शुक्रवार, 26 जून 2026
Choose your language
हिन्दी
English
தமிழ்
मराठी
తెలుగు
മലയാളം
ಕನ್ನಡ
ગુજરાતી
Follow us
Newsletter
Miscellaneous Urdu Aajkasher 30
समाचार
योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश
मुख्य ख़बरें
राष्ट्रीय
अंतरराष्ट्रीय
इंदौर
प्रादेशिक
मध्यप्रदेश
छत्तीसगढ़
गुजरात
महाराष्ट्र
राजस्थान
काम की बात
ऑटो मोबाइल
क्राइम
फैक्ट चेक
व्यापार
मोबाइल मेनिया
बॉलीवुड
बॉलीवुड न्यूज़
हॉट शॉट
वेब स्टोरी
मूवी रिव्यू
आलेख
पर्यटन
खुल जा सिम सिम
आने वाली फिल्म
बॉलीवुड फोकस
सलमान खान
सनी लियोन
टीवी
मुलाकात
क्रिकेट
अन्य खेल
धर्म-संसार
एकादशी
भविष्यवाणी
सनातन धर्म
श्री कृष्णा
रामायण
महाभारत
व्रत-त्योहार
धर्म-दर्शन
श्रीरामचरितमानस
फीफा विश्वकप
ज्योतिष
दैनिक राशिफल
आज का जन्मदिन
आज का मुहूर्त
राशियां
लाल किताब
वास्तु-फेंगशुई
टैरो भविष्यवाणी
रामशलाका
चौघड़िया
आलेख
नवग्रह
रत्न विज्ञान
श्रीरामचरितमानस
श्रीमद्भगवद्गीता
समाचार
योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश
मुख्य ख़बरें
राष्ट्रीय
अंतरराष्ट्रीय
इंदौर
प्रादेशिक
मध्यप्रदेश
छत्तीसगढ़
गुजरात
महाराष्ट्र
राजस्थान
काम की बात
ऑटो मोबाइल
क्राइम
फैक्ट चेक
व्यापार
मोबाइल मेनिया
बॉलीवुड
बॉलीवुड न्यूज़
हॉट शॉट
वेब स्टोरी
मूवी रिव्यू
आलेख
पर्यटन
खुल जा सिम सिम
आने वाली फिल्म
बॉलीवुड फोकस
सलमान खान
सनी लियोन
टीवी
मुलाकात
क्रिकेट
अन्य खेल
धर्म-संसार
एकादशी
भविष्यवाणी
सनातन धर्म
श्री कृष्णा
रामायण
महाभारत
व्रत-त्योहार
धर्म-दर्शन
श्रीरामचरितमानस
फीफा विश्वकप
ज्योतिष
दैनिक राशिफल
आज का जन्मदिन
आज का मुहूर्त
राशियां
लाल किताब
वास्तु-फेंगशुई
टैरो भविष्यवाणी
रामशलाका
चौघड़िया
आलेख
नवग्रह
रत्न विज्ञान
श्रीरामचरितमानस
श्रीमद्भगवद्गीता
×
Close
लाइफ स्टाइल
उर्दू साहित्य
आज का शेर
अफ़सोस तो ये है कि मेरे मद्दे मुक़ाबिल
शुक्रवार,फ़रवरी 6, 2009
ये तज्रबे सफर के किसी और को सुना
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
तर दामनी पे शेख हमारी न जइयो
कमसिनी का हुस्न था वो, ये जवानी की बहार
फ़रिश्ते वक़्त से पहले अज़ाब देने लगे
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
रोशनी बाँट ली उभरे हुए मीनारों ने
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
गंजीनाए माअनी का तिलिस्म उसको समझये
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
वाजिब है मालदार को देना ज़कात का
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
9
तुझे न माने कोई इससे तुझको क्या मजरूह
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
या रब न वो समझे हैं न समझेंगे मेरी बात
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
रोक सकता हमें ज़िन्दान-ए-बाला क्या मजरूह
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
फूल की पत्ती से कट सकता है हीरे का जिगर
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
तुम हो क्या, ये तुम्हें मालूम नहीं है शायद
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
देश की ख़ातिर मिटादे अपनी हस्ती तू नदीम
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
उस आफ़ताबे शहर को उर्दू ज़ुबान में
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
मुझी को नाज़ से देखा जला जो परवाना
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
17
दी मुअ़ज्ज़न ने अज़ां वस्ल की शब पिछले पहर
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
मुत्तसिल रोने से शायद कि बुझे आतिशे दिल
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
ख़्याल-ए-वस्ल को अब आरज़ू झूला झुलाती है
शुक्रवार,जनवरी 23, 2009
और पढ़ें