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दास्तां कहते-कहते : ताज़ा ग़ज़लों व नज़्मों का संग्रह

बुधवार,नवंबर 8, 2017
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हिन्दी से जो लोग उर्दू मंचों पर आ रहे हैं, उनकी शायरी में एक अलग ही ताज़गी और अलग ही चमक है।
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'बहुत इंतिहाई आकर्षक आँखें, बिल्कुल हीरे की तरह चमकती हुईं। लंबे-लंबे बाल, जिन्हें वो निहायत ही दिलचस्प अंदाज़ से ...
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उर्दू शायर बशर नवाज का निधन

गुरुवार,जुलाई 9, 2015
मुंबई। हिन्‍दी फिल्म बाजार के लोकप्रिय गीत 'करोगे याद तो हर बात याद आएगी' के रचनाकार और मशहूर उर्दू शायर बशर नवाज का ...
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गालिब के खास शागिर्द और दोस्त अक्सर शाम के वक़्त उनके पास जाते थे और मिर्ज़ा सुरूर के आलम में बहुत पुरलुत्फ बातें किया ...
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एक रोज़ बादशाह चन्द मुसाहिबों के साथ आम के बाग ' हयात बख्श ' में टहल रहे थे-साथ में गालिब भी थे- आम के पेडों पर तरह-तरह ...
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यह बात आज भी संदिग्ध बनी हुई है कि मिर्जा ग़ालिब शिया थे या सुन्नी। इस संबंध में हमारी जानकारी का आधार उनकी अपनी रचनाएं ...
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एक दिन हमने मिर्ज़ा ग़ालिब से पूछा कि 'तुमको किसी से मुहब्बत भी है?' कहा कि, 'हाँ हज़रत अली मुर्तज़ा से।' फिर हमसे पूछा ...
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ग़ालिब के लतीफे : मेरा जूता

शनिवार,दिसंबर 27, 2014
एक दिन सय्यद सरदार मिर्ज़ा शाम को चले आए- जब थोड़ी देर रुक कर जाने लगे तो मिर्ज़ा खुद अपने हाथ में शमादान लेकर आए ताकि वह ...
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ऐतिहासिक शहर आगरा में जन्मे और अपना प्रारंभिक जीवन यहीं बिताने वाले मशहूर शायर मिर्जा ग़ालिब आज की तारीख में आगरा की ...
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जाने-माने उर्दू कवि और आलोचक शमसुर रहमान फारुकी ने अपनी किताब ‘द सन दैट रोज फ्रॉम द अर्थ’ में 1857 की लड़ाई में ‘कंपनी ...
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ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह की पुण्यतिथि पर बाँसुरी वादक रोनू मजूमदार और भजन व ग़ज़ल गायक अनूप जलोटा से हुई बातचीत पर आधारित-
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'किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी, ये हुस्नों इश्क धोखा है सब मगर फिर भी'...ये शेर अपनेआप में एक बेबसी, इक ...
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बात उन दिनों से क़रीब 11 बरस पहले की है, जब हिंदुस्तान को चीरकर दो हिस्सों में तक़्सीम नहीं किया गया था। तब चिनाब, झेलम, ...
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फिल्म और थिएटर की मशहूर अदाकारा शबाना आज़मी ने अपने वालिद और हमारे वक्‍त के बेहतरीन व अज़ीम शायर कैफ़ी आज़मी की याद में ...
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कौन होगा, जो मशहूर शायर मुनव्वर राना के नाम से वाक़िफ़ न हो। जी हां ! वही मुनव्वर राना, जिनकी शायरी में दुनियादारी की ...
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कहते हैं हर शब के बाद सहर और सहर के बाद फिर शब आती है। दोनों की उम्र क़रीब-क़रीब बराबर ही तय है। मगर कभी-कभी शब की उम्र ...
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हर बरस की तरह इस दफ़ा भी सहने-उज्जैन ने अपनी गोद में अदब की महफ़िल आरास्ता करने की पूरी तैयारी कर ली थी। मुक़द्दस ...
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प्रख्‍यात हास्‍य-व्‍यंग्‍य कवि ओम व्‍यास 'ओम' के निधन को एक वर्ष हो गया था। उनकी पहली पुण्‍यतिथि पर एक डिस्‍पैच तैयार ...
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वैसे तो मशहूर शायर मुनव्वर राना का उज्जैन-इंदौर से ख़ासा राबिता रहा है। लिहाज़ा, यहाँ के सामिईन को कई बार उनके कलाम ...
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