| Candidate Name |
ममता बनर्जी |
| State |
पश्चिम बंगाल |
| Party |
TMC |
| Constituency |
भवानीपुर |
| Candidate Current Position |
West Bengal CM |
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं। भवानीपुर लंबे समय से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ रहा है। लेकिन इस बार भाजपा के नेता शुभेंदु अधिकारी ने यहां से चुनौती पेश कर मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना दिया है। नंदीग्राम में पहले हुए चुनावी टकराव के बाद यह सीट अब दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 ममता बनर्जी के लिए पिछली बार से भी ज्यादा मुश्किल साबित होने जा रहा है। SIR, चुनाव आयोग के प्रशासनिक तबादले, और मालदा हिंसा जैसे मामलों ने उनकी चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
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ममता का गढ़ रही है भवानीपुर सीट
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2011 का चुनाव राज्य की राजनीति का टर्निंग पॉइंट था
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तब टीएमसी ने 34 साल बाद लेफ्ट को हटाकर सत्ता हासिल की थी
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ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से ही चुनाव जीती थी
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2016 का चुनाव भी ममता बनर्जी इसी सीट से जीती
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2021 में ममता बनर्जी भवानीपुर छोड़कर नंदीग्राम गई और वहां चुनाव हार गईं
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फिर उपचुनाव में भवानीपुर से ही जीत दर्ज की
ममता बनर्जी, जो ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की माननीय मुख्यमंत्री हैं, जबकि उनकी मां ने परिवार के उतार-चढ़ाव के दौरान हमेशा सहयोग किया और उनमें निष्पक्षता, मानवता के प्रति गहरी संवेदना तथा कमजोर वर्गों के लिए खड़े होने का साहस विकसित किया। यही मूल्य उनके जीवन की प्रेरक शक्ति बने, जिन्होंने उन्हें कठिन चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रेरित किया।
जन्म और शिक्षा
ममता बनर्जी का जन्म कोलकाता में हुआ। वे स्वर्गीय प्रमिलेश्वर बनर्जी और श्रीमती गायत्री बनर्जी की पुत्री हैं।
उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी थे। ममता बनर्जी ने कला (BA), शिक्षा (B.Ed), कानून (LLB) में स्नातक तथा कला (MA) में परास्नातक की डिग्रियां प्राप्त की हैं।
राजनीतिक करियर
छात्र जीवन के दौरान उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज में पढ़ाई करते हुए पश्चिम बंगाल छात्र परिषद में शामिल होकर 1977 से 1983 तक इसकी कार्य समिति की सदस्य के रूप में काम किया। उन्होंने 1979-80 के दौरान पश्चिम बंगाल कांग्रेस (इंदिरा) की महासचिव के रूप में कार्य किया और पश्चिम बंगाल प्रांतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस की सचिव रहीं। 1983 से 1988 तक वे इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महिला प्रकोष्ठ की सचिव रहीं और 1980-85 के दौरान दक्षिण कोलकाता जिला कांग्रेस (इंदिरा) की सचिव भी रहीं।
1984 में वे जादवपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुनी गईं। इसके बाद वे यूथ कांग्रेस (इंदिरा) की महासचिव बनीं और 1987 में राष्ट्रीय परिषद की सदस्य तथा 1988 में कांग्रेस संसदीय दल की कार्यकारिणी समिति की सदस्य बनीं।
वे 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 और 2009 में दक्षिण कोलकाता लोकसभा क्षेत्र से दोबारा सांसद चुनी गईं, जिससे वे भारत की सबसे अनुभवी सांसदों में शामिल हो गईं।