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बालगीत : चल मेरे भाई, मेरे साथ...

शनिवार,अक्टूबर 14, 2017
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मंजिल को जब है पाना, खतरों से क्यों कर डरना। बाधाओं से टकराकर, हमको है आगे बढ़ना
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दीप जले हर गली-गली गुपचुप क्यों बैठे हो भाई नाचो-गाओ खुशियां बांटों दीवाली है घर आई ।
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हिन्दी कविता : दिवाली आई है...

शुक्रवार,अक्टूबर 6, 2017
दीपों की कतार से, एकता और प्यार से, उर के उल्लास से, जीवन के प्रकाश से खुशियां फैलाई हैं, दिवाली आई है।
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पूनम की चांदनी आज खिलेगी, बरसेंगे अमृत मोती। रोग-दोष छूमंतर होंगे, खिलेगी जैसे ज्योति।
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हम भी भेज दिए हैं बच्चों मंगल ग्रह को यह संदेश सकल जहां से कम नहीं है अपना प्यारा भारत देश
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देश की संतान है भारत मां की शान है सत्य-अहिंसा हमें सिखाता गांधी उसका नाम है
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विजय हुए थे रामजी, अतुलित राक्षसी शक्ति से। तब से मनाते हैं विजयादशमी, भारतवासी भक्ति से।।1।।
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जिसको पाकर मुक्त हुआ था, भारतमाता का उपवन। आओ आज सुनाएं तुमको, बापू का निर्मल जीवन।। अठ्ठारह सौ उनहत्तर में, अक्टूबर ...
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भारतमाता, अंधियारे की, काली चादर में लिपटी थी। थी, पराधीनता की बेड़ी, उनके पैरों से, चिपटी थी। था हृदय दग्ध, धू-धू ...
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जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। विश्वासी, धर्मनिष्ठ, कर्मठ, ...
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दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत। गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥ सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल। बिना रुके ...
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मेरा छोटा सा परिवार , इससे हम करते हैं प्यार। मम्मी-पापा सोनू -भैया, करते मुझसे प्यार दुलार ।।1।।
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अजब सलोना, सबसे प्यारा, गांव हमारा भाई। मस्त मगन हो पक्षी नभ में, उड़ रहे हैं भाई।। हरी घास है मखमल जैसी, चहुं दिशा में ...
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हिन्दी कविता : सूरज भैया

गुरुवार,सितम्बर 21, 2017
नित्य सवेरे उठकर कहती, राजू को उसकी मैया। पूरब में देखो तो राजू, आए हैं सूरज भैया ।
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कविता : देखो तो शाला जाकर

बुधवार,सितम्बर 20, 2017
करके जल्दी से तैयारी, शाला पढ़ने जाएंगे। चित्र बने हैं जहां मनोहर, मन अपना बहलाएंगे।
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बाल कविता : नई पहचान

मंगलवार,सितम्बर 19, 2017
नित्य सवेरे तुम जग जाना, धरती मां को शीश नवाना । प्यारे बच्चों इस दुनिया में, मिल-जुलकर पहचान बनाना।
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अश्व की शक्ति, अपरिमित तेज, अदम्य वेग। रण का वीर, चेतक रणधीर,
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होमवर्क करना पड़ता है, किस बात की होती छुट्टी। जब देखो तब मम्मी मेरी, पिलाती डांट की घुट्टी। घूमने कहीं जाने न देती, घर ...
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बरखा रानी के आते ही, छाई कुल हरियाली। हरे-भरे हैं बाग-बगीचे, धरणी लागे अति प्यारी। भ्रमर नृत्य कलियों पर करता, ...
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