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क्या 2019 में वर्ल्ड कप जिता सकते हैं रवि शास्त्री?

Last Modified:?> Wednesday, 12 July 2017 (12:00 IST)
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बीते तीन दशक से भारतीय क्रिकेट के हर कामयाब लम्हे के दौरान ये नाम सुनाई दिया है। साल 1983 में भारत ने पहली बार वनडे विश्व कप जीता तो रवि शास्त्री ट्रॉफी थामे कप्तान कपिल देव के साथ लॉर्ड्स की बॉलकनी में मौजूद थे। वो भी विनिंग टीम का हिस्सा थे।
 
दो साल बाद सुनील गावस्कर की कप्तानी में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में बेसन एंड हेजेज़ वर्ल्ड चैंपियनशिप जीती तो रवि शास्त्री 'चैंपियन ऑफ द चैंपियन्स' के ख़िताब के हकदार बने और मेलबर्न के मैदान पर विजेता भारतीय टीम ने शास्त्री को तोहफे में मिली ऑडी कार में चक्कर लगाया।
 
साल 2007 में महेंद्र सिंह धोनी ने दक्षिण अफ्रीका में वर्ल्ड ट्वेंटी-20 ख़िताब जीता। फाइनल में जोगिंदर शर्मा की गेंद पर जब श्रीशांत ने मिस्बाह उल हक का कैच थामकर भारत की जीत पर मुहर लगाई तो रवि शास्त्री टीवी पर उस लम्हे को बयान कर रहे थे।

चार साल बाद साल 2011 वर्ल्ड कप के फ़ाइनल में जिस तरह धोनी का छक्का याद आता है, उसी तरह कमेंटेटर शास्त्री का ये कहना भी लोग याद रखते हैं, " धोनी फिनिशिइज़ ऑफ इन स्टाइल।"
 
लेकिन, क्या भारतीय क्रिकेट की कामयाबी के साथ शास्त्री का ये 'स्पेशल कनेक्शन' 2019 के वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया के काम आएगा?
 
सवाल के अहम होने की वजह ये है कि बीसीसीआई की क्रिकेट सलाहकार समिति ने उन्हें भारतीय टीम का हेड चुना है और बीसीसीआई ने उनका कार्यकाल साल 2019 के विश्व कप तक तय किया है। शास्त्री टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज़ वीरेंद्र सहवाग और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टॉम मूडी को रेस में पीछे छोड़कर हेड कोच बने हैं।
 
हेड कोच चुनने वाली सचिन तेंदुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण की हाईप्रोफाइल समिति के सामने शास्त्री एक बार पहले भी पेश हुए थे लेकिन तब वो अनिल कुंबले से रेस में पिछड़ गए। इसके बाद समिति के सदस्य और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और रवि शास्त्री के बीच कड़वाहट का दौर भी सामने आया।
 
हेड कोच के तौर पर कुंबले खासे कामयाब रहे और जब लगा कि उनका कार्यकाल अगले वर्ल्ड कप तक हो सकता है तभी कप्तान विराट कोहली और कुंबले के बीच विवाद सामने आया। नतीजा कुंबले की विदाई के तौर पर हुआ। शास्त्री के चयन में कोहली की पसंद की भूमिका अहम बताई जाती है। लेकिन ये इकलौती वजह नहीं है, जिसने उन्हें हेड कोच चुनने में मदद की है।
हर मोर्चे पर हिट
*शास्त्री एक कामयाब क्रिकेटर रहे हैं।
*उन्होंने 80 टेस्ट मैचों में 11 शतकों की मदद से 3830 रन बनाने के साथ 151 विकेट लिए हैं।
*वनडे में उन्होंने 150 मैचों में 4 शतक की मदद से 3108 रन बनाए हैं और 129 विकेट लिए हैं।
*शास्त्री बीसीसीआई के 'मैन ऑफ ऑल सीजन्स' कहलाते हैं।
*यानी मुश्किल वक्त में वो बोर्ड की मदद के लिए खड़े दिखते हैं।
*साल 2007 के वर्ल्ड कप में भारत के सीनियर खिलाड़ियों से विवाद के बाद कोच के तौर पर ग्रेग चैपल की छुट्टी हुई तो बोर्ड ने उन्हें टीम को संभालने की जिम्मेदारी दी।
*साल 2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही वो इस लीग में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।
*शास्त्री अगस्त 2014 से जून 2016 तक भारतीय टीम के निदेशक भी रह चुके हैं और तब उनका रिकॉर्ड उम्दा था।
*जब वो डायरेक्टर बने तो भारतीय टेस्ट टीम रैंकिंग में सातवें नंबर पर थी
*जब वो हटे तो भारतीय टीम दूसरे स्थान पर पहुंच चुकी थी।
*भारतीय टीम ने श्रीलंका में 22 साल बाद टेस्ट सिरीज़ जीती
*दक्षिण अफ्रीका को चार मैचों की सिरीज़ में 3-0 से मात दी
*टीम 2015 वनडे विश्वकप और 2016 वर्ल्ड टी-20 में सेमी फ़ाइनल तक पहुंची।
 
खूबी और चुनौती
*शास्त्री की कामयाबी की वजह उनकी खूबियां बताई जाती हैं।
*उन्हें क्रिकेट की बारीकियों की अच्छी समझ है।
*कप्तान विराट कोहली के साथ उनकी अच्छी साझेदारी है।
*वो मैन मैनेजमेंट स्किल के महारथी माने जाते हैं।
*लेकिन, रवि शास्त्री के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। उन्हें एक ऐसी टीम को दिशा दिखाने की जिम्मेदारी मिली है, जिसके समर्थक को खेल को जुनून की हद तक चाहते हैं। टीम की नाकामी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती।
*शास्त्री बेहद कामयाब कोच रहे कुंबले की जगह लेने जा रहे हैं। ऐसे में दोनों के बीच लगातार तुलना भी होगी।
*भारतीय टीम को आने वाले वक्त में कई विदेशी दौरे करने हैं, जहां घरेलू मैदानों के मुक़ाबले टीम को ज्यादा चुनौतियों का सामना करना होता है।
मजबूत टीम
*शास्त्री के लिए लिए अच्छा ये है कि बीसीसीआई ने कोचिंग टीम में उनके साथ दो दिग्गज खिलाड़ियों को भी जगह दी है।
*विदेश दौरों पर टेस्ट मैचों के लिए पूर्व कप्तान राहुल द्रविड़ को बैटिंग सलाहकार बनाया गया है।
*164 टेस्ट मैचों में 36 शतकों की मदद से राहुल द्रविड़ के नाम 13288 रन दर्ज़ हैं
विकेट पर टिके रहने की खूबी की वजह से ही द्रविड़ को दीवार उपनाम मिला था
 
*गेंदबाज़ी के मोर्चे पर पूर्व क्रिकेटर ज़हीर खान को सलाहकार बनाया गया है।
*स्विंग के सुल्तान कहे जाने वाले ज़हीर ने भी एक खिलाड़ी के तौर पर शानदार उपलब्धियां अपने नाम की थीं।
*ज़हीर ने 92 टेस्ट मैचों में 311 विकेट, 200 वनडे में 282 विकेट और 17 टी-20 मैचों में 17 विकेट हासिल किए हैं।
*गेंदबाज़ी और बल्लेबाज़ी के महारथियों का कोचिंग टीम में होना रवि शास्त्री पर से दबाव घटाएगा।
लेकिन, सबसे अहम होगी कामयाबी के लिए रवि शास्त्री में हमेशा दिखने वाली दृढ इच्छा शक्ति।
*जैसा कि एक बार भारत के पूर्व कप्तान कपिल देव ने कहा था, "रवि शास्त्री जैसा कोई खिलाड़ी जिसमें कोई प्रतिभा नहीं हो और वो *इतने लंबे समय तक क्रिकेट खेलता है, मैं समझता हूँ कि यही उसकी उपलब्धि है।"
*ये उपलब्धि रवि शास्त्री ने मजबूत इच्छा शक्ति के दम पर हासिल की और अब बीसीसीआई और उसकी क्रिकेट सलाहकार समिति ने शास्त्री की इसी खूबी पर दांव खेला है।
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