योगी से मिले श्रीश्री रविशंकर, अयोध्या में राम मंदिर पर जगी आस

लखनऊ| Last Updated: बुधवार, 15 नवंबर 2017 (11:32 IST)
लखनऊ। राम मंदिर विवाद को लेकर मध्यस्थता कर रहे आध्यात्मिक गुरु ने बुधवार सुबह मुख्यमंत्री से मुलाकात की। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार करीब चालीस मिनट तक दोनों में हुई बातचीत के दौरान मंदिर निर्माण के संबंध में चर्चा की गई।
उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि मंदिर मस्जिद विवाद का निपटारा अदालत से बाहर सुलह समझौते से हो जाये तो बेहतर रहेगा। न्यायालय भी उसमें मदद को तैयार रहेगा। श्री श्री रविशंकर अभी तक कई इस मुद्दे को लेकर कई लोगों से बात कर चुके हैं। रविशंकर गुरुवार को अयोध्या भी जाएंगे।
श्रीरविशंकर दोपहर करीब एक बजे शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी से भी मिलेंगे। रिजवी ने भी इस ऐतिहासिक मामले का बातचीत से हल करने के लिए इधर कुछ दिनों से प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने दो दिन पहले अयोध्या जाकर श्रीराम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष नृत्य गोपालदास, न्यास के सदस्य सुरेश दास, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महन्त नरेन्द्र गिरि और कुछ अन्य संतों से मुलाकात की थी।
रिजवी ने हल के लिए तैयार मसौदे में कहा था कि रामलला विराजमान स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और मस्जिद अयोध्या से बाहर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में बने। मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जाए।
रिजवी के अनुसार साधु संतों ने उनके मसौदे पर सहमति व्यक्त की थी। इसके बाद वह इलाहाबाद गए और वहां गिरि से उनकी अकेले में लंबी बातचीत हुई।

दूसरी ओर, मंदिर मस्जिद विवाद से जुड़े दो प्रमुख संगठनों विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड ने स्पष्ट कह दिया कि इस मसले का हल केवल न्यायालय से ही हो सकता है। बातचीत से इस विवाद का निपटारा अब सम्भव ही नहीं है।
मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सचिव और विवाद के एक प्रमुख पक्षकार सुन्नी सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में लम्बित है अब वहीं फैसला होगा। बातचीत से इस मसले का हल नहीं हो सकता क्योंकि मामला काफी आगे बढ़ गया है।

विहिप के शरद शर्मा का कहना है कि लोग सुर्खियों में आने के लिये बातचीत से हल करने के प्रयासों का ढिंढोरा पीट रहे हैं। अब तक कई लोगों ने इस मसले के बातचीत से हल के लिए कोशिश की। मीडिया में बयान दिए, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
उनका कहना था कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत चन्द्रशेखर के कार्यकाल में सुलह समझौते की सकारात्मक पहल हुई थी, लेकिन दूसरे पक्ष के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण समझौता नहीं हो सका।

इस बीच, श्री श्रीरविशंकर का शिया सेन्ट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों से मिलने का कार्यक्रम है। वह मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के सदस्य मौलाना रशीद फिरंगी महली से भी मिल सकते हैं। इसके बाद वह अयोध्या जायेंगे। अयोध्या में प्रमुख धर्माचार्यो और विवाद से जुड़े पक्षकारों से कल मुलाकात करेंगे।(वार्ता)

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