कैफ़ी आज़मी : एक क्रांतिकारी शायर

-आदिल कुरैशी

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कैफ़ी आज़मीः 14/01/1918 - 10/05/2002



कैफ़ी आज़मी से मुलाकात अब पर

फिल्म और थिएटर की मशहूर अदाकारा शबाना आज़मी ने अपने वालिद और हमारे वक्‍त के बेहतरीन व कैफ़ी आज़मी की याद में इंटरनेट पर एक वेबसाइट की है। इस वेबसाइट पर कैफ़ी की शायरी, वीडियो और उनके लिखे फिल्मी गीतों को संजोया गया है। अलावा इसके उनकी ज़िंदगी में झांकने का मौक़ा भी वेबसाइट फ़राहम करती है।

इस तरह कैफ़ी शायद ऐसे पहले बन गए हैं, जिनके काम और पर इतनी तवील व बातरतीब वेबसाइट की शुरुआत हुई है।

शबाना ने अपने एक ट्वीट में इस वेबसाइट की लिंक देते हुए इसे देखने की गुज़ारिश की है। 'कैफ़ी आज़मी - ‘ए रिबेलियस पोएट ' उनवान वाली यह ऑडियो-वीडियो साइट फिलहाल अंग्रेज़ी में है। महान शायर की कई अनदेखी तस्वीरों वाली वेबसाइट आप http://www.azmikaifi.com पर देख सकते हैं।

वेबसाइट पर कैफ़ी साहब की बेटी शबाना और बेटे (बाबा आज़मी) बताते हैं, ‘कैफ़ी साहब एक बहुत ही ज़िम्मेदार बाप थे। बच्चों की हर ख़्वाहिश पूरी करने की वो हमेशा कोशिश करते थे।’ जब शबाना ने फ़िल्म इंस्टिट्यूट में जाने का इरादा अब्बा को बताया, तो कैफ़ी साहब ख़ुद उन्हें लेकर ऑडिशन कराने पुणे गए। बाबा ने जब सिनेमेटोग्राफी में अपनी दिलचस्पी ज़ाहिर की, तो उन्होंने इंतज़ाम किया कि ईशान आर्या से बाबा को कैमरे की बारीकियां सीखने को मिलें।

कैफ़ी आज़मी अपने बच्चों से कहा करते थे कि कोई भी काम छोटा नहीं होता। अगर कल को तुम जूते बनाने का काम करना चाहोगे, तो भी मैं तुम्हारी पूरी रहनुमाई करूंगा, बशर्ते तुम सबसे अच्छा शूमेकर बनने के लिए कड़ी मेहनत करो।

कैफ़ी साहब की शरीक-ए-हयात शौकत कहती हैं, ‘उनके करियर में कैफ़ी साहब की हमेशा पूरी-पूरी मदद रही।’ दामाद जावेद अख्तर को कैफ़ी साहब नए शायरों में सबसे ऊपर मानते थे। बाबा की बीवी तन्वी आज़मी याद करते हुए कहती हैं, ‘कैफ़ी साहब ससुर के बजाए बाप की तरह मोहब्बत करते थे।’

WD|
वह हमेशा दूसरों से अलग थे, जो एक छोटी बच्ची के रूप में आसानी से मेरे गले नहीं उतरता था। दूसरे इज़्ज़तदार वालिदों की तरह वो दफ्तर भी नहीं जाते थे और न ही पेंट-शर्ट पहनते थे, बल्कि उन्हें 24 घंटे सफ़ेद कुर्ता-पायजामा पहने रहना पसंद था। वो अंग्रेज़ी नहीं बोलते थे और सबसे ख़राब बात यह कि दूसरे बच्चों की तरह मैं उन्हें डैडी नहीं बल्कि एक अजीब सी आवाज़ वाला ‘अब्बा’ कहकर पुकारती थी।
शबाना आज़मी, आज़मीकैफीडॉटकॉम में
अगले पेज पर : पहली ग़ज़ल 11 साल की उम्र में

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