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सर्दी के दिनों पर कविता : छींक रहे पापा जुकाम से

गुरुवार,नवंबर 15, 2018
cold cough
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हो जाते हम बोनसाई तो, कितने मज़े हमारे होते। तीस इंच के होते पापा, बीस इंच की मम्मी। मैं होता बस आठ इंच का, पांच इंच की ...
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कविता : तारे घबराते हैं

गुरुवार,अक्टूबर 11, 2018
तारे घबराते हैं, शायद इसीलिये टिमटिमाते हैं, सूरज से डरते हैं, इसीलिये दिन में छिप जाते हैं।
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रानी दुर्गावती पर कविता- जब दुर्गावती रण में निकलीं हाथों में थीं तलवारें दो। धीर वीर वह नारी थी, गढ़मंडल की वह रानी
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बाल साहित्य : झांसी की रानी...

बुधवार,अक्टूबर 3, 2018
रानी थी वह झांसी की, पर भारत जननी कहलाई। स्वातंत्र्य वीर आराध्य बनी, वह भारत माता कहलाई॥ मन में अंकुर आजादी का, शैशव से ...
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हमें बताओ कैसे भागे,आप रात की जेल से। सूरज चाचा ये तो बोलो, आए हो किस रेल से।
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रक्षाबंधन पर फनी कविता- बजी द्वार पर घंटी ट्रिन ट्रिन, हाथी जी चकराए। फंदक-फंदक कर गुस्से में वह, दरवाजे तक आए।
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मैं हूं नन्हीं परी, बगल में, पंख छुपे हैं मेरे। आसमान से उड़कर आई, बिलकुल सुबह सवेरे।
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मिन्नी बोली टिन्नी से, टिन्नी टिन्नी शाला चल। छुपी हुई है घर में क्यों, घर से बाहर अभी निकल।
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कुत्ता भौंका बड़ी जोर से, बिल्ली भागी जान छोड़के। चुहिया ने तब मौज उड़ाई
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छुट्टी के दिन गजब के बीते हैं, सौ मीटर की रेस हमीं तो जीते हैं। खेलकूद और शेर के चक्कर में,
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कूद-कूदकर, उछल-उछलकर, होता है मस्ती का मन। जब बजती छुट्टी की घंटी, टन-टन-टन-टन, टन-टन-टन-टन।
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आलू की चड्डी ढीली थी, कुर्ता ढीला बैंगन का। दोनों ही नाराज बहुत थे,
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चींटी के घर चिट्ठी आई, हाथी से पढ़वाई। पापाजी बीमार बहुत हैं, सुनकर वह घबराई।
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मेंढक पानी का राजा है। टर्राना उसका बाजा है। जल के बाहर जब आता है।
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सेहत का शुभ संयोग हो प्रकृति का सहयोग हो स्वस्थ सारे लोग हो.... योग हो... योग हो ...
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योग से मन स्वच्छ हो योग से तन स्वस्थ हो योग पर ना धन खर्च हो योग करें हम योग करें
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कविता : बरखा रानी आती है

शुक्रवार,जून 8, 2018
जब-जब पानी आता है, पत्ते, फूल खिलाता है। बरखा रानी आती है, रिमझिम पानी लाती है।।
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हिम पर्वत पर मिलने वाला, फूल बड़े मतवाले। छोटी झाड़ी से पौधे तक, इसके रूप निराले।। छह हजार मीटर ऊंचाई,
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आई आई गर्मी आई कैसे-कैसे खेल लाई। आओ चुन्नी खेलें खेल सोनू क्या तुम कंचे लाई आई आई गर्मी आई।
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