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सत्यनारायण व्रतकथा
सत्यनारायण की कथा क्यों की जाती है, जानिए व्रत पूजा, महत्व और मंत्र
Friday,May 28, 2021
चतुर्थोऽध्यायः (संस्कृत में)
तृतीयोऽध्यायः (संस्कृत में)
श्री सत्यनारायण का पूजन स्वयं करें
श्री सत्यनारायण पूजन प्रारंभ
पूजन सामग्री
Saturday, May 19, 2012
द्वितीयोऽध्यायः (संस्कृत में)
Saturday, May 19, 2012
श्री सत्यनारायणजी की आरती
Saturday, May 19, 2012
पंचम अध्याय
Saturday, May 19, 2012
चतुर्थ अध्याय
Saturday, May 19, 2012
तृतीय अध्याय
Saturday, May 19, 2012
प्रथमोऽध्यायः (संस्कृत में)
Saturday, May 19, 2012
द्वितीय अध्याय
Saturday, May 19, 2012
प्रथम अध्याय
Saturday, May 19, 2012
श्री सत्यनारायण की व्रत कथा
Saturday, May 19, 2012
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गुप्त नवरात्रि में ये मंत्र जप लिया तो तुरंत ही दूर होंगे संकट और माता का मिलेगा आशीर्वाद
Gupt Navratri Mantra: गुप्त नवरात्रि का समय तंत्र-मंत्र, साधना और सोई हुई आध्यात्मिक शक्तियों को जगाने के लिए सबसे अचूक माना जाता है। सामान्य नवरात्रि के मुकाबले गुप्त नवरात्रि में की गई साधना अधिक तीव्र फल देती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंत्रों का प्रभाव श्रद्धा, नियम और शुद्ध आचरण के साथ किए गए जप पर आधारित माना जाता है।
गुंडिचा मंदिर क्यों है जगन्नाथ रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव? जानिए 5 खास बातें
Gundicha Temple: भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और केंद्रीय पड़ाव गुंडिचा मंदिर ही है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पुरी में श्री जगन्नाथ प्रभु की रथयात्रा निकाली जाती है। यह रथ मुख्य मंदिर से निकलकर 3 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर जाता है और वहीं 9 दिनों तक रहने के बाद देवशयनी एकादशी के दिन लौट आता है। धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह पड़ाव क्यों इतना खास है, आइए इसकी 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें समझते हैं।
भगवान जगन्नाथ की मौसी कौन हैं? जानिए रथयात्रा से जुड़ी यह रोचक परंपरा
16 से 26 जुलाई तक जगन्नाथ रथयात्रा का उत्सव रहेगा। पौराणिक मान्यताओं और जगन्नाथ संस्कृति के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मौसी देवी अर्धसिनी हैं, जिन्हें श्रद्धा से 'मौसी मां' कहा जाता है। भगवान जगन्नाथ की मौसी और उनसे जुड़ी परंपराओं के बारे में कुछ बेहद खास बातें।
गीता के छठे अध्याय के 10वें श्लोक की सही व्याख्या क्या है? मौलाना जरजिस अंसारी के दावे की पड़ताल
उत्तर प्रदेश के मौलाना जरजिस अंसारी ने एक विवादित बयान देते हुए भगवान श्रीकृष्ण को मुस्लिम बताता है। उन्होंने दावा किया कि श्रीकृष्ण 5 वक्त की नमाज पढ़ते थे। इस दौरान मौलाना जरजिस अंसारी ने अपनी तकरीर के दौरान श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 6 के श्लोक 10 का 'गलत अर्थ' निकालकर अपनी बात को साबित करने की कोशिश भी की।
पुरी के जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास: कब, कैसे और क्यों हुई शुरुआत?
पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर और रथयात्रा का इतिहास जितना गौरवशाली है, उतना ही रहस्यों और संघर्षों से भरा है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता और अटूट आस्था की जीती-जागती कहानी है। हजारों वर्षों से यह रथयात्रा जारी है। आइए इसके प्रारंभ से लेकर इतिहास की मुख्य घटनाओं को संक्षिप्त में जानते हैं।
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21 July Happy Birthday: जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ आपका स्वागत है वेबदुनिया की विशेष प्रस्तुति में। यह कॉलम नियमित रूप से उन पाठकों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में जानकारी देगा जिनका उस दिनांक को जन्मदिन होगा। पेश है दिनांक 21 को जन्मे व्यक्तियों के बारे में जानकारी...
Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 21 जुलाई 2026: मंगलवार का पंचांग और शुभ समय
Today Shubh Muhurat 21 July 2026: क्या आप आज कोई नया काम शुरू करने की सोच रहे हैं? या कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले हैं? ज्योतिष और पंचांग के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को सही मुहूर्त में करने से सफलता की संभावना बढ़ जाती है। 'वेबदुनिया' आपके लिए लेकर आया है 21 जुलाई, 2026 का विशेष पंचांग...
27 जुलाई से शनि होंगे वक्री: 11 दिसंबर तक इन 5 राशियों पर बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जानें आपकी राशि शामिल है या नहीं
ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को न्याय, कर्म और अनुशासन का देवता माना जाता है। जब भी शनिदेव अपनी चाल बदलते हैं, तो उसका असर मानव जीवन और संपूर्ण सृष्टि पर व्यापक रूप से पड़ता है। 27 जुलाई 2026 की रात से शनिदेव मीन राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलने जा रहे हैं और वे 11 दिसंबर 2026 की सुबह तक इसी अवस्था में रहेंगे।
Ashadhi Ekadashi Date 2026: आषाढ़ी एकादशी पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
Ashadhi Ekadashi Puja Vidhi n Muhurat 2026: इस दिन श्रद्धा, भक्ति और विधि-विधान से पूजा करने, व्रत रखने, जप-तप और दान करने से जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है। इसलिए इस पावन एकादशी पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना कर उनका आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।
देवशयनी एकादशी 2026: कब है शुभ मुहूर्त? जानें चातुर्मास की शुरुआत और भगवान विष्णु को शयन कराने की सही विधि
सनातन परंपरा में एकादशी तिथि का स्थान सबसे पावन माना गया है। हर महीने के दोनों पक्षों (शुक्ल और कृष्ण) में आने वाली यह ग्यारहवीं तिथि साक्षात जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है।
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