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हरिहर मिलन का दिन है बैकुंठ चतुर्दशी, जानें कैसे करें श्रीहरि विष्‍णु और शिवजी का पूजन कि मिले बैकुंठ में स्थान

मंगलवार,नवंबर 20, 2018
Vaikuntha Chaturdashi 2018
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वर्ष 2018 में बैकुंठ चतुर्दशी पर्व 22 नवंबर, गुरुवार को मनाया जा रहा है। कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को ...
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धार्मिक शास्त्रों के अनुसार बैकुंठ चतुर्दशी के दिन व्रत-उपवास करके नदी, सरोवर आदि के तट पर 14 दीपक जलाने की परंपरा है।
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वर्ष 2018 में देवउठनी एकादशी पर विवाह संपन्न नहीं होंगे क्योंकि इस बार देवउठनी एकादशी पर गुरु का तारा अस्त स्वरूप
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देवउठनी ग्यारस / एकादशी पर तुलसी विवाह और विष्णु पूजन का विशेष महत्व है। आइए जानें कैसे करें तुलसी पूजन, पढ़ें विशेष ...
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तुलसी की प्रतिदिन पूजन करने से घर में धन-संपदा, वैभव, सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती हैं। प्रतिदिन मां तुलसी से मनोकामना ...
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धार्मिक पौराणिक ग्रंथों में तुलसी का बहुत महत्व माना गया है। आइए जानते हैं तुलसी के पत्ते तोड़ने के 3 मंत्र :
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हरि प्रबोधिनी एकादशी के दिन निम्न फूलों से श्रीहरि भगवान विष्णु का पूजन करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के सभी पाप ...
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हम सबके घर में विराजित मां तुलसी के 8 नामों का मंत्र या सीधे 8 नाम एकादशी के दिन बोलने से भगवान विष्णु के साथ मां ...
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देवउठनी एकादशी से भगवान विष्णु जाग्रत होते हैं। पुराणों में वह मंत्र और श्लोक वर्णित है जिसे देव को उठाने के समय बोला ...
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19 नवंबर 2018 को देवउठनी एकादशी है। इस दिन कैसे करें घर में तुलसी जी का विवाह, आइए जानें...
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नमो नमो तुलसी महारानी नमो नमो हरि की पटरानी जाको दरस परस अघ नासे महिमा वेद पुराण बखानी साखा पत्र, मंजरी कोमल ...
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घर-घर में पूजी जाने वाली तुलसी परम पावन मानी जाती है। भगवान विष्णु अपना भोग तुलसी पत्र के बिना स्वीकार नहीं करते। क्यों ...
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हरि प्रबोधिनी एकादशी को देशी भाषा में देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि को तुलसी जी पृथ्वी लोक से वैकुंठ लोक में चली ...
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प्रतिदिन जहां तुलसी का दर्शन करना पापनाशक माना गया है, वहीं तुलसी पूजन करना मोक्षदायक माना गया है।
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गुरुवार, 25 अक्‍टूबर 2018 से कार्त‍िक का महीना शुरू हो गया था तथा इस मास की समाप्ति 23 नवंबर, शुक्रवार कार्तिक पूर्णिमा ...
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वेबदुनिया के पाठकों के लिए हम दे रहे हैं कनकधारा स्तोत्र का संस्कृत पाठ एवं हिन्दी अनुवाद। आपको सिर्फ कनकधारा यंत्र ...
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इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अक्षय फल देने वाला होता है। अर्थात् उसके शुभ फल में कभी कमी नहीं आती।
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एक राजा था, उसका प्रण था वह रोज सवा मन आंवले दान करके ही खाना खाता था। इससे उसका नाम आंवलया राजा पड़ गया।
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कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी कहा जाता है। इस बार यह पर्व 17 नवंबर 2018 को है और इस दिन आंवले के ...
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