Candidate Name |
राजेंद्र सिंह गुढ़ा |
State |
राजस्थान |
Party |
shiv sena |
Constituency |
उदयपुरवटी |
Candidate Current Position |
MLA |
Rajendra Singh Gudha profile in hindi : राजेंद्र गुढ़ा राजस्थान के झुंझनू जिले की उदयपुरवाटी विधानसभा सीट से विधायक हैं। लाल डायरी से चर्चित हुए बर्खास्त मंत्री राजेंद्र गुढ़ा कभी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेहद करीबी माने जाते थे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार में पर्यटन राज्यमंत्री बनाया गया था। वे अब एक-दूसरे के लिए विरोधी बन गए हैं। इस बार उन्होंने शिवसेना से उदयपुरवाटी से नामांकन दाखिल किया है। इस बार यहां त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। भाजपा से शुभकरण चौधरी और कांग्रेस से भगवाना राम सैनी मैदान में हैं।
जन्म और शिक्षा : राजेंद्र गुढ़ा का जन्म 19 जुलाई 1968 को राजस्थान के पीलीबंगा, हनुमानगढ़ में हुआ। इनके पिता का नाम माधोसिंह है। इनके परिवार में इनके 12 भाई हैं। इन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। राजेंद्र गुढ़ा के भाई रणवीर सिंह भी पहले राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे। 2003 में लोकजनशक्ति पार्टी से विधायक बने।
राजनीतिक करियर : राजेंद्र सिंह गुढ़ा एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसका राजनीति से घनिष्ठ संबंध है। गुढ़ा ने पहली बार 2008 में विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन इससे पहले उनके भाई रणवीर ने इसका प्रतिनिधित्व किया था।
रणवीर ने जब 2003 में लोजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी उस समय राजेंद्र ने अपने भाई रणवीर के साथ चुनाव प्रचार किया था। रणवीर सिंह गुढ़ा पहले राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रसंघ के अध्यक्ष भी थे।
बसपा के टिकट पर गुढ़ा ने 2008 में कांग्रेस के विजेंद्र सिंह और भाजपा के मदनलाल सैनी के खिलाफ चुनाव लड़ा। इसमें उन्होंने करीब 8 हजार वोटों से जीत हासिल की।
फिर थामा कांग्रेस का हाथ : 2008 में बसपा से चुनाव जीतने के बाद गुढ़ा ने बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया। इसके बाद 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने गुढ़ा को उनकी सीट उदयपुरवाटी से चुनावी मैदान में उतार दिया, लेकिन उस वक्त गुढ़ा चुनाव हार गए। इस कारण 2018 में कांग्रेस ने उनका टिकट काट दिया।
बसपा ने इस बार गुढ़ा को उदयपुरवाटी सीट से टिकट दिया। इस बार इनका मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार शुभकरण चौधरी और कांग्रेस के भगवान राम सैनी से था। इस त्रिकोणीय चुनाव में गुढ़ा ने जीत हासिल की।
पायलट के करीब : चुनाव जीतने के बाद मंत्री पद के लिए गुढ़ा ने बसपा से फिर दगा किया और एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। गहलोत सरकार ने इन्हें राज्यमंत्री बना दिया। लेकिन गहलोत-पायलट विवाद में उन्होंने जमकर पायलट गुट का साथ दिया। इसके कारण वे गहलोत के विरोधी बनते चले गए। लाल डायरी के कारण इन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया।