हिन्दी भाषा पर कविता : भाषा की आजादी


चन्द्रेश प्रकाश (बोस्टन, यूएसए)

हम आजाद भारत के बाशिंदे हैं
अंग्रेजों को गए कई दशक बीत गए
पर अंग्रेजी अब भी जिंदा है
हिन्दी व अन्य स्थानीय भाषाओं पर
राज उसका अब भी कायम है।
हिन्दी शासकीय भाषा है
स्थानीय भाषाएं भी धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहीं
लोकसभा में स्थानीय भाषा इस्तेमाल पर रोक नहीं
तमिल बोलते सांसद
भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है।

फिर कम्प्यूटर पर अपनी भाषा में लिखना
इतना मुश्किल क्यूं है?
इस कम्प्यूटर के युग में
क्या ये हमारे साथ अन्याय नहीं?
क्यूं हम इस पर कुछ बोलते नहीं?
क्यूं इस पर कोई कुछ लिखता नहीं?
कौन करेगा न्याय?
कब खत्म होगा ये अन्याय?
क्योंकि न्यायपालिका पर शासन अब भी अंग्रेजी का है
अन्य किसी भाषा के इस्तेमाल पर यहां
सख्त चेतावनी मिलती है।

ये अभिव्यक्ति की कैसी आजादी है?
अपनी भाषा में बोलने को स्वतंत्र सांसद,
क्यूं इस पर कुछ बोलते नहीं?
क्यों इस अन्याय को रोकने वाला
सशक्त कानून लाते नहीं?
ऐसे में अपनी बोली बोलना
सिर्फ एक दिखावा है।

गंगा-जमुना-सरस्वती
कावेरी-नर्मदा-ब्रह्मपुत्र
इनको हम पूजते हैं
हमारी संस्कृति हमारी भाषाओं से है,
फिर हमारी भाषाएं यूं उपेक्षित क्यूं हैं?
क्यूं न्यायपालिका में इनके इस्तेमाल पर पाबंदी है?
विभिन्न राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों में
स्थानीय भाषा में अभिव्यक्ति की आजादी है।

हर प्रदेश में स्थानीय भाषा को
प्रोत्साहन व प्राथमिकता है
घरों में, मोहल्लों में
दोस्तों और रिश्तेदारों में
रीति-रिवाजों और त्योहारों में
शादियों और पार्टियों में
हमारी बोली हमारी पहचान है।
हमारी पहली पसंद है
हमारी संस्कृति की नींव इससे है
ऐसे में क्यों न्यायपालिका के दरवाजों पर
यह स्वतंत्रता हमसे छीन ली जाती है?

ये कैसा न्याय है, जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं?
क्यों कानून के गलियारों में
स्थानीय भाषा का विद्वान भी
अंग्रेजी पर निर्भर है?
क्यों आजाद भारत में न्याय
अंग्रेजी पर निर्भर है?

क्यों संसद भवन की भांति
यहां भी अपनी भाषा बोलने को हम स्वतंत्र नहीं?
क्यों अब भी हमारा कानून
अंग्रेजी के अधीन है?
जेलों में बंद सत्तर फीसदी लोग
अनपढ़ या दसवीं पास हैं
क्या इनमें से कई का अपराध
अंग्रेजी न आना था?

आजादी के सत्तर वर्षों बाद भी
इन लोगों की आजादी
अंग्रेजी पर निर्भर है।

क्यों हमारे कानूनों का अनुवाद
हमारी भाषाओं में होता नहीं?
क्या आईने में देख
हमें शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए?

हमारे देश और इसकी मिट्टी
हमारी संस्कृति हमारे रीति-रिवाज
इनका अपमान हमें कतई बर्दाश्त नहीं
फिर हमारी भाषाएं
आज भी यूं अपमानित क्यूं हैं?
न्यायपालिका की सक्रियता ने
कई बार गैरसंवैधानिक फैसलों और कानूनों से
देश को बचाया है।

हमारी भाषाओं की स्वतंत्रता पर भी
न्यायपालिका या संसद में
आज फैसला करना होगा
अन्यथा जन-जन को
इसके लिए आवाज उठानी होगी
आजादी की एक और लड़ाई लड़नी होगी।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

अगर 4 साल उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो मान लीजिए ये 5 बातें...

अगर 4 साल उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो मान लीजिए ये 5 बातें...
भारत जैसे देश में यदि लोग अपनी उम्र के औसतन चार साल और बढ़ाना चाहते हैं तो उसे विश्व ...

आप बिल्कुल नहीं जानते होंगे सफेद मूसली के ये 7 स्वास्थ्य

आप बिल्कुल नहीं जानते होंगे सफेद मूसली के ये 7 स्वास्थ्य लाभ
पौराणिक लेख और कई अत्याधुनिक शोधों ने इस बात को प्रमाणित किया है कि सफेद मूसली एक ...

लो-ब्लडप्रेशर से हैं परेशान तो आजमाएं ये 10 सरल उपाय

लो-ब्लडप्रेशर से हैं परेशान तो आजमाएं ये 10 सरल उपाय
भागदौड़ और तनाव भरी जिंदगी में लो ब्लडप्रेशर और हाई ब्लडप्रेशर की शिकायत होना आम बात है। ...

जब जाना हो पार्टी में और नेल रिमूवर खत्म हो जाएं तो आजमाएं ...

जब जाना हो पार्टी में और नेल रिमूवर खत्म हो जाएं तो आजमाएं ये टिप्स
नेल रिमूवर एक छोटी सी लेकिन हर लड़की के मेकअप बॉक्स में एक बहुत ही जरूरी चीज होती है। इसकी ...

मार्मिक कविता : असहाय, बेबस ललनाएं

मार्मिक कविता : असहाय, बेबस ललनाएं
कन्या पूजन के इस देश में कितनी ललनाएं रुआंसी। कितने हो रहे मुजफ्फरपुर/देवरिया, किस किस को ...

होठों का कालापन दूर करने के उपाय, पढ़ें 4 आसान से घरेलू ...

होठों का कालापन दूर करने के उपाय, पढ़ें 4 आसान से घरेलू नुस्खे
इन दिनों की बदलती हुई जीवनशैली में कहीं भी बाहर आना-जाना हो, ऑफिस हो या पार्टी... वैसे तो ...

नहीं 'टल' सकी 'अटल' जी के निधन की भविष्यवाणी, जानिए किसने ...

नहीं 'टल' सकी 'अटल' जी के निधन की भविष्यवाणी, जानिए किसने की थी ...
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु को लेकर भी कुछ इसी तरह की भविष्यवाणी की ...

ईद-उल-अजहा : जानें कुर्बानी का इतिहास, मकसद और कौन करे ...

ईद-उल-अजहा : जानें कुर्बानी का इतिहास, मकसद और कौन करे कुर्बानी
इब्रा‍हीम अलैय सलाम एक पैगंबर गुजरे हैं, जिन्हें ख्वाब में अल्लाह का हुक्म हुआ कि वे अपने ...

प्याज के छिलकों को न फेंके कूड़ेदान में, इनके इस्तेमाल से ...

प्याज के छिलकों को न फेंके कूड़ेदान में, इनके इस्तेमाल से पाएं बेहतरीन सेहत और सौंदर्य लाभ
खानपान में प्याज का इस्तेमाल रोजाना किया जाता है। जब भी आपको प्याज किसी सब्जी में डालना ...

निर्मल राजनीति के प्रणेता अटलजी के चरणों में सादर

निर्मल राजनीति के प्रणेता अटलजी के चरणों में सादर
स्वतंत्रता दिवस के जोश, उमंग और उल्लास में राष्ट्र अभी आनंद में सराबोर ही था कि अटलजी के ...