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Written By ND

बिजनेस मैनेजमेंट

विकल्पों का वटवृक्ष है प्रबंधन

बिजनेस मैनेजमेंट
- मधुनानेरिय

ND
यदि हम आज विश्व व्यापार की ओर दृष्टि डालते हैं तो पाते हैं कि व्यापार करने के तौर-तरीकों में व्यापक परिवर्तन आ गया है। दुनियाभर के प्रबंधकों जिन्हें कि आमतौर पर मैनेजर कहा जाता है, उनकी मानसिकता में इतना बदलाव आया है कि वे यह सोचने लगे हैं कि केवल संसाधनों की खपत से ही काम नहीं चलने वाला है, क्योंकि संसाधन न केवल सीमित हैं बल्कि वे दिन-पर-दिन सिकुड़ते भी जा रहे हैं।

इस बुनियादी आकलन के साथ हमें इन सीमित साधनों को उनकी पूर्ण क्षमता के साथ इस तरह से प्रबंधित करने की आवश्यकता है कि हमें अपना लक्ष्य प्राप्त हो सके। इसी लक्ष्य की तलाश करते हुए प्रबंधन का क्षेत्र अस्तित्व में आ गया।

आज ज्यादा से ज्यादा कंपनियाँ देसी चोला उतारकर अंतरराष्ट्रीय ठप्पा लगाकर अपना व्यवसाय करने लगी हैं। इसी के साथ वैश्वीकरण के दौर की शुरुआत भी हुई है। ये विश्वव्यापी कंपनियाँ उन अनछुए बाजारों की खोज में संलग्न हैं, जहाँ तक कोई नहीं पहुँच पाया है। साथ ही वे अपने व्यापार को अंजाम देने के लिए ऐसे-ऐसे विचार उपयोग में ला रही हैं जिन्हें पहले कभी सोचा तक नहीं गया।

इसलिए व्यापार जगत में ऐसे लोगों ने अपने सिर सफलता का सेहरा बाँधा है जिनका दिमाग किसी भी तरह के व्यापारिक मौसम तथा परिस्थितियों को आसानी से शिरोधार्य कर व्यापार को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सके। उनके पास जो आवश्यक कौशल हो, वह न केवल व्यापार के चालक के रूप में उनसे कार्य करवा सके बल्कि वह समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वाह भी उतने ही कौशल से कर सके। इस परिप्रेक्ष्य में हमारे समाज में ऐसे तथाकथित एमबीएज हैं, जो सर्वश्रेष्ठ बिजनेस स्कूल में प्राप्त ज्ञान की बदौलत उपर्युक्त खाँचे में एकदम फिट बैठते हैं।
  यदि हम आज विश्व व्यापार की ओर दृष्टि डालते हैं तो पाते हैं कि व्यापार करने के तौर-तरीकों में व्यापक परिवर्तन आ गया है। दुनियाभर के प्रबंधकों जिन्हें कि आमतौर पर मैनेजर कहा जाता है, उनकी मानसिकता में इतना बदलाव आया है कि वे यह सोचने लगे हैं।      


ऐसे दायित्वपूर्ण प्रोफेशनल्स की दुनियाभर में भारी माँग है जिसने एमबीएज की माँग तथा आपूर्ति के संपूर्ण चक्र को गति प्रदान की हुई है। हमारे यहाँ कुछ ऐसे निराशावादी लोग भी हैं, जो यह राग अलापते फिरते हैं कि एमबीए का गुब्बारा जल्दी ही फुस्स हो जाएगा। लेकिन जब तक व्यापार जगत का अस्तित्व है और सर्वाधिक प्रभावी तरीके से व्यवसाय चलाने वाले प्रवीण लोगों की आवश्यकता है, अच्छे बिजनेस स्कूल से निकले मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की माँग भी बरकरार रहने वाली है।

नया प्रबंधन इतना व्यापक क्षेत्र है कि वस्तुतः इसमें हम किसी भी क्षेत्र को शामिल कर सकते हैं तथा एक नए करियर विकल्प को इन क्षेत्रों से तलाशा जा सकता है। गत कुछ वर्षों में हमने देखा है कि प्रबंधन के क्षेत्र में एक से बढ़कर एक नए और संभावनायुक्त क्षेत्र उभरकर सामने आए हैं। इनमें डेयरी मैनेजमेंट, हॉस्पिटल मैनेजमेंट, एविएशन मैनेजमेंट, वेस्ट मैनेजमेंट, एग्री-बिजनेस मैनेजमेंट शामिल हैं, साथ ही रोजाना प्रबंधन का एक नया क्षेत्र इसमें आकर जुड़ रहा है। इसका सीधा-सा अर्थ यही है कि आज का युवा सपने ही नहीं देख सकता है बल्कि वास्तव में उन्हें साकार होता भी देख सकता है।

अब उसे केवल मार्केटिंग, फायनेंस, मानव संसाधन, ऑपरेशंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, एडवरटाइजिंग जैसे परंपरागत क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहना पड़ेगा। वह अब गैर परंपरागत क्षेत्रों की तरफ भी रुख कर सकता है। यह मानना पड़ेगा कि अभी भी हमारे यहाँ प्रबंधन के परंपरागत क्षेत्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्हें सारे देशों तथा कॉर्पोरेशंस में सहज तथा व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है। लेकिन आज कई कॉलेजों से ऐसी स्वस्थ प्रवृत्तियाँ विकसित हो रही हैं जिनमें उद्योग जगत की इस विशिष्ट माँग के अनुरूप अनूठे पाठ्यक्रमों को आरंभ कर उन्हें करियर निर्माण की एक नई दुनिया से रूबरू कराने के प्रयास जारी हैं।

स्त्रोत : नईदुनिया अवसर

एक नजर उन सर्वाधिक लोकप्रिय विकल्पों की ओर जिन्हें मैनेजमेंट के अभिलाषियों द्वारा सारी दुनिया में आज अपनाया जा रहा है-

मार्केटिंग : संभवतया प्रबंधन के क्षेत्र का यह सबसे सदाबहार क्षेत्र है जिसके साथ रुमानियत की भावनाएँ जुड़ी हुई हैं। इस दावे को कौन झुठला सकता है कि वह रेमंड कोक के जादू से अभिभूत नहीं है जिसने कि आज घर-घर में पहचाने जाने वाले ब्रांड मॅकडोनाल्ड को बनाया था या कोक और पेप्सी की जंग भला कौन भूल सकता है। इन दिनों चहेते पात्रों शाहरुख खान, रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण के साथ रचे गए कोका कोला के विज्ञापन और उसकी स्प्रिट द्वारा बनाई गई पैरोडी के रस से दर्शक भीगे हुए हैं।

ये सब मार्केटिंग की ही महिमा है। आज किसी भी संस्थान के व्यापारिक उत्थान के लिए मार्केटिंग आधारभूत गतिविधि है। जैसा कि मैनेजमेंट के पितामह पीटर एफ. ड्रकर ने कहा है कि किसी भी संगठन के केवल दो मुख्य कार्य होते हैं- एक है मार्केटिंग और दूसरा है नवाचार। शेष सारे कार्य सहायक कार्य हैं। जिन लोगों में वाक्‌पटुता है और जो मस्तमौला प्रकृति के मालिक हैं तथा जिनमें विक्रय के प्रति स्नेह है और सड़कों पर लंबे समय तक विचरण करने की इच्छा है, वे मार्केटिंग प्रोफेशनल बनने के सच्चे अधिकारी साबित हो सकते हैं। विक्रय तथा वितरण, विज्ञापन, ब्रांड मैनेजमेंट, प्रॉडक्ट मैनेजमेंट आदि में करियर निर्माण के बेहतरीन विकल्प उनकी बाट जोह रहे हैं।

फायनेंस : अधिकांश संगठनों के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य है वित्तीय व्यवस्थाएँ जुटाना तथा उनका उचित प्रबंधन करना। वित्त ही ऐसा क्षेत्र है, जो संगठन के जीवन-रक्त को नियंत्रित करता है यानी कि किसी भी व्यवसाय का ब्लड प्रेशर उसकी वित्तीय स्थिति के अनुरूप चढ़ता या उतरता है। ऐसे कई बैकरूम बाईज तथा कंचर्स हैं, जो संगठन के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार होते हैं।

हालिया समय में स्टॉक मार्केट के बतौर शक्तिशाली रूप से उभरने अथवा क्रिकेट के बाद सबसे ज्यादा बुखार फैलाने वाली गतिविधि बनने से इक्विटी, डेरिवेटिव्ज, ट्रेडिंग पोर्टफोलियो मैनेजमेंट, रिस्क एनालिसिस परंपरागत एमबीए फायनेंस के सिर चढ़कर बोल रहे हैं तथा ग्लोरिफाइड बुक कीपर का दर्जा प्राप्त कर पैसा बना रहे हैं। कंज्यूमर बैंक्स, म्यूच्युअल फंड्स तथा प्राइवेट इक्विटी कंपनियाँ, मर्चेंट बैंक्स, इन्वेस्टमेंट एजेंसीज, क्रेडिट रेटिंग एजेंसीज तथा असेट मैनेजमेंट सभी में फायनेंस में डिग्री लेने के बाद शानदार करियर की गारंटी खुद-ब-खुद मिल जाती है।

इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी : यह अपेक्षाकृत नया स्पेशलाइजेशन है। यह छात्रों को प्रबंधन की कला के साथ सूचना प्रौद्योगिकी के विज्ञान को सम्मिलित करने का मौका प्रदान करता है। किसी भी विषय के छात्र इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए स्वतंत्र हैं तथा इसे करने के बाद नेटवर्क मैनेजमेंट, सॉफ्टवेयर मैनेजमेंट, ई-कॉमर्स, सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर्स अथवा बिजनेस डेवलपमेंट के क्षेत्र तक में भी करियर बनाया जा सकता है।

ऑपरेशंस : यह ऐसा क्षेत्र है, जो मुख्यतः इंजीनियर्स के लिए ही सुरक्षित है। यह विशेष क्षेत्र उन लोगों को आकर्षित करता है जिनकी औद्योगिक पृष्ठभूमि मजबूत हो तथा जिनमें सिस्टम्स तथा प्रोसेस के प्रति प्रेम हो। इसे करने के बाद सप्लाय चैन मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स, प्रोडक्शन प्लानिंग एवं कंट्रोल, ऑपरेशंस रिसर्च, इन्वेंटरी मैनेजमेंट, क्वालिटी मैनेजमेंट आदि के क्षेत्र में करियर तलाशा जा सकता है।

इस क्षेत्र की एक खासियत यह है कि यदि अच्छा करें तो उनके निष्पादन की प्रशंसा की जाती है, लेकिन यदि ऑपरेशंस में जरा भी चूक हो जाए तो दिनभर में हजारों गालियाँ सुनते-सुनते कान भी पक जाते हैं। ये लोग लागत घटाने तथा प्रक्रिया की दक्षता उच्चतम स्तर तक बनाने के लिए अथक परिश्रम करते रहते हैं इसलिए पैसा भी अच्छा पाते हैं।

एडवरटाइजिंग : इसे मार्केटिंग का ही एक हिस्सा माना जाता है। यह क्षेत्र उन लोगों को आकर्षित करता है जिनमें सृजनशीलता के प्रति लगन तथा आगे बढ़ने की भावना हो। जिनकी फाइन आर्ट्‌स, विजुल आर्ट्‌स के साथ अँगरेजी तथा हिन्दी कॉपी राइटिंग में अच्छी पकड़ हो, उनके लिए करियर निर्माण के लिए एडवरटाइजिंग एक शानदार क्षेत्र है। जो सृजनात्मक गतिविधियों में दिलचस्पी नहीं रखते वे एडवरटाइजिंग के अन्य क्षेत्र यथा एकाउंट एक्जीक्यूटिव, क्लाइंट सर्विस एक्जीक्यूटिव, मीडिया प्लानर, क्रिएटिव, ले आउट आर्टिस्ट, कॉपी राइटर के रूप में करियर बना सकते हैं।

(लेखक पीटी एजुकेशन के नॉलेज रिर्सोस ग्रुप के वाइस प्रेसीडेंट है।)

स्त्रोत : नईदुनिया अवसर