कहीं पेंगुइन ही ‘एलियन’ तो नहीं, शुक्र ग्रह से धरती पर कैसे आया ये केमिकल? वैज्ञानिकों ने निकाला तगड़ा ‘कनेक्‍शन’

Last Updated: मंगलवार, 14 सितम्बर 2021 (13:29 IST)
लंदन, दूसरे ग्रहों के एलियन को लेकर अक्‍सर खबरें आती रहीं हैं, लेकिन इस बार जो खबर सामने आई है, वो चौंकाने वाली है। क्‍योंकि वैज्ञानिकों ने इस बार तगड़ा कनेक्‍शन खोज निकाला है।

वैज्ञानिकों की रिसर्च में पेंगुइन के मल में शुक्र ग्रह का केमिकल मिला है। इस केमिकल का शुक्र ग्रह से सीधा कनेक्‍शन मिला है। अब वैज्ञानिक इस रिसर्च में लग गए हैं कि यह केमिकल धरती पर कैसे पहुंचा और इसके क्‍या कारण हो सकते हैं।


इतना ही नहीं, लंदन के वैज्ञानिकों ने जो खोज की है, उसके मुताबिक एलियंस कई साल से धरती पर हमारे साथ ही रह रहे हैं। यही नहीं वे हमें बहुत पसंद भी हैं। जी हां, ये एलियंस और कोई नहीं बल्कि पेंगुइन हैं।

वैज्ञानिकों की खोज में सामने आया है कि पेंगुइन के मल में शुक्र ग्रह पर पाए जाने वाला एक केमिकल फॉस्‍फीन मिला है। हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि शुक्र ग्रह से 38 मिलियन मील (61 करोड़ किलोमीटर) दूर पृथ्वी (Earth) पर फॉस्फीन कैसे मौजूद है। ये वैज्ञानिक जेंटू पेंगुइन की जीवन शैली का अध्ययन करने की योजना बना रहे हैं, ताकि यह जान सकें कि वे इस केमिकल का उत्‍पादन कैसे कर रहे हैं।

डेली स्‍टार की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में इंपीरियल कॉलेज,लंदन के डॉ. डेव क्लेमेंट्स ने कहा है,

'हम आश्वस्त हैं कि फॉस्फीन सही है, लेकिन हम यह नहीं जानते हैं कि यह कैसे बन रहा है। कुछ बैक्‍टीरिया हैं जो फॉस्फीन का उत्पादन करते हैं। यह तालाब के कीचड़ और पेंगुइन गुआनो में मिला है'

पिछले साल शुक्र ग्रह के आसपास की गैस की परतों में यह केमिकल मिला था। इस ग्रह का एटमॉसफेयर पृथ्वी के जैसा ही है। नासा के मुताबि‍क 18 दिसंबर को फ्रेंच गुयाना से जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप की लॉन्चिंग से पहले

नया शोध किया जा रहा है। जिसमें यह अन्य ग्रहों पर जीवन का पता लगाया जा रहा है। जेम्स वेब टेलिस्कोप आने वाले सालों में नासा के लिए अंतरि‍क्ष की गहराइयों का अध्ययन करेगा। यह प्रोजेक्‍ट नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के कोलाबरेशन से चलाया जा रहा है।

इसके साथ ही नए खुलासे को लेकर ब्रिटेन के वैज्ञानिकों का मानना ​​​​है कि पेंगुइन का अध्‍ययन करने से उन्‍हें दूसरी दुनिया में मौजूद जीवों के प्रकारों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।



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