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8वां रोजा : रोजादार की दुआ सुनता है अल्लाह

गुरुवार,मई 24, 2018
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रमजान माह का पहला अशरा यानी शुरू के दस रोजे रहमत के माने जाते है। शुरुआती दस रोजे किसी दरिया के मानिन्द हैं जिसमें ...
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छठवां रोजा सब्र और बुलंदी की सीढ़ी है। तो इसका सीधा-सा जवाब है कि मुकम्मल ईमानदारी और अल्लाह की फ़रमाबर्दारी के साथ रखा ...
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सब मज़हबों ने उपवास (रोजा) का तशबीहात (उपमाओं) से ज़िक्र किया है। मिसाल के तौर पर जैन धर्म में पर्युषण पर्व के उपवास ...
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कोई शख़्स जब नेक नीयत और अच्छे जज़्बे के साथ रोजा रखता है, अल्लाह की रज़ामंदी हासिल करने के लिए रोजा रखता है यह सोचकर रोजा ...
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अल्लाह की रहमत होती है तभी दिल को सुकून मिलता है। दिल के सुकून का ताल्ल़ुक चूंकि नेकी और नेक अमल (सत्कर्म) से है।
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रोजे को समझना सबसे बड़ी बात है। रोजे को समझना यानी रोजे से जुड़े एहतियात बरतना और ग़ुस्से, लालच और हवस पर क़ाबू रखना ही ...
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इस्लाम मज़हब में रोज़ा, मज़हब का सुतून (स्तंभ) भी है और रूह का सुकून भी। रोजा रखना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है।
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पवित्र महीना रमजान शुरू हो गया है। मुस्लिम समुदाय में रमजान की तैयारियां हो गई हैं। रमजान को लेकर बाजार में रोजा इफ्तार ...
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रमजान/ईद-उल-फित्र पर हिन्दी कविता : ईद मुबारक। जो मेरे अपने हैं, उनको ईद मुबारक हो। जो भारत के सपने हैं, उनको ईद ...
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ईद-उल-फितर पर विशेष : रोजेदारों को अल्लाह का इनाम है ईद...
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'ईद-उल-फित्र' सही मायनों में तो ये मन्नतें पूरी होने का दिन है। इन मन्नतों के साथ तो ऊपर वाले के सामने सभी मंगते बनने ...
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इस्लाम में दो ही खुशी के दिन हैं, ईद-उल फित्र और ईद उल जुहा। रमजान में पूरे महीने रोजे रखने के बाद ईद-उल फित्र मनाई ...
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रमजान/ईद-उल-फित्र की दावत के विशेष पकवान...
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चिकन को लेकर उसके सभी तरफ छुरी की सहायता से चीरा लगाएं और अलग रखें। अब जार में कटी प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, ...
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उन्तीसवां रोज़ा रमज़ान की रुख़सत के इशारे के साथ रोज़ादारों और नेक बंदों से अल्लाह पर ईमान के साथ दुआ का पैग़ाम दे रहा है। ...
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आयत की रोशनी में अट्ठाईसवां रोजा बेहतर तौर पर समझा जा सकता है। गौरतलब बात है कि रमजान का यह आखिरी अशरा दोजख से निजात ...
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रसूलुल्लाह ने शब-ए-कद्र के लिए रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 रात बताई। इन रातों में रातभर मुख्तलिफ इबादतें की जाती हैं। ...
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आज सत्ताईसवां रोजा है। कल छब्बीसवां रोजा और शबे-क़द्र (सत्ताईसवीं रात) साथ-साथ थे। यहां यह बात जानना जरूरी है कि ...
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शबे कद्र को रात भर इबादत के बाद मुसलमान अपने रिश्तेदारों, अजीजो-अकारिब की कब्रों पर सुबह-सुबह फातिहा पढ़कर उनकी मगफिरत ...
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