साल 2016 : स्मृति शेष

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वक्त बदलता है साल दर साल...कोई मिलता है नया, तो कोई बिछड़ जाता है सदा के लिए। ये पंक्तियां सच्ची लगती हैं जब नए साल की आहट के साथ एक साल बीतने की कगार पर होता है और उस बीते साल के साथ जीवन को अलविदा कहते कुछ चेहरे पीछे छूट जाते हैं। ये नाम और चेहरे भले ही अब दोहराए न जाएं, लेकिन अतीत की सुनहरी स्मृतियों में चमकते जरूर नजर आते हैं। ऐसे ही कुछ नाम और जाने पहचाने चेहरे इस साल भी साथ छोड़ गए...

1 जयललिता (22 दिसंबर 2016)  - जे.जयललिता...एक ऐसा नाम जो बॉलीवुड के सुनहरे पर्दे से ले‍कर राजनीति के मंच तक, अदाकारी से लेकर मुखर दांवपेंचों तक, मजबूती के साथ जनता के बीच स्थापित रहा और अंत तक ओजपुंज और तीखे तेवरों के लिए जाना गया। अभि‍नय के क्षेत्र में 140 फिल्मों में उन्होंने अपनी अदाकारी के जलवे बिखेरे। इसके बाद राजनीति का सफर शुरू किया और 8 बार विधानसभा का चुनाव लड़ने, एक बार राज्यसभा के लिए मनोनीत होने के अलावा वे चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। तमिलनाडु की जनता का उन्हें भरपूर सहयोग ओर स्नेह मिला। लोगों को उनसे इतना लगाव था कि उन्हें अम्मा संबोधन दिया जाता था। 22 दिसंबर को 68 साल की उम्र में जे. जयललिता को दिल का दौरा पड़ने पर चेन्नई के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से वे वापस नहीं लौटीं और इस दुनिया को अलविदा कह गईं। उनके समर्थकों में इस बात का गहरा दुख था। 
 
जयललिता की जीवनी 'अम्मा जर्नी फ्रॉम मूवी स्टार टु पॉलिटिकल क्वीन' लिखने वाली वासंती उनके बारे में कहती हैं, कि "उनकी ताकत थी कि वो बहुत मजबूत नेता रही हैं और उनका पार्टी पर इतना मजबूत नियंत्रण है कि लोग उनके सामने कांपा करते थे। वो अपने मंत्रियों से मिलना भी पसंद नहीं करती थीं। लोगों में मफ्त चीजें बांटने की नीति ने भी उन्हें बहुत लोकप्रिय बनाया।

 
2 रामनरेश यादव (22 नवंबर 2016) - राजनीति का एक और बड़ा चेहरा रहे रामनरेश यादव भी में हमारा साथ छोड़ गए। वे 1977 में उत्रप्रदेश के मुख्यमंत्री निर्वाचित हुए थे और उसके बाद राज्यसभा के सदस्य, संसदीय दल का उपनेता होने के साथ-साथ पब्लिक एकाउंट कमेटी (पी.ए.सी.), संसदीय सलाहकार समिति (गृह विभाग), रेलवे परामर्शदात्री समिति और दूरभाष सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी कार्यरत रहे। इसके अलावा बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय में एक्सिक्यूटिव कॉसिंल के सदस्य, अखिल भारतीय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओ.बी.सी.) रेलवे कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और आप जनता इंटर कालेज अम्बारी आजमगढ़ (उ.प्र.) के प्रबंधक एवं अनेकों शिक्षण संस्थाओं के संरक्षक भी रहे। 
 
अखिल भारतीय राजीव ग्राम्य विकास मंच, अखिल भारतीय खादी ग्रामोद्योग कमीशन कर्मचारी यूनियन और कोयला मजदूर संगठन कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में वे ग्रामीणों और मजदूर तबके के कल्याण के लिये लंबे समय तक संघर्षरत रहे। 
 
अपने मुख्यमंत्रित्व काल में उन्होंने आर्थिक, शैक्षणिक तथा सामाजिक दृष्टि से पिछड़े लोगों के उत्थान के कार्यों पर ध्यान दिया तथा गांवों के विकास के लिये समर्पित रहे। उत्तरप्रदेश में अन्त्योदय योजना का शुभारम्भ उनके द्वारा ही किया गया। श्री यादव सन् 1988 में संसद के उच्च सदन राज्यसभा के सदस्य बने एवं 12 अप्रैल 1989 को राज्यसभा के अन्दर डिप्टी लीडरशिप, पार्टी के महामंत्री एवं अन्य पदों से त्यागपत्र देकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। प्रतिभूति घोटाले की जांच के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य के रूप में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण थी।
3 राज बेगम 26 अक्टूबर 2016 - कश्मीरी गायिका राज बेगम ने अपनी दिलकश आवाज से कश्मीर के संगीत प्रेमियों के दिल पर पीढ़ियां तक राज किया और 26 अक्टूबर 2016 श्रीनगर में अंतिम सांस ली। राज बेगम की  आवाज का जादू कुछ इस तरह था कि खूबसूरत आवाज के लिए उन्हें नाइटिंगल ऑफ कश्मीर कहा जाता था।

 27 मार्च 1927 को जन्मीं राज बेगम ने शादी विवाह समारोहों से गायन की शुरूआत की थी, ले‍किन बाद में वे कश्मीर की सबसे अधिक लोकप्रिय महिला गायिकाओं में शामिल हो गईं। बेगम के पिता ने उनकी गायन प्रतिभा को तराशा और 1954 में उन्होंने रेडियो कश्मीर में काम करना शुरू किया। कुछ ही समय बाद स्टेशन से प्रमुखता के साथ उनके कार्यक्रमों का प्रसारण होने लगा। 
 
वर्ष 2002 में राज बेगम को पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित किया गया और वर्ष 2013 में उन्हें संगीत अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया। जम्मू-कश्मीर सरकार ने भी उन्हें 2009 में उन्हें सम्मानित कर चुकी थी। जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने राज बेगम के निधन पर अपना शोक प्रकट करते हुए अपने शोक संदेश में कहा था कि - कश्मीर ने एक बेशकीमती आवाज खो दी है। उन्होंने बेगम के निधन को कश्मीर के संगीत इतिहास के एक महान कालखंड की समाप्ति कहा। पूर्व मुख्यमंत्रियों फारक अब्दुल्ला, गुलाम नबी आजाद और उमर अब्दुल्ला ने भी बेगम के निधन पर शोक संवेदना प्रकट की थी।

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