धनतेरस पर क्यों खरीदते हैं सोना, चांदी, बर्तन और धनिया, क्या होगा फायदा

Guru Pushya Nakshatra shopping
अनिरुद्ध जोशी|
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2021: पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष के त्रयोदशी अर्थात धन तेरस से प्रारंभ होता है। इस दिन समुद्र मंथन के दौरान धन्वंतरि देव अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे और माता लक्ष्मी सोने का गढ़ा लेकर प्रकट हुई थी। अत: इस दिन दोनों की पूजा का महत्व है। धनतेरस के दिन यमराज के निमित्त जहां दीपदान किया जाता है। इस दिन खासकर सोना, चांदी बर्तन और खड़ा धनिया खरीदने की परंपरा है। आओ जानते हैं कि ऐसा क्यों करते हैं।


1. सोना : इस दिन सोने के आभूषण खरीदने की परंपरा भी है। सोना भी लक्ष्मी और बृस्पति का प्रतीक है इसलिए सोना खरीदने की परंपरा है।

2. चांदी : इस दिन चांदी खरीदना चाहिए क्योंकि चांदी कुबेर देव की धातु है। इस दिन चांदी खरीदने से घर में यश, कीर्ति, ऐश्वर्य और संपदा में वृद्धि होती है। चांद्र चंद्र की धातु है जो जीवन में शीतलता और शांति को स्थापित करती है।
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3. पीतल का बर्तन : इस दिन पीतल का बर्तन खरीदना चाहिए क्योंकि पीतल भगवान धन्वंतरी की धातु है। पीतल खरीदने से घर में आरोग्य, सौभाग्य और स्वास्थ्य की दृष्टि से शुभता आती है। पीतल गुरु की धातु है। यह बहुत ही शुभ है। बृहस्पति ग्रह की शांति करनी हो तो पीतल का इस्तेमाल किया जाता है।
4. धनिया (खड़ा धनिया): खरीदना बहुत ही शुभ होता है। इस दिन जहां ग्रामीण क्षेत्रों में धनिए के नए बीज खरीदते हैं वहीं शहरी क्षेत्र में पूजा के लिए साबुत धनिया खरीदते हैं। धनिया भी बृहस्पति ग्रह का कारक है। इस दिन सूखे धनिया के बीज को पीसकर गुड़ के साथ मिलकर एक मिश्रण बनाकर 'नैवेद्य' तैयार करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से धन का नुकसान नहीं होता है। धनिया को संपन्नता का प्रतीक माना जाता है। इसलिए धनतेरस को थोड़ी सी धनिया जरूर खरीदें। किवदंति अनुसार ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी को धनिया अर्पित करने और भगवान धनवंतरि के चरणों में धनिया चढ़ाने के बाद उनसे प्रार्थना करने से मेहनत का फल मिलता है और व्यक्ति तरक्की करता है। पूजा के बाद आप धनिया का प्रसाद बनता है जिसे सब लोगों के बीच वितरित किया जाता है।



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