हर रूमानी दौर के जादूगर रहे सचिन भौमिक : ऋषि कपूर

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12 अप्रैल 2011 को के प्रसिद्ध लेखक का निधन हो गया। उन्होंने के लिए कई यादगार और हिट फिल्में लिखी। आइए जानें कि क्या कहते हैं ऋषि :

सचिन भौमिक जी नहीं रहे, यह खबर मेरे लिए वाकई दिल तो़ड़ देने वाली खबर है। वक्त कितनी तेजी से गुजर जाता है। एक बेहतरीन इनसान के दूर हो जाने का एहसास उसके न होने के बाद ही हमें शिद्दत से महसूस होता है।

सचिन भौमिक जी से जब मैं पहली बार मिला तो मेरी उम्र ही क्या रही होगी, शायद 22-23 साल। जहरीला इनसान और जिंदादिल जैसी फिल्में वे मेरे लिए लिख चुके थे, लेकिन 1975 में रिलीज हुई फिल्म "खेल खेल में" से सारा नजारा ही बदल गया।
मुझे इस बात को मानने में कोई दिक्कत नहीं है बल्कि मैं यह दिल खोलकर ऐलानिया तौर पर कह सकता हूँ कि मेरा करियर बनाने में सचिन भौमिक का बहुत ब़ड़ा योगदान रहा है। ब़ड़े अच्छे मिजाज के थे सचिन भौमिक।

मेरी और उनकी उम्र का फासला बहुत ब़ड़ा था, लेकिन कभी उन्होंने इसे मुझे महसूस नहीं होने दिया। एक अभिनेता और एक लेखक के बीच का रिश्ता क्या होता है, मैंने उन्हीं दिनों जाना।
और मैं ही क्या, मेरा तो मानना है कि हिंदी सिनेमा में जब भी रूमानी फिल्मों का दौर आया, सचिन भौमिक की कलम से वह जादू निकला, जिसने शम्मी कपूर से लेकर जॉय मुखर्जी, शशि कपूर तक के लिए एक से एक बेहतरीन कहानियाँ लिखीं।

सचिन भौमिक रचित यादगार फिल्में
कृष (2006), कोई मिल गया (2003), ताल (1999), मैं खिला़ड़ी तू अना़ड़ी (1994), सौदागर (1991), कर्मा (1986), हम किसी से कम नहीं (1977), आन मिलो सजना (1971) आराधना (1969), ब्रह्मचारी (1968), एन इवनिंग इन पेरिस (1967), लव इन टोकयो (1966), आई मिलन की बेला (1964)

(पंकज शुक्ल की ऋषि कपूर से हुई बातचीत पर आधारित)


 

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