-
पुस्तक मेले से बुलावा नहीं आना
देश की राजधानी में विश्व स्तर के पुस्तक मेले का आयोजन एक बार पुनः मेरी उपस्थिति के बिना आरम्भ हो गया। इस प्रकार के ... -
आओ रियलिटी शो बनाएं
टी.वी. पर प्रस्तुत होने वाले इन रियलीटी शो में एक बात समान है कि यह सबके सब अनरियल लगते हैं। -
बकरी, राष्ट्रद्रोह और मैं !
सुप्रसिद्ध फिल्म शोले में जब यह संवाद सुना था कि 'गब्बर सिंग कोई बकरी का बच्चा नहीं जो दौड़े और पकड़ लिया', -
एक ‘फैन’ की दुर्दशा
बाल्यकाल में सिनेमा देखने जाना हमारे एक बेहद लुभावना आयोजन होता था। ड्रेस सर्कल में ठोस लकड़ी की (खटमल युक्त) बेंचों पर ... -
जानवरों की आपात बैठक
हाल ही में शहर के टाउन हॉल के नजदीक पड़े खली मैदान में देश में व्याप्त घटनाओं पर जानवरों की एक आपात बैठक का ताबड़तोड़ ... -
एक लाईक का सवाल है
आपने अकादमिक स्तर की कोई भी उपलब्धि हासिल की हो, चाहे आप पी.एच.डी कर स्वयं के नाम के आगे डॉ. लिखते हों या आपको समाज में ... -
कोसने भर से क्या होगा?
हमारे देश में हमने सारे क्षेत्रों में असीमित तरक्की की है। किंतु अपराध हो जाने के बाद पुलिस को कोसने का जहां तक प्रश्न ... -
अस्पताल भ्रमण का रोमांच...
जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को यह सुअवसर(?) अवश्य प्राप्त हुआ होगा, जब वो या तो किसी परिचित मरीज का कुशल क्षेम पूछने ... -
ज्योतिषी और मैं...
प्रातः समाचार पत्र हाथ में था। ज्योतिषियों के अनुसार आज मेरा अनिष्ट होना तय था। तभी परम मित्र मालवी जी द्वार पर अनचाहे ... -
ओ मानस के राजहंस…
'भेज रहे हैं स्नेह निमंत्रण प्रियवर तुम्हे बुलाने को, ओ मानस के राजहंस तुम भूल न जाना आने को'। इन स्नेह युक्त गुलकंद ... -
गाय और शिक्षक की तुलना...
यदि यह शर्त होती, कि लिखे अनुसार गाय को न सिर्फ माता मानना होगा वरन निबंध लिखने वाले विधार्थी को गाय को घास का गट्ठर भी ... -
जय माता दी.....
अभी हाल ही में मुझे माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजरी लगाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। धार्मिक स्थलों पर जाते समय एक ... -
डेंगू की जांच में कंफ्यूजन...
शहर की फिजा एकदम बदली-बदली सी है। लोगों की शक्लें देखकर बीहड़-सा एहसास हो रहा है। जिसे देखो वो तुच्छ से मच्छर से ... -
सरकारी दफ्तरों में योग की शाश्वत क्रियाएं
सरकारी विभागों के कर्मचारी योग क्रियाओं में दक्ष होते हैं। दफ्तर में यदि किसी काम से आपका जाना हो तो आप पाएंगे कि ... -
विमोचन समारोह
अभी मैं टाउन हॉल से एक पुस्तक विमोचन समारोह में हुई स्नेह बारिश से तरबतर लौटा हूं। पास की सीट पर स्थित रचनाकार नुमा ... -
करण-अर्जुन बनाम अच्छे दिन
" मेरे करण-अर्जुन आएंगे" बॉलीवुड की सुपर-डूपर फिल्म में यह एक सुप्रसिद्ध संवाद था। अभिनेत्री द्वारा तमाम भाव ... -
अमिताभ आखिर अमिताभ क्यों हैं?
अमिताभ होना और उसे इतने वर्षों तक सतत निभाना एक अद्भुत घटना है तथा सिनेप्रेमियों ने इतने वर्षों तक विविध रूपों तथा ... -
मोबाइल का यूं बंद होना...
असीम फुर्सत वाले समय की फसल को काटने में जो औजार सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वो है अपना टच वाला मोबाइल। व्हॉट्स ऐप, फेसबुक ... -
उच्च कोटि की गोष्ठी का निमंत्रण
आजकल शहर में गोष्ठियों का चलन है। शहर के हर छोटे-बड़े साहित्यिक भवन से गोष्ठियों की महक निकल रही है और साहित्यकार ... -
जवां बने रहने के प्रपंच
मन के भीतर से आवाज़ आई कि आज क्रिकेट जैसे अति लोकप्रिय खेल में युवराज जैसे नाम और उम्र वाले खिलाड़ी प्रौढ़ कहलाने लगे हैं, ...
