटे-बड़े, गरीब-अमीर, शिक्षित-अनपढ़, महिला-पुरुष सभी को समान रूप से प्रभावित करती है। 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक होता है जिसके गंभीर तथा दूरगामी
16
17

प्रदूषण क्या है?

बुधवार,जून 4, 2008
वर्तमान युग औद्योगिक विकास का युग है। संसार के सभी विकासशील देशों में हजारों लाखों फैक्टरियाँ दिन रात चलती रहती हैं। इन सब के प्रभाव से हमारा वातावरण दूषित हो गया है। जो वायु हमें सांस लेने के लिए चाहिए, वह शुद्ध नहीं रही।
17
18
इस दुनिया के पार भी क्या कोई दुनिया है? इस सवाल का जवाब अभी तक ठीक-ठीक पता नहीं चला। जब भी कभी, कहीं इस तरह का कोई सवाल कोई उठाता है तो जवाब देने वाला व्यक्ति पसोपेश में पड़ जाता था कि वह क्या कहे क्योंकि अभी तक विज्ञान भी यह नहीं खोज पाया
18
19
जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहाँ यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों। हमारा देश जंगल, वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। सम्पूर्ण विश्व में बड़े ही विचित्र तथा आकर्षक वन्य जीव पाए ...
19