संगीत, प्रकाश से जीवंत हुआ विजय चौक

नई दिल्ली| भाषा| पुनः संशोधित शनिवार, 29 जनवरी 2011 (22:29 IST)
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रायसीना की शाही पहाड़ियों की एक ओर जहाँ सूरज ढल रहा था और अँधेरा दस्तक दे रहा था, वहीं ड्रम बीट और मार्शल धुनों के साथ प्रकाश से पूरा विजय चौक जगमगा रहा था। मौका था गणतंत्र दिवस के समापन समारोह यानी का।

गणतंत्र दिवस के इस समापन समारोह पर तीनों सेनाओं के बैंड इंडियन स्टार, मार्च ऑफ दि मैरीनर्स, अमर सेनानी ‘सारे जहाँ से अच्छा....' जैसी धुन बजाते नजर आए। इसमें दो नए गीतों कैप्टन महेंद्र दास के ‘गजराज’ और कैप्टन खेमचंद के ‘रश्मि’ की तान भी छेड़ी गई।

बीते सालों से अलग इस साल भारतीय धुनें ही प्रमुखता से रिट्रीट में छाई रहीं। 25 में से लगभग 19 भारतीय संगीतकारों द्वारा तैयार धुनें थीं। विदेशी संगीतकारों की ओर से दी गयी महज चार धुनें ही पेश की गईं, जिनमें ‘फैनफेयर’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ भी शामिल थीं।
सदाबहार ‘सारे जहाँ से अच्छा...’ और ‘अबाइड विद मी’ को छोड़कर बाकी धुनें कम से कम एक दशक बाद इस मौके पर बजाई गईं। राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह की मौजूदगी में हुए इस समारोह में थलसेना की विभिन्न रेजीमेंटों के 12 सैन्य बैंडों, 15 पाइप और ड्रम बैंडों और 12 ट्रम्पेट बजाने वालों ने हिस्सा लिया। नौसेना और वायुसेना के चार-चार बैंड भी प्रदर्शन में आगे दिखे।
इस साल का समारोह वायुसेना की ओर से संचालित किया गया और सभी बैंडों के लिए विंग कमांडर जयचंद्रन ही प्रधान संचालक थे। सैन्य बलों की सुप्रीम कमांडर इस समारोह की मुख्य अतिथि थीं। वे राष्ट्रपति भवन से विजय चौक पर आईं जहाँ पूरे गाजे-बाजे और देशभक्ति एवं वीरता की भावना से ओत-प्रोत धुनों से उनका स्वागत किया गया। (भाषा)



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