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BBC SPECIAL: भारत के दबाव में हुई कार्रवाई: हाफ़िज़ सईद

पुनः संशोधित गुरुवार, 4 जनवरी 2018 (11:06 IST)
जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद का कहना है उनकी पार्टी के ख़िलाफ हालिया कार्रवाई अमेरिका और के दबाव में की जा रही है। सईद के मुताबिक कुछ सियासी लोग उनके ख़िलाफ प्रचार की मुहिम चला रहे हैं।

के रक्षा मंत्री ख़ुर्रम दस्तगीर ने बीबीसी से बातचीत में जानकारी दी थी कि हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ कार्रवाई "ऑपरेशन रद्द उल फ़साद" का हिस्सा है।

बीबीसी उर्दू संवाददाता शफ़ी नक़ी जामई ने हाफ़िज़ सईद से पूछा कि "ऑपरेशन रद्द-उल-फ़साद" तो कट्टरपंथियों के ख़िलाफ है तो क्या इस सरकार ने जमात-उद-दावा को एक कट्टरपंथी संगठन क़रार दे दिया है? इस सवाल के जवाब में हाफ़िज़ सईद ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई नोटिस नहीं आया है, न ही इसका कोई आधार है।
'इंडिया, अमेरिका के दबाव में पाकिस्तान'
हाफ़िज़ सईद ने कहा, "मैं तो साफ कहता हूं कि अमेरिकी दबाव है और साथ ही इंडिया की तरफ से ये सारी बातें हो रही हैं और रक्षा मंत्री उन्हीं की ज़बान बोल रहे हैं।" उन्होंने कहा कि वो अदालतों से हमेशा बाइज़्ज़त बरी होकर निकले हैं, लेकिन कुछ राजनीतिक लोग किसी और के ऐजेंडे पर काम कर रहे हैं और उनके ख़िलाफ मुहिम चला रहे हैं।

सईद ने कहा, ''हमारे किरदार को सारी दुनिया जानती है। जब पेशावर में बच्चों के ऊपर हमला हुआ था, सबसे पहले मदद के लिए हम पहुंचे थे।'' ''इसी तरह पूरे मुल्क में हमने दहशतगर्दी के ख़ात्मे के लिए लिटरेचर छापा। जगह-जगह काम किया। मुझे नहीं मालूम कि ये लोग किस ऐजेंडे पर अमल कर रहे हैं।''
'अमेरिका से झगड़ा नहीं'
हाफ़िज़ सईद से जब कुछ वक़्त पहले आईं ऐसी ख़बरों के बारे में पूछा गया, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका उन्हें ड्रोन हमलों का निशाना बनाना चाहता है तो उन्होंने उन ख़बरों को खारिज कर दिया।

हाफ़िज़ सईद ने कहा, "न अमेरिका का हमारे साथ कोई झगड़ा है। न हमारा कोई मसला है। हम बात करते हैं कश्मीर की। हमारे ख़िलाफ जो भी कुछ है वो इंडिया की तरफ से है। अलबत्ता ये हो सकता है कि इंडिया अमेरिका को उकसाए।"
जमात-उद-दावा के के साथ संबंध के सवाल पर हाफ़िज़ सईद ने कहा कि जमात उद दावा का हक्कानी नेटवर्क और अफ़ग़ानिस्तान के हालात से कोई संबंध नहीं है। हालांकि उन्होंने ये ज़रूर कहा कि अमेरिका को अफ़गानिस्तान से निकल जाना चाहिए।

'गड्ड-मड्ड करते हैं इंडिया-अमेरिका'
हाफ़िज़ सईद ने कहा, "मैं इसकी वजह ये समझता हूं कि अमेरिका को मसला है हक्कानी नेटवर्क से और इंडिया को मसला है हमसे। इंडिया और अमेरिका जब आपस में मिलते हैं तो ये गड्ड-मड्ड कर देते हैं।"
हक्कानी नेटवर्क के साथ नाम इस्तेमाल होने पर सईद ने कहा, ''हक्कानियों का अपना मामला है। वो अफ़गानिस्तान के अंदर अपनी आज़ादी की जंग लड़ रहे हैं। जो कश्मीर में जंग लड़ रहे हैं। हम उनको भी सही समझते हैं।'' ''और अगर हक्कानी ये कहते हैं कि अमेरिकी को ये कब्ज़े नहीं करने चाहिए और कत्ल नहीं करना चाहिए, वापस जाना चाहिए तो हम ये बात समझते हैं। लेकिन कोई ताल्लुक नहीं है।''

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पाकिस्तान की मदद बंद करने के ऐलान पर हाफ़िज़ सईद ने कहा कि मुश्किल वक़्त में पाकिस्तान ने अमेरिका की मदद की है लेकिन वो अफ़ग़ानिस्तान में अपनी नाकामी का इल्ज़ाम पाकिस्तान पर लगा रहा है।
उन्होंने कहा, "अफसोस ये है कि अमेरिका इल्ज़ाम भी हम पर दे रहा है। भई कामयाबी तो तुम्हें नहीं मिल सकी। अफ़गानिस्तान के अंदर नाकामयाब तुम हुए हो और इल्ज़ाम सारा पाकिस्तान पर धर रहे हो। ये अफसोसनाक बात है।"

'हल हो कश्मीर मसला'
क्या वो चाहेंगे कि पाकिस्तान के भारत से संबंध बेहतर हों, इस सवाल पर हाफ़िज़ सईद ने कहा कि मौजूदा दौर में जंग किसी समस्या का हल नहीं है। हाफ़िज़ सईद ने कहा, "पाकिस्तान- इंडिया के ताल्लुकात तो दुरुस्त होने चाहिए। लेकिन जो कश्मीर का मसला है, वो हल होना चाहिए। बस हम यही कहते हैं। अफसोस है कि हमारी ये बात बर्दाश्त नहीं की जा रही। "
''इस दौर में जंग मसले का हल नहीं होती। यही बात हम अमरीका को कहते हैं। यही बात इंडिया को कहते हैं।'' ''हर मुल्क का अपना मसला है। हम बिल्कुल नहीं ये चाहते कि ऐसे सूरत-ए-हाल पैदा हो। पाकिस्तान पर पाबंदियां लगें। पाकिस्तान-इंडिया के ताल्लुकात तो दुरूस्त होना चाहिए।''

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर ख़ान ने बीबीसी संवाददाता फ़रहत जावेद के साथ इंटरव्यू में कहा था कि देश में जमात-उद-दावा के ख़िलाफ हालिया कार्रवाई का संबंध अमेरिका से नहीं है बल्कि ये ऑपरेशन रद्द-उल-फ़साद का हिस्सा है। उनका कहना था कि हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई संगठनों पर पाबंदी लगाई गई है लेकिन इस बारे में पाकिस्तान सोच समझकर कदम उठा रहा है।
ट्रंप के ट्वीट पर क्या कहा?
हाफिज़ सईद ने कहा कि पाकिस्तान ने मुश्किल वक़्त में अमरीका का साथ दिया है, लेकिन वो अपनी नाकामी के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहरा रहा है। उन्होंने कहा, ''नाटो के मुल्क अफगानिस्तान में आए, बल्कि पाकिस्तान में भी आए तो हमने उन्हें अपने अड्डे भी दिए। कराची से लेकर तुर्खम तक ये सारी सड़कें और सबकुछ अमरीका के हवाले किया।''

''इतना काम किया, इतना काम किया और फिर उसके बाद भी इतनी दहशतगर्दी हो रही है पाकिस्तान में। वो लोग अफगानिस्तान से आ रहे हैं। पाकिस्तान ने और पाकिस्तान के लोगों ने जो किरदार अदा किया, आज उसकी सज़ा हम भुगत रहे हैं।''
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