बाल कविता : हंसो-मुस्कुराओ...

child poem

बहुत देर चुप थे, जरा गुनगुनाओ,
अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ।
लगातार पापा ये चुप्पी बुरी है,
ये हंसना-हंसाना असल जिंदगी है।
मुखड़े पर अपने सितारे सजाओ,
अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ।

मम्मी भी गुमसुम हैं बैठी उदासी,
रखा ढेर पानी मगर फिर भी प्यासी।
उठो शीघ्र खुशियों की गंगा नहाओ,
अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ।
ये मस्ती के बादल, ये खुशियों की बूंदें,
इन्हें गुदगुदाओ ये पलभर में चूं दें।
हैं सिर पर तुम्हारे पकड़ के तो लाओ,
अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ।

पूजा के कमरे में घंटी की टुनटुन,
दादी का, दादा का कंचन है मन।
जरा उनसे जाकर दुआएं तो पाओ,
अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :