पांचवां रोजा : दुआ का दरख़्त है रोजा...



प्रस्तुतिः अज़हर हाशमी

दुनिया के हर मज़हब में अपने-अपने मज़हबी तरीक़े से लोग उपवास (रोजा) रखते हैं। हर शख़्स अपने-अपने मज़हब की मान्यताओं के तहत उपवास के क़ायदे-क़ानून का पालन करता है। सब मज़हबों ने उपवास (रोजा) का तशबीहात (उपमाओं) से ज़िक्र किया है। मिसाल के तौर पर जैन धर्म में पर्युषण पर्व के उपवास आत्मशुद्धि और कषाय-मुक्ति का पर्व है।
सनातन धर्म के मानने वालों में नवरात्र के उपवास मातृशक्ति और भक्ति के प्रतीक हैं। यानी हर धर्म में उपवास को विशिष्ट दृष्टि से देखा गया है। इस नज़रिए यानी जो जिस धर्म का मानने वाला है, उसको अपने धर्म के मुताबिक़ चलने और पालन करने में इस्लाम को कोई गुऱेज नहीं है।

हक़ीक़त तो यह है कि पवित्र क़ुरआन के तीसवें पारा (अध्याय-30) की सूरे-काफ़ेरून की आख़िरी आयत में ज़िक्र है-'लकुम दीनोकुम वले यदीन' यानी 'तुम तुम्हारे दीन पर रहो मैं मेरे दीन पर रहूँ।' चूंकि इस्लाम मज़हब एकेश्वरवाद (ला इलाहा इल्लल्लाह) को मानता है और हज़रत मोहम्मद (सअवस) को अल्लाह का रसूल (मोहम्दुर्र रसूलल्लाह) स्वीकारता है, इसलिए रोजा मुसलमान पर फ़र्ज़ की शक्ल में तो है ही, अल्लाह की इबादत का एक तरीक़ा भी है और सलीक़ा भी।
तक़्वा (पुण्य कर्म और साधनों की शुद्धता) तरीक़ा है रोजा रखने का। सदाक़त (सत्य-निष्ठा), सलीक़ा है रोज़े की पाकीज़गी का। सब्र, सड़क है रोजदार की। ज़कात (दान), पुल है रोजदार का। ऐसा पाकीज़ा रोजा रोजदार के लिए दुआ का दरख़्त है।


Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :

गलत समय में सहवास करने से पैदा हुए ये दो दैत्य, आप भी ध्यान ...

गलत समय में सहवास करने से पैदा हुए ये दो दैत्य, आप भी ध्यान रखें
शास्त्रों में सहवास करने का उचित समय बताया गया है। संधिकाल में उच्च स्वर, सहवास, भोजन, ...

क्या है राशि, किस राशि से कैसे जानें भविष्य, पढ़ें सबसे खास ...

क्या है राशि, किस राशि से कैसे जानें भविष्य, पढ़ें सबसे खास जानकारी
आकाश में न तो कोई बिच्छू है और न कोई शेर, पहचानने की सुविधा के लिए तारा समूहों की आकृति ...

9 ग्रहों की ऐसी पौराणिक पहचान तो कहीं नहीं पढ़ी...

9 ग्रहों की ऐसी पौराणिक पहचान तो कहीं नहीं पढ़ी...
भारतीय ज्योतिष और पौराणिक कथाओं में 9 ग्रह गिने जाते हैं, सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, ...

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, ...

क्या सच में ग्रहों की चाल प्रभावित करती है हमारे जीवन को, जानिए कैसे
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड 360 अंशों में विभाजित है। इसमें 12 राशियों में से प्रत्येक राशि के 30 ...

राजा हिरण्यकश्यप के अंत के लिए भगवान विष्णु ने किया था ...

राजा हिरण्यकश्यप के अंत के लिए भगवान विष्णु ने किया था पुरुषोत्तम मास का निर्माण
तेरहवें महीने के निर्माण के संबंध में किंवदंती है कि भगवान ब्रह्मा से राजा हिरण्यकश्यप ने ...

25 मई 2018 के शुभ मुहूर्त

25 मई 2018 के शुभ मुहूर्त
शुभ विक्रम संवत- 2075, अयन- उत्तरायन, मास- ज्येष्ठ, पक्ष- शुक्ल, हिजरी सन्- 1439, मु. ...

महापर्व पर्युषण क्या है, जानिए

महापर्व पर्युषण क्या है, जानिए
*पर्युषण का अर्थ है परि यानी चारों ओर से, उषण यानी धर्म की आराधना। श्वेतांबर और दिगंबर ...

शादी के इन उपायों से बेटी के लिए घर बैठे आएगा रिश्ता, आजमा ...

शादी के इन उपायों से बेटी के लिए घर बैठे आएगा रिश्ता, आजमा कर देखें
बेटी के लिए सुयोग्य वर की तलाश में माता-पिता चिंतित होने लगते हैं। समस्त प्रयासों के साथ ...

सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं अधिक मास की कमला (पद्मिनी) ...

सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं अधिक मास की कमला (पद्मिनी) एकादशी की यह पौराणिक व्रत कथा
पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी ...

25 मई को कमला (पद्मिनी) एकादशी : ये दुर्लभ व्रत देता है ...

25 मई को कमला (पद्मिनी) एकादशी : ये दुर्लभ व्रत देता है कीर्ति और मोक्ष, पढ़ें सरल विधि
पुरुषोत्तम मास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। इस वर्ष यह एकादशी ...

राशिफल