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ग़ज़ल : दर पे खड़ा मुलाकात को...

शुक्रवार,मई 18, 2018
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उम्र भर सवालों में उलझते रहे स्नेह के स्पर्श को तरसते रहे, फिर भी सुकूँ दे जाती हैं तन्हाईयाँ आख़िर किश्तों में हँसते ...
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काश प्यार न किया होता बेपनाह, दिल लगा के लगता है कर दिया कोई गुनाह, दिन अब जलते हैं और रातें सुलगती हैं, किनारों से ...
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तेरी याद जीने नहीं देती दायित्वों का ख्याल मरने नहीं देता। जिस्म पर निशान हलके फुल्के लगते है, अंतरमन धूं धूं कर दहक ...
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देख रही हूं कुछ गड़बड़ है, ये बेचैनी और ये हड़बड़ है!! मोहब्बत नई दिखे है जालिम, बोली में भी तेरे खड़खड़ है!!
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ओस की बूंद आकाश से गिरकर, फूलों और पत्तियों पर ठहर जाएगी। रातभर रोया है चांद किसी की याद में, यह कहानी धरा
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तुम्हे प्यार नहीं तो क्या मुझको दीवाना कह लो। उम्मीदे वफ़ा नहीं तो क्या, मुझको दीवाना कह लो।
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कविता : आ जाती हैं कुछ यादें

बुधवार,अप्रैल 18, 2018
धूल की पर्तों के नीचे तस्वीरों में अहसास जगाती हुई, ख़्वाहिशें कांधे पे लिए कुछ इठलाती हुईं, आ जाती हैं कुछ यादें दिल को ...
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क्या था तुम्हारी उस एक छुअन में, कि वो शाम याद आती है, तो जाती नहीं।अजब-सा खुमार था तुम्हारे सुरूर का,
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मैं हूं तेरा दीवाना, तू नहीं करीब मेरे, मैं तेरे आसपास हूं। तेरी तस्वीर को, ले के घूमता हूं...
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अचानक उनका दीदार हुआ, हमारा ख्वाब जमीं पे उतर आया। मुलाकात का सरूर आंखों में उतर आया, हमें अहसास हुआ कि हमें वो पसंद ...
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गजल : कुछ बातें अधूरी हैं...

मंगलवार,फ़रवरी 13, 2018
कुछ बातें अधूरी हैं, कहना भी ज़रूरी है, बिछड़ना मजबूरी था, मिलना भी ज़रूरी है।
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कागा तुम नहीं आते मेरे द्वार वर्षों पहले तुम आते थे अपनी कांव-कांव से यह बताते थे कि प्रिय घर आने वाले हैं।
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आसान नहीं है प्रेम पर लिखना प्रेम को समझना उसे जीना या फिर परिभाषित कर
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क्यों आंखों में बसे हो तुम, छाई हुई तन्हाई। अभी दूर रहो मुझसे, करने दो हमें पढ़ाई।
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प्यार के धोखे कैसे डसते हैं, शायद तुमको मालूम होगा। नींद तो मेरी टूट गई है, तेरी नींद का क्या होगा।
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मैं प्यासा एक प्रेमी हूं, जो इधर-उधर भटकता हूं। अपनी प्यारी प्रिया के गम में, बिन बरसात तड़पता हूं।
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जुबां नहीं होती दिल का हाल, कैसे बयां करतीं तेरी नजदीकियां। बहारों से पूछता बिन हवाओं
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दिल टूट जाता है, बड़ी तकलीफ होती है,जब बंधन छूट जाता है।
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तुम समझ चुके हो या समझना अभी बाकी है, तुम्हारा मेरे अंदर मरना, अभी तलक बाकी है।
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