1. धर्म-संसार
  2. नवरात्रि 2022
  3. नवरात्रि पूजा
  4. Maha ashtami

महाष्टमी पर कैसे करें कन्या पूजन सरल और सही विधि | Maha ashtami

kanya pujan
Ashtami Puja 2022 : 3 अक्टूबर 2022 सोमवार के दिन शारदीय नवरात्रि में अष्टमी का महापर्व मनाया जा रहा है जिसे महा अष्टमी कहते हैं। इस दिन पूजन के साथ ही हवन, कन्या भोज और कन्या पूजन का खास महत्व रहता है।  जब नवरात्रि में व्रत का समापन होता है तब पूजन, हवन के साथ ही व्रत का उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दौरान ही कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन होता है। आओ जानते हैं किस तरह सरल विधि से कर सकते हैं क्या पूजन।
 
कैसे करें कन्या पूजा | Kanya pujan kaise kare: 
1. कन्या भोज के पहले कन्या पूजन किया जाता है। इस दिन कम से कम 9 कन्याओं को आमंत्रित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्या कुमारी पूजा के लिए उपयुक्त होती हैं।
 
2. सभी कन्याओं को कुश के आसान पर या लकड़ी के पाट पर बैठाकर उनके पैरों को पानी या दूध से धोएं। फिर पैर धोने के बाद उनके पैरों में महावार लगाकर उनका श्रृंगार करें और फिर उनके माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम का तिलक लगाकर उनकी पूजा और आरती करें।
 
3. इसके बाद सभी कन्याओं को भोजन कराएं। साथ ही एक लांगुरिया (छोटा लड़का) को खीर, पूरी, प्रसाद, हलवा, चने की सब्जी आदि खिलाएं।
kanya pujan 2022
4. भोजन कराने के बाद उन्हें दक्षिणा दें, उन्हें रूमाल, चुनरी, फल और खिलौने देकर उनका चरण स्पर्श करके उन्हें खुशी खुशी से विदा करें। कन्याओं को तिलक करके, हाथ में मौली बांधकर, गिफ्ट दक्षिणा आदि देकर आशीर्वाद लिया जाता है, फिर उन्हें विदा किया जाता है।
 
5. कुमारी पूजा में ये बालिकाएं देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को दर्शाती हैं- कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, काली, चंडिका, शनभावी, दुर्गा और भद्रा। कन्याओं की आयु 10 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
 
6. साल की कन्या कुमारी को पूजने से धन, 3 साल की त्रिमूर्ति को पूजने से धान्य, 4 साल की कल्याणी को पूजने से सुख, 5 साल की रोहिणी को पूजने से सफलता, 6 साल की कालिका को पूजने से यश, 7 साल की चंडिका को पूजने से समृद्धि, 8 साल की शांभवी को पूजने से पराक्रम, 9 साल की दुर्गा को पूजने से वैभव और 10 साल की कन्या सुभद्रा को पूजने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
अगला लेख
मां महागौरी की महाष्टमी 2022 : आज के 5 महासंयोग, 3 महामुहूर्त और 8 महाउपाय