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प्रेम गीत : मन का संगीत...

बुधवार,अक्टूबर 11, 2017
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उसकी याद फिर से आई है, दूर कहीं गूंज उठी शहनाई है। रात रो-रोकर कटी है कहीं पर, कहीं सुबह हो रही विदाई है।
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एक अहसास बूंद की मानिंद चिपका है तुम्हारे गुलाबी अस्तित्व में। बहुत कोशिश के बाद भी न झुठला सका इस सत्य को
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भव्य-सी तुम भावना हो, मधुर-सी सद्भावना हो। सादगी में खुद को समेटे, प्यार की संभावना हो। भाव आंखों में समेटे, लाज तन से ...
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जब पहनती हो तुम श्वेत रंग मैं महक उठता हूं मोगरा, चमेली और चंपा की सुगंध से जब होती हो तुम गुलाबी वसना मेरे मन ...
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चारु चन्द्र मन मतंग पिया संग प्रेम रंग लगी अंग। दीप्त दामनी चटक चांदनी मन भावनी प्रेम पावनी प्रीत रागनी।
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प्यार का मर्म मालूम होता अगर, दिल हमारा कभी तुम दुखाते नहीं। नाम जबसे तुम्हारा लिया है प्रिये, चम्पई-चम्पई तन हमारा ...
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प्रेम कविता : मोहब्बत...

मंगलवार,जून 13, 2017
दिमाग की असंख्य कोशिकाओं से छूटता है एक इलेक्ट्रिकल संदेश और फिर शुरू होता है रसायन का खेल जिसे हम मोहब्बत कहते ...
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शम्मा जलती रही, रात ढलती रही, बात बन-बन के यूं ही बिगड़ती रही। चांद हंसता रहा बेबसी पर मेरी, आंख रिसती रही यादों में ...
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मीरा का प्रेम, प्रेम की अंतिम व्याख्या है। कृष्ण से शुरू, कृष्ण पर समाप्त मीरा के प्रेम में मीरा कहीं नहीं हैं, सिर्फ ...
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एक बार तो कहते मत जाओ तुम मेरी हो, एक बार तो कहते आ जाओ तुम मेरी हो। मन की पहली धड़कन तुम्हीं थे, तन की पहली सिहरन तुम ...
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रख दो इन कांपती हथेलियों पर कुछ गुलाबी अक्षर कुछ भीगी हुई नीली मात्राएं बादामी होता जीवन का व्याकरण, चाहती हूं कि उग ही ...
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रोमांस शायरी : प्यार बाकी...

सोमवार,अप्रैल 24, 2017
अभी तो मेरे प्यार का शबाब बाकी है, अभी न जाओ के अभी तो रात बाकी है, तेरी आंखों से जो छलका वो पैमाना बाकी है,
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जिंदगी के साथ कोई मेरा हमसाया हो गया। एक लड़की से क्या मिला, मैं उसकी छाया हो गया, रिश्ता होते ही जिंदगी में वह हो गई ...
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तेरी पलकें झुकी देखते ही मुझे, मैंने माना कि इजहार हो ही गया। होठ तेरे गुलाबी गुलाबी हुए, ये इशारे कहें प्यार हो ही ...
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एक मंदिर हो तुम प्रेम का देवता खुश हुआ तो, मेरी जिंदगी में तुम आ गए, आ गए, आ गए। दो दिल जब मिल साथ में चले तो, थम गए ...
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वह घूम रही उपवन-उपवन पुष्पों-सी नजाकत अधरों पर, नवनीत-सा कोमल उर थामे। एक पाती प्रेम भरी लेकर वह घूम रही ...
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आंसू याद रख खुशियां भुला देते हैं, मानसून आंखों में बसा लेते हैं लोग। फूल की महक लेकर भुला देते हैं, कांटों को दामन से ...
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प्रिये! तुम्हें मैं क्या गीत सुनाऊं, जो ला सके तुम्हारे अधरों पर मुस्कान, वो सुर-ताल कहां से लाऊं, प्रिये! तुझे मैं ...
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ज़िंदगी गज़ल बन गई, आप जरा मुस्कुराइए। किसी नज़्म की बोल बन ओठों पर छा जाइए। आपका यूं मुस्कुराना दिल को भी लुभाता ...
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