लाल किताब के अनुसार आइए अपनी कुंडली खुद बनाएं...


 
हाथ की रेखाओं के द्वारा : 
 
पर्वत : हाथ पर अंगूठे और अंगुलियों की जड़ों में बने पर्वत जैसे अंगूठे के नीचे बना शुक्र और मंगल का पर्वत। पहली अंगुली के नीचे बना गुरु का पर्वत। बीच की अंगुली के नीचे बना शनि का पर्वत। अनामिका (रिंग फिंगर) के नीचे बना सूर्य पर्वत। सबसे छोटी अँगुली के नीचे बना बुध पर्वत। हाथ के अन्त में बना चंद्र पर्वत और खराब मंगल का पर्वत। जीवन रेखा की समाप्ति स्थान कलाई के ऊपर पर बना राहु पर्वत आदि यह सभी हाथ में ग्रहों की स्थिति बताते हैं।
 
राशियां : >  
1. राशियों के लिए तर्जनी का प्रथम पोर मेष, दूसरा वृषभ और तीसरा मिथुन राशि का होता है।>  
2. अनामिका का प्रथम पोर कर्क, दूसरा सिंह और तीसरा कन्या राशि का माना जाता है।  
3. बीच की अंगुली का प्रथम पोर तुला, दूसरा वृश्चिक और तीसरा पोर धनु राशि का माना जाता है।
 
4. सबसे छोटी अंगुली का प्रथम पोर मकर, दूसरा कुम्भ और तीसरा मीन राशि का माना जाता है।
 
भाव या खाने :
हथेली पर बारह भाव या खाने अलग-अलग प्रकार से होते हैं।
 
1. पहला खाना सूर्य पर्वत के पास।
2. दूसरा खाना गुरु पर्वत के पास।
3. तीसरा खाना अंगूठे और तर्जनी अंगुली की बीच वाली संधि में।
4. चौथा खाना सबसे छोटी अंगुली के सामने हथेली के आखिर में।
5. पांचवां खाना बुध और चंद्र पर्वत के बीच में।
6. छठवां खाना हथेली के मध्य में।
7. सातवां खाना बुध पर्वत के नीचे।
8. आठवां खाना चंद्र पर्वत के नीचे।
9. नवां खाना शुक्र और चंद्र पर्वत की बीच में।
10. दसवां खाना शनि पर्वत के नीचे।
11. ग्यारहवां खाना खराब मंगल और हथेली के बीच में।
12. बारहवां खाना शुक्र पर्वत और हथेली के बीच में जीवन रेखा के नीचे होता है।
 
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