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कुंभ संक्रांति 2020 : अथाह दौलत के मालिक बनना चाहते हैं तो शनि के 5 मंत्र पढ़ें माह भर

रविवार,फ़रवरी 16, 2020
Kumbh sankranti 2020
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23 फरवरी के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए शाम के समय घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का उपयोग करें। प्रस्तु‍त हैं फाल्गुन अमावस्या के 2 सरल उपाय...
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साल में 12 अमावस्या होती हैं। इस दिन 108 बार तुलसी की परिक्रमा करने से मन को शांति की अनुभूति होती है। जो लोग आध्यात्मिक मार्ग पर बढ़ना चाहते हैं उनके लिए भी यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आइए जानें साल भर की 12 अमावस कब कब आ रही हैं...
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कभी आपने सोचा कि शिव प्रतीकों के पीछे का रहस्य क्या है? शिव की वेशभूषा ऐसी है कि प्रत्येक धर्म के लोग उनमें अपने प्रतीक ढूंढ सकते हैं। आओ जानते हैं शिव प्रतीकों के रहस्य...
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ग्यारस अर्थात ग्यारह तिथि को एकादशी और तेरस या त्रयोदशी तिथि को प्रदोष कहा जाता है। प्रत्येक शुक्ल और कृष्ण पक्ष में यह दोनों ही तिथियां दो बार आती है। हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है।
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19 फरवरी 2020, फाल्गुन कृष्ण एकादशी के दिन विजया एकादशी मनाई जा रही है। इस दिन व्रत-उपवास रखकर और रात्रि जागरण करके श्रीहरि विष्णुजी का पूजन-अर्चन तथा ध्यान करना चाहिए। यह विजया एकादशी 10 दिशाओं से विजय दिलाती है...आइए पढ़ें एकादशी का महात्म्य, पूजा ...
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किसी खास मनोरथ की पूर्ति के लिए तदनुसार पूजन सामग्री तथा विधि से रुद्राभिषेक की जाती है। रुद्राभिषेक के विभिन्न पूजन के लाभ इस प्रकार हैं-
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रुद्र अर्थात भूतभावन भगवान शिव का अभिषेक। शिव और रुद्र परस्पर एक-दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही रुद्र कहा जाता है, क्योंकि रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र: यानी कि भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।
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सुप्रसिद्ध उक्ति है- 'पहला सुख निरोगी काया...' अर्थात स्वस्थ रहना, निरोगी रहना पहला सुख माना गया है। लेकिन कभी-कभी जन्म पत्रिका में ऐसी ग्रह स्थिति का निर्माण हो जाता है कि जातक निरोगी नहीं रह पाता व सदैव रोगग्रस्त रहता है।
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महाराष्ट्र के एक प्रसिद्ध संत थे समर्थ स्वामी रामदास। वे महाराजा छत्रपति शिवाजी के गुरु थे। उनके विचारों ने लोगों और समाज को एक नई दिशा दी। इतना ही नहीं उनके विचारों पर अमल करने से आप स्वयं अपने जीवन की राह आसान बना लेंगे।
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कहा जाता है कि देवी सीता राजा जनक की गोद ली हुई पुत्री थीं...सवाल उठता है कि आखिर माता सीता का जन्म कैसे हुआ था? आइए जानते हैं कथा...
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गजानन महाराज का प्रकटोत्सव 14 से 16 फरवरी 2020 तक मनाया जा रहा है। इसमें 3 दिवसीय कार्यक्रम होंगे, जिसमें श्रीजी का पारायण, चरण पादुका पूजन और भ्रमण तथा जलाभिषेक, कलश पूजन, यज्ञ और इसके बाद भंडारे या महाप्रसादी का वितरण होता है।
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इस वर्ष 2020 में महाशिवरात्रि का पवित्र पर्व 21 फरवरी को आ रहा है। भगवान भोलेनाथ शिव शंकर को प्रसन्न करने का यह शुभ दिन सभी हिन्दू भक्तों के लिए विशेष होता है।
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इस प्रार्थना से अभिभूत होकर भगवान महाकाल स्थिर रूप से वहीं विराजित हो गए और समूची अवंतिका नगरी शिवमय हो गई।
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'शिवरात्रि' के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- 'एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग ...
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23 फरवरी 2020 रविवार, को फाल्गुन अमावस्या है। इस अमावस्या का शास्त्रों में अत्यधिक महत्व बताया गया है। हिन्दू धर्म-संस्कृति में आस्था रखने वालों के लिए वैसे तो प्रत्येक मास की
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व्रत कथा का वाचन करें। मृग व शिकारी की कथा और शिव लिंग के प्रकट होने की कथा तथा शिव पुराण में और भी कथाएं उपलव्ध हैं। वेबदुनिया के धर्म संसार के व्रत-त्योहार के अंतर्गत महाशिवरात्रि पेज पर शिव कथाएं पढ़ीं जा सकती हैं।
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देवी सीता मिथिला के राजा जनक की ज्येष्ठ पुत्री थीं इसलिए उन्हें 'जानकी' भी कहा जाता है। कहते हैं कि राजा जनक को माता सीता एक खेत से मिली थी। इसीलिए उन्हें धरती पुत्री भी कहा जाता है। लक्ष्मण, भारत और शत्रुघ्न की पत्नियां माता सीता की बहनें थीं।
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महाशिवरात्रि का व्रत प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि को भारत सहित विश्व के कई हिस्सों में ईश्वर की सत्ता में विश्वास रखने वाले भक्तों द्वारा बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाएगा।
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पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में जब महाराजा जनक संतान प्राप्ति की कामना से यज्ञ की भूमि तैयार करने के लिए हल से भूमि जोत रहे थे, उसी समय पृथ्वी से एक बालिका का प्राकट्य हुआ।
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