कविता : दि‍वाली है खुशी मनाएं


दीप जले
हर गली-गली
गुपचुप क्यों बैठे हो भाई
नाचो-गाओ खुशियां बांटों
दीवाली है घर आई ।

दूर गगन में
झिलमिल-झिलमिल
देखो तारे आए बनठन
चंदा मामा के बिन देखो
सूना सा है उनका मन ।

प्यारे बच्चे
मन के सच्चे
नाचें-गाएं धूम मचाएं
डफली-ढोलक-ढोल बजाकर
दीवाली है खुशी मनाएं ।

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