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उर्दू लेखिका हमीदा सालिम का निधन

रविवार,अगस्त 16, 2015
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हाल ही में साहित्य अकादमी सम्मान से नवाज़े गए शायर मुनव्वर राना से वेबदुनिया ने ख़ास मुलाक़ात की। इस दौरान हिन्दी और उर्दू अदब की ज़ीनत, मुनव्वर राना ने खुलकर अपनी बात और जज़्बात बयां किए। जहां वो अपनी अब तक की ज़िंदगी/शायरी से मुत्मइन नज़र आए, वहीं ...
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बीस-बाईस साल से मेरे शहर इंदौर को न जाने क्या हो गया है? न बंबई बाज़ार में शे'रो-शायरी की महफिलें मुनअकिद हो रही हैं और न रानीपुरा में। वरना ये दोनों मोहल्ले अपनी अदबी ख़िदमात के लिए काफ़ी मशहूर थे। एक तरफ़ 'शादाँ' इंदौरी, 'ताबाँ' इंदौरी
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मुनव्‍वर राना

शनिवार,जनवरी 12, 2008
शायरी की शौकीन इंदौर की जनता को मुनव्वर राना की शायरी इतनी पसंद है कि वह मीलों दूर जाकर रात भर जागकर उन्हें सुनती हैं। मुनव्वर राना भी अपने इन चाहने वालों से प्यार करते हैं, उन्हें अपने ताज़ा और नए शेर सुनाते हैं और उनकी फरमाइशों
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