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महाभारत का वो शि‍क्षक...

सोमवार,सितम्बर 7, 2009
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शिक्षक और शिष्य

शनिवार,सितम्बर 5, 2009
वैसे तो हमारे जीवन में कई जाने-अनजाने शिक्षक होते हैं जिनमें हमारे माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है। लेकिन असल में शिक्षालय के शिक्षक का संबंध शिष्य से होता है। शिक्षालयों में शिक्षक-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता रहा है, लेकिन वर्तमान में शिक्षकों के ...
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जिस देश में प्राथमिक शिक्षा का ढाँचा लगभग ध्वस्त हो चुका हो, बाल मजदूरों की तादाद रोजाना बढ़ रही हो,वहाँ ‘बाल साहित्य’ पर चिंताएँ कुछ आगे की बात लगती हैं। लेकिन चिंता इसलिए भी जरूरी है कि नई पीढ़ी के सामने जो भले साधन सम्पन्न हो- संस्कार का, नैतिक ...
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एक देश, जहाँ गुरु पूजने की सदियों पुरान‍ी यशस्वी परंपरा रही हो। एक देश, जहाँ कवि इस असंमजस में रहें कि गुरु-गोविन्द दोनों सामने खड़े हैं, मैं किसके पैर लगूँ, गुरु की महिमा गोविन्द के सामने इसलिए बड़ी है क्योंकि गुरु ने ही तो गोविन्द तक पहुँचने का ...
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पत्रकारिता सीखी या सिखाई नहीं जाती' इस एक वाक्य को सुनते हुए ही मैंने पत्रकारिता सीखी भी और सिखाई भी। पत्रकारिता के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद एक सहज जिज्ञासा थी कि आखिर यहाँ क्या और कैसे पढ़ाया जाएगा। इससे पहले कभी सुना नहीं था कि इस ...
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टीचर्स डे हम सभी मनाते आए है। आपने भी मनाया है। हमने भी मनाया है। लेकिन इस दिन को मनाना तभी सही मायने में सार्थक सिद्ध होगा जब आप अपने टीचर के प्रति सही नजरिया रखें। पिछले कुछ ही समय में ऐसी कई घटनाएँ देश और दुनिया में घटी है जो आपके व्यवहार, ...
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शिक्षकों का 'पाद पूजन' कार्यक्रम

शुक्रवार,सितम्बर 4, 2009
शिक्षक दिवस आते ही विद्यार्थियों के मन में फिर श्रद्धा का अंबार उमड़ आने लगता है। ऐसे में इस दिन स्कूल-कॉलेज के कई विद्यार्थी अपने शिक्षक को गिफ्ट्‍स, फूल, पेन आदि अपने चीजें भेंट स्वरूप देते हैं। लेकिन उनमें सबमें अलग हैं शासन द्वारा जारी किया गया ...
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गुरु की महिमा

शुक्रवार,सितम्बर 4, 2009
गुरु की महिमा न्यारी है, अज्ञानता को दूर करके। ज्ञान की ज्योत जलाई है, गुरु की महिमा न्यारी है।।
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गुरुओं का सहस्र नमन!!

गुरुवार,सितम्बर 3, 2009
है आज बहुत हर्षि‍त मन मेरा, शि‍क्षक दि‍वस है पर्व सुनहरा। इस पुलकि‍त पावन अवसर पर, वंदन करता है मन मेरा।।
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आप आज शिक्षक दिवस मना रहे हैं। दिवसों की भीड़ में एक और दिवस! कहने को मैं आपकी शिक्षिका हूँ, किंतु सच तो यह है कि जाने-अनजाने न जाने कितनी बार मैंने आपसे शिक्षा ग्रहण की है। कभी किसी के तेजस्वी आत्मविश्वास ने मुझे चमत्कृत कर‍ दिया तो कभी किसी ...
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जीवन का पाठ सिखाने वाले गुरु

बुधवार,सितम्बर 2, 2009
इस दुनिया में नौकरी, पद, पैसा ही सबकुछ नहीं है। आज जो काम करने का वह हमसे कह रहा था। हम उसका कहना मान लेते तो इससे घृणित कार्य तो हमारे जीवन का कुछ होता ही नहीं। और इसके लिए हमारी आत्मा हमें मंजूरी नहीं दे रही थी।
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