| Candidate Name |
सम्राट चौधरी |
| State |
Bihar |
| Party |
NDA |
| Constituency |
तारापुर |
| Candidate Current Position |
Deputy CM |
सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) : प्रोफाइल
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी उर्फ राकेश कुमार ताकतवर नेता माने जाते हैं। नीतीश कुमार के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के बाद सम्राट चौधरी को राज्य का उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। सम्राट चौधरी 28 जनवरी 2024 से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार में बिहार के उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
राजनीतिक सफरनामा
सम्राट चौधरी ने राजनीति विरासत में पाई है। सम्राट चौधरी का परिवार राजनीति में काफी पुराना और मजबूत रहा है। उनके पिता शकुनी चौधरी सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। उनकी मां पार्वती देवी भी तारापुर विधानसभा से विधायक रही हैं। सम्राट चौधरी की पत्नी का नाम ममता कुमारी है और उनके दो बच्चे हैं। सम्राट चौधरी बीजेपी के ऐसे नताओं में से हैं जो आरएसएस की पृष्ठभूमि से नहीं आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी ख़ुद समता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। शकुनी चौधरी कभी नीतीश के करीबी थे तो कभी लालू प्रसाद यादव की पार्टी आरजेडी में भी रहे। शकुनी चौधरी का नाम कुशवाहा समाज के बड़े नेताओं में शुमार है और वे खुद भी विधायक और सांसद रहे हैं।
तारापुर से आजमा रहे हैं किस्मत
सम्राट चौधरी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मुंगेर जिले के तारापुर विधानसभा सीट से पहली बार किस्मत आजमा रहे। इस बार उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है। अपने राजनीतिक सफर में सम्राट चौधरी पहली बार अपने गृह जिले से चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पूर्व वे खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा से 2 बार विधायक रह चुके हैं। उप मुख्यमंत्री के चुनाव मैदान में उतरने से तारापुर सीट पर सबकी निगाहें टिकी हैं। महागठबंधन ने सम्राट के मुकाबले के लिए असरगंज निवासी अरुण कुमार साव (RJP) को उतारा है।
कम उम्र में मंत्री, विवादों से नाता
सम्राट चौधरी का प्रवेश सक्रिय राजनीति में 1990 में हुआ। बिहार विधान परिषद की वेबसाइट के मुताबिक 1995 में उन्हें एक राजनीतिक मामले में 89 दिन के लिए जेल जाना पड़ा था। प्रशांत किशोर अपने इंटव्यू में कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी 1995 में सात हत्याओं के आरोपी थे और उस समय उनकी उम्र 26 साल थी, जबकि उन्होंने नाबालिग बताकर जेल से रिहाई पाई थी। शकुनी चौधरी के सहयोग के कारण आरजेडी की सरकार ने उनके बेटे सम्राट चौधरी को मंत्री बनाया गया था। उस समय सम्राट चौधरी न तो विधानसभा के सदस्य थे और न ही विधान परिषद के। बाद में उनकी उम्र को लेकर विवाद पैदा हो गया था और इसकी शिकायत चुनाव आयोग तक गई थी। राज्यपाल ने उम्र विवाद के कारण उन्हें पद से हटा दिया था।
बिहार में साल 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी परबत्ता विधानसभा सीट से आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीते थे जबकि 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में वो जेडीयू के रामानंद सिंह से हार गए थे। 2010 में भी सम्राट चौधरी इस सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे थे। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार सम्राट चौधरी ने जेडीयू के रामानंद प्रसाद सिंह को कड़े मुकाबले में हराया था।
जन्म और शिक्षा
सम्राट चौधरी का जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। बचपन से ही उनका माहौल राजनीतिक रहा, क्योंकि उनका परिवार राजनीति में बेहद सक्रिय था। उनकी शिक्षा को लेकर जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर सवाल उठाते रहे हैं। खबरों के मुताबिक बुनियादी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मदुरै कामराज यूनिवर्सिटी से उच्च शिक्षा हासिल की है।