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क्या सचमुच मसीहा मिल गया है?

बुधवार,मई 14, 2014
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रेशम कीड़े से बनता है ये तो पता है लेकिन उससे रेशमी साड़ियाँ बुनने वाले कीड़ों के बीच नारकीय जीवन कैसे बिताते हैं ये देखना हो तो बनारस के बजरडीहा जाना होगा। बनारस... जहाँ की बनारसी साडियाँ दुनियाभर में मशहूर हैं और चमचमाते मॉल्स और वातानुकूलित शो रूम ...
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बनारस.... काशी.... वाराणसी.... अविमुक्त क्षेत्र... आनंद कानन.... ब्रह्मावर्त... जो भी कह लें... कुछ तो जादू है गंगा किनारे बसी इस नगरी में। शिवजी के त्रिशूल पर धरी इस नगरी में तीन नदियाँ हैं (थीं) ... वरुणा, असि और गंगा। ये तीनों ही मिलकर वो ...
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सुबह-ए-बनारस देखने के बाद ये ज़रूरी हो गया था कि शाम-ए-अवध का लुत्फ भी ले ही लिया जाए। यों भी लखनऊ पता नहीं क्यों एक अजीब तरह से आकर्षित करता रहा है... शायद इसलिए भी कि तमाम देशाटन के बावजूद कभी लखनऊ जाना नहीं हुआ।
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सोलहवीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनावों में मोदी और उनकी महत्वाकांक्षा इस कदर हावी है कि गोया ये सारा चुनाव ही मोदी के होने या ना होने के लिए हो रहा है। उनसे जुड़ी हर अच्छी या बुरी ख़बर ने मीडिया में अधिकांश जगह घेर रखी है।
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चुनावी बयार अपने चरम पर है... राजनीतिक घात-प्रतिघात, शह-मात का खेल पूरे शबाब पर है...। लेकिन इसके बीच एक कमी खल रही है... वह कमी है प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की। बेशक, इस चुनाव में कांग्रेस की प्रत्यक्ष अगुआई राहुल गांधी और परोक्ष अगुआई सोनिया गांधी ...
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कोई घाट पर डुबकी लगा रहा है और मंदिर-मंदिर जा रहा है, कोई घर-घर विराज कर हर किसी को हर लेना चाहता है...इन पुरातन प्रतीकों की आड़ क्यों ली जा रही है?....ये तो हज़ारों सालों से वहीं हैं जहाँ थे...इसके इर्द-गिर्द जीने वाली जनता का क्या?
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