रोहिंग्या मुस्लिमों की संख्या और समस्या, क्या करेगा भारत?

Last Updated: बुधवार, 6 सितम्बर 2017 (13:00 IST)
पहले बांग्लादेशी, अफ्रीकी, अफगानी, पाकिस्तानी, श्रीलंकाई और अब रोहिंग्या मुस्लिमों को शरण देकर भारत धीरे-धीरे एक शरणार्थियों का देश बनता जा रहा है। वर्तमान में रोहिंग्या मुस्लिमों के बारे में खासी चर्चा हो रही है। यहां कुछ उनके हमदर्द खड़े हो गए हैं, तो कुछ विरोधी। इसी संदर्भ में आइए जानते हैं कि ये आखिर हैं कौन? और ये भारत में कहां-कहां रहते हैं? इनकी संख्‍या कितनी है? और इन्हें क्या अधिकार मिले हुए हैं?
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कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम...?
बर्मा जिसे म्यांमार भी कहते हैं, वहां के एक प्रांत का नाम है रखाइन जिसे अराकान भी कहा जाता है। यहीं पर ये रोहिंग्या मुस्लिम रहते थे। रोहिंग्या इनकी जाति का नाम है। इन मुसलमानों के बारे में म्यांमार की सरकार और बहुसंख्यक बौद्धों का मानना है कि ये मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं।

कॉमन ईरा (सीई) के वर्ष 1400 के आसपास ये लोग ऐसे पहले मुस्लिम्स हैं, जो कि बर्मा के अराकान प्रांत में आकर बस गए थे। इनमें से बहुत से लोग 1430 में अराकान पर शासन करने वाले बौद्ध राजा नारामीखला (बर्मीज में मिन सा मुन) के राजदरबार में नौकर थे। इस राजा ने मुस्लिम सलाहकारों और दरबारियों को अपनी राजधानी में प्रश्रय दिया था। म्यांमार में करीब 10 लाख से अधिक रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं। बर्मा के सैनिक शासकों ने 1982 के नागरिकता कानून के आधार पर उनसे नागरिकों के सारे अधिकार छीन लिए जाने के बाद से ही वहां बौद्धों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा है।>

कितने मुस्लिमों ने म्यांमार से पलायन किया?
म्यांमार में वर्तमान हिंसा के चलते बांग्लादेश पलायन करने वाले रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 1,23,000 है। संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर की प्रवक्ता विवियन तान ने कहा है कि पलायन करने वालों की संख्या 87,000 होने का मंगलवार को अनुमान लगाया गया था लेकिन संशोधित संख्या 1,23,000 है। हजारों लोग रोजाना जंगलों और धान के खेतों से होते हुए बांग्लादेश में सुरक्षित पहुंच रहे हैं। अन्य लोग दोनों देशों के बीच स्थित नदियों को पार कर रहे हैं, हालांकि इस कोशिश में कई लोग डूब भी गए हैं।

मुस्लिम-बौद्ध संघर्ष : म्यांमार में मु्स्लिम और बौद्धों के बीच सांप्रदायिक तनाव का लंबा इतिहास रहा है। 1952 से पहले से ही यह तनाव चला आ रहा है। वर्तमान में म्यांमार में साल 2002 में हुई हिंसा के बाद 1 लाख से अधिक रोहिंग्याओं को बांग्लादेश के शिविरों में रहने को मजबूर होना पड़ा।

सबसे बड़ी और पहली हिंसा जून 2012 में हुई थी जिसमें रखाइन के बौद्धों और मुस्लिमों के बीच दंगे हुए। यह अनुमान लगाया जाता है कि इस हिंसा के कारण 200 रोहिंग्या मुसलमानों की मौत हुई और हजारों को दर-ब-दर होना पड़ा। रोहिंग्या समुदाय का ताजा पलायन 25 अगस्त को शुरू हुआ, जब रोहिंग्या उग्रवादियों ने म्यांमार की पुलिस चौकियों पर हमला किया जिस पर सुरक्षा बलों को इसके जवाब में अभियान चलाना पड़ा।
पिछले 10 वर्षों से बर्मा के रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन जारी है और कई ने बांग्लादेश की सीमा पर करने के बाद भारत का रुख कर असाइलम का औपचारिक आवेदन कर रखा है। धीरे-धीरे ये मुसलमान भारत के जम्मू, आंध्र, पश्‍चिम बंगाल, असम, दिल्ली आदि क्षेत्रों में पहुंचकर रहने लगे हैं। इनमें से हजारों के पास संयुक्त राष्ट्र का शरणार्थी कार्ड नहीं है। सीमापार करने के लिए रोहिंग्या समुदाय के लोग बांग्लादेशी तस्करों का भी सहारा ले रहे हैं। कुछ तस्करों के लिए रोहिंग्या सिर्फ पैसा बनाने या हवस मिटाने का जरिया मात्र हैं।


भारत में कितने रोहिंग्या मुस्लिमों ने ले रखी है शरण?
गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार बौद्ध बहुल देश म्यांमार में जारी हिंसा के बाद से अब तक करीब 40,000 रोहिंग्या मुस्लिम भारत में आकर शरण ले चुके हैं। ये लोग समुद्र, बांग्लादेश और म्यांमार सीमा से लगे चिन इलाके के जरिए भारत में घुसपैठ करते हैं। भारत के गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू के अनुसार इनमें से 16,000 संख्या उन रोहिंग्या मुसलमानों की है, जो संयुक्त राष्ट्र के शरणार्थियों के तौर पर पंजीकृत हैं।

भारत में कहां-कहां रहते हैं ये मुस्लिम?
भारत के जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, आंध्रा, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, असम, तेलंगाना आदि जगहों पर रोहिंग्या मुस्लिमों ने शरण ले रखी है। भारत के लिए चिंता की बात यह है कि यहां पर वे धीरे-धीरे अन्य मुस्लिम समुदाय में घुल-मिलकर अपनी पहचान खोकर वे भारतीय बनने लगे हैं। इसके लिए उन्हें स्थानीय मुस्लिमों का सहयोग भी अब मिलने लगा है। कई लोगों का मानना है कि इससे भविष्य में गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
हरियाणा : हरियाणा में रोहिंग्या के पहले 2 परिवारों ने शरण ली थी अब इनकी संख्‍या बढ़कर 28 हो गई है।

दिल्ली : दिल्ली में रोहिंग्या मुसलमानों का एक रिफ्यूजी कैंप है। यमुना नदी के तट पर ओखला इलाके में इस कैंप में करीब 50 से अधिक परिवार रह रहे हैं। इनमें से कुछ परिवार 2012 में यहां आए थे। इसके अलावा दिल्ली के जामिया इलाके में भी कुछ रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं। जहां रोहिंग्या मुसलमानों की झुग्गी बस्ती है। दिल्ली में इनकी संख्या 1,000 से ज्यादा है।
मिजोरम : मई 2017 में म्यांमार से महिलाओं एवं बच्चों समेत करीब 280 लोगों का एक दल सुदूर दक्षिणवर्ती मिजोरम के सियाहा जिला स्थित 2 गांवों में पहुंचा और वहीं जम गया। पुलिस के एक अधिकारी ने सोमवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि 200 से अधिक लोगों ने लुंगपुक गांव में और 77 अन्य ने खलखी गांव में शरण ले रखी है।
जम्मू और कश्मीर : जम्मू और कश्मीर के हिन्दू बहुल क्षेत्र जम्मू में लगभग 10,000 से अधिक रोहिंग्या मुस्लिमों ने शरण ले रखी है। हालांकि राज्य सरकार इससे इंकार करती है। जम्मू और कश्मीर के गृह मंत्रालय द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक जम्मू में पिछले कुछ सालों से 5,700 रोहिंग्या मुसलमान रह रहे हैं।

इन परिवारों के बच्चे भटिंडी और नरवाल बाला इलाके में राज्य सरकार द्वारा चलाए जाने वाले स्कूलों में पढ़ रहे हैं और कुछ मदरसों में दाखिल हुए हैं। राज्य की डेमोग्राफी बिगाड़ रहे इन मुस्लिमों के लिए फरवरी 2017 में जम्मू के विभिन्न इलाकों में उन्हें चेतावनी देने के लिए 'जम्मू छोड़ो' वाले बैनर लगाए गए थे।
हालांकि स्थानीय मुस्लिमों और राज्य सरकार के सहयोग के चलते अब ये मुस्लिम जम गए हैं। जम्मू और सांबा जिलों में रह रहे रोहिंग्या के साथ बांग्लादेशी मुस्लिम भी स्थायी निवासी बनाने लगे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि ये लोग इतनी संख्‍या में जम्मू में कैसे रहने लगे? और वहीं क्यों? जबकि पश्चिम बंगाल और असम उनके लिए सबसे सुरक्षित और नजदीक जगह हो सकती थी।

इनका भी है आतंकवादी संगठनों से गठजोड़?
हाल ही में म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मु्स्लिम चरमपंथियों ने पुलिस चौकी पर हमला किया था जिसमें सुरक्षाबलों के 12 सदस्य मारे गए थे। 25 अगस्त को पुलिस चौकी पर हमले के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कड़ी निंदा करते हुए बयान जारी किया था कि भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में म्यांमार के साथ मजबूती से खड़ा है।
अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी नामक ग्रुप पर आरोप है कि उसका संबंध आतंकवादी संगठन आईएस, हूजी, लश्कर और अल कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों से है। मुस्लिम देशों ने इन्हें फंडिंग होती है, हालांकि रोहिंग्या इस बात से इंकार करते हैं। यह ग्रुप एक विद्रोही ग्रुप है, जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहा है।

7 जुलाई 2013 को भारत के महाबोधी मंदिर परिसर में एक के बाद एक दस बम विस्फोट हुए। इस विस्फोट में रोहिंग्या मु्स्लिम संगठन और हूजी का हाथ होने का आरोप लगा था।
क्या भारत रोहिंग्या मुस्लिमों को निर्वासित करना चाहता है?
भारत के गृह राज्यमंत्री किरन रिजिजू ने घोषणा की थी कि भारत रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करेगा। संयुक्त राष्ट्र के रजिस्ट्रेशन का कोई मतलब नहीं। उन्होंने कहा था कि यूएनएचसीआर रजिस्ट्रेशन का मतलब कुछ भी नहीं है। हमारे लिए वे सभी अवैध प्रवासी हैं।

यह अभी तक साफ नहीं है कि भारत इन रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार में भेजेगा, भारत के सीमावर्ती जगहों पर इनके लिए शिविर लगाएगा या फिर बांग्लादेश में भेज देगा? रोहिंग्या इस समय बिना राष्ट्र के हैं, न म्यांमार उन्हें स्वीकार करता है और बांग्लादेश खुद ही लाखों रोहिंग्या शरणार्थियों का घर बन चुका है।
रोहिंग्या का वास्तविक जमीन पर होना कठिन है, क्योंकि उनको किस देश में भेजा जाएगा, यह साफ नहीं है। दूसरा यह कि धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी दल सहित उनके यहां कई समर्थक हैं। रोहिंग्या मुसलमानों को निर्वासित करने का मुद्दा भारत के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

(वेबदुनिया डेस्क)

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