मुख पृष्ठ > सामयिक > विचार-मंथन > विचार-मंथन > आज भी बरकरार कामसूत्र का सम्मोहन
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजिएयह पेज प्रिंट करें
 
आज भी बरकरार कामसूत्र का सम्मोहन
अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'
क्या कारण है कि कामसूत्र या कामशास्त्र आज भी प्रासंगिक हैं, जबकि सेक्स संबंधी कई ग्रंथ लिखे गए लेकिन वे सब एक विशेष कालखंड तक ही प्रसिद्ध रहे और फिर खो गए। आखिर क्या है कामसूत्र का सम्मोहन कि इसका नाम लेने मात्र से ही व्यक्ति रोमांचित हो जाता है या कि इधर-उधर बगलें झाँकने लगता है।

PRPR
कामशास्त्र या कामसूत्र कहता है कि काम ही सृष्टि और जीवन का आधार है। काम से कतराना अर्थात जीवन के अहम सूत्र को छोड़ना है। आज दुनियाभर में सेक्स का जो विकृत रूप देखने में आता है उसका कारण है सेक्स के सही ज्ञान को न जान पाना या कि सेक्स के गलत ज्ञान को जानना।

सेक्स का विकृत रूप लेस्बियन या होमोसेक्सुअलिटी आज समाज में इसलिए स्थापित हो चला है कि सेक्स के गलत ज्ञान, विकृत और गंदे साहित्य का प्रचलन और स्त्री-पुरुषों के बीच प्रेम तथा विश्वास की कमी का होना है। धीरे-धीरे स्त्री और पुरुषों में दूरियाँ क्यों बढ़ती जा रही हैं इसके कई कारण हैं। स्त्री स्वतंत्रता के तथाकथित आंदोलन और पुरुषों के बढ़ते दंभ और दैहिक शोषण की प्रवृत्ति ने खाई को और बढ़ा दिया है। दुनियाभर के मनोवैज्ञानिक यह सोचने पर मजबूर हैं कि आखिर क्यों बढ़ रहे हैं तलाक के मामले, लेकिन कोई यह क्यों नहीं कहता कि स्त्री और पुरुषों के बीच लगातार प्रेम और विश्वास कम होता जा रहा है।

बाजारवादियों के लिए सेक्स का बाजार कभी मंदा नहीं रहा है। उन्होंने स्त्री स्वतंत्रता के मुद्दे को अपने लाभ के लिए भुनाते हुए इसका भरपूर दोहन किया। इसमें गंदे साहित्य और फिल्म को बेचना, रैंप पर चलते हुए कपड़े उतार देना या फिल्मों में उत्तेजक दृश्यों को ही स्त्री स्वतंत्रता का प्रतीक बनाया गया। इस तरह से स्त्री देह को तब तक भुनाया जा सकता है जब ‍तक कि उसके दिमाग में स्वतंत्र होने का भ्रम बना रहे। अब यह माना जाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ स्त्री के स्त्री होने में नहीं पुरुष जैसा होने में है। ऐसे अनेक कारण हैं जिससे कि स्त्री-पुरुषों के बीच खाई का बढ़ना जारी है। हो सकता है कि पाश्चात्य ‍शिक्षा के चलते स्त्री को स्त्री और पुरुष को पुरुष जैसा नहीं रहने देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाए।

PRPR
कामशास्त्र या कामसूत्र में स्त्री और पुरुष की शारीरिक संरचना और मनोविज्ञान को अच्छी तरह समझाया गया है इसीलिए यह पवित्र ग्रंथ शिक्षा देता है कि प्रेम का आधार है संभोग और संभोग का आधार है प्रेम। शरीर और मन दो अलग-अलग सत्ता होने के बावजूद दोनों एक दूसरे का आधार हैं। प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है। स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं। प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है। दो आत्माओं के एक दूसरे को देखने का कोई उपाय नहीं है। शरीर ही शरीर को देखता है। स्त्री यदि संपूर्ण तरह से स्त्रेण चित्त है और पुरुष में पौरुषत्व है तो दोनों एक-दूसरे के मोहपाश से बच नहीं सकते।

संभोग पर वात्स्यायन ने दुनिया का प्रथम और सर्वाधिक प्रसिद्ध दार्शनिक ग्रंथ लिखा 'कामसूत्र'। रतिक्रीड़ा पर आधारित इस ग्रंथ की दुनियाभर में चर्चा कहीं न कहीं होती रहती है। सात खंड के छत्तीस अध्यायों में 1250 श्लोक के इस ग्रंथ में संभोग तथा रतिक्रीड़ा के आसनों पर आखिर ऐसा क्या लिखा है जो हर काल में प्रासंगिक बने रहने की ताकत रखता है। इसके सूत्र आज भी उतने ही ताजा हैं जितने कि वात्स्यायन के काल में रहे थे।

संसार की लगभग सभी भाषाओं में अनुवादित हो चुके इस पवित्र ग्रंथ की चर्चा भारत से कहीं अधिक विदेशों में है। भारत के बाहर इसे गंभीरता से पढ़ा जाता है। यह भी कि भारत के बाहर इसे सड़क छाप साहित्य नहीं माना जाता बल्कि इसके सूत्रों के मनोवैज्ञानिक और हेल्थ साइंस के पहलुओं पर शोध किया जाता है। जबकि संकीर्ण मानसिकता के चलते भारत में अघोषित रूप से इसे असामाजिक शास्त्र करार दिया गया है।

वास्तव में सेक्स या संभोग ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला है। काम के सम्मोहन के कारण ही स्त्री-पुरुष विवाह सूत्र में बँधने का तय करते हैं। अतः विवाहित जीवन में काम के आनन्द की निरन्तर अनुभूति होते रहना ही कामसूत्र का उद्देश्य है। यदि स्त्री-पुरुषों के बीच काम को लेकर उदासीनता है तो दाम्पत्य जीवन ऐसे होगा जैसे कि एक ही ट्रेन में सफर कर रहे लेकिन अगल-अलग डिब्बों में।

PR
कामसूत्र यौन संबंधी जानकारियों का बेहतरीन खजाना है। कामसूत्र उन आसनों के लिए भी प्रसिद्ध है जिनके चित्र या मू्र्ति देखने के लिए लोग खजुराहो या अजंता-एलोरा जाते हैं या फिर चुपके से आसनों की सामग्री को बाजार से खरीदकर देखते हैं। दिमाग विकृत होता है बाजार के उस गंदे साहित्य को पढ़ने से जिसे पश्चिमी मानसिकता के चलते बेचा जाता है, लेकिन कामसूत्र या कामशास्त्र आपको उत्तेजित करने के बजाय सही ज्ञान देता है। कामसूत्र में संभोग के हर पहलू का वर्णन कर मनो-शारीरिक प्रतिक्रियाओं की जो विवेचना प्रस्तुत की है वह अद्भुत और रोमांचक है।

कामसूत्र महज एक ग्रंथ अथवा कागजों का पुलिंदा मात्र नहीं है बल्कि यह रतिक्रीड़ा के अलावा ग्रहस्थ जीवन को भी सही तरीके से जीने के उपाय बताता है। आज के भागदौड़ से भरे जीवन में पति-पत्नी के संबंध औपचारिक ही रह गए हैं, लेकिन कामसूत्र का ज्ञान आपके वैवाहिक जीवन को अंत तक तरोताजा बनाए रखने में सक्षम है। संभोग के आसनों से यौन सुख के साथ ही व्यायाम के लाभ भी प्राप्त किए जा सकते हैं। बस, जरूरत है तो इसे सही रूप में समझने की।

इन्हें भी पढ़े:-
काम का अर्थ यौन शिक्षा नहीं
हिंदू धर्म और सेक्स
सेक्स और प्रेम का संबंध!
संबंधित जानकारी खोजें
और भी
परमाणु ऊर्जा से पीछा छुड़ा रहा है अमेरिका
अमृता प्रीतम की याद में बहती अमृता-धारा
समलैंगिकता की सनसनी और सच्चाई
बहुत नाजुक हैं भारत-पाक संबंध
आतंकवाद बनाम धर्मनिरपेक्षता
राजनीति का शिकार है झारखंड