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नारी कब तक दोहरी मानसिकता का बोझ ढोती रहेगी"

बुधवार,मार्च 8, 2017
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कविता : नारी तू नारायणी

बुधवार,मार्च 8, 2017
नारी तू नारायणी, चलता तुझसे ही संसार है, है नाजुक और सुंदर तू कितनी, तुझमें ओजस्विता और सहजता का श्रृंगार है
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सुरों की सरिता गंगा....तू तो पावन सावन है। झर-झर बहता जल झरनों से, तू तो गहरा सागर है।
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आज आठ मार्च है। हर साल आज ही के दिन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। महिलाओं के अधिकार, उनके सम्मान और ...
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को हर उस स्त्री के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने सामाजिक बंधनों को तोड़कर ...
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देर न कर जाग तू, भर ले अब उड़ान तू आग है जो अंदर तेरे, उसको अब जल तू
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हम विश्व में लगातार कई वर्षों से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाते आ रहे हैं। महिलाओं के सम्मान के लिए घोषित इस दिन का ...
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कुछ लोग जो समाज में कुंठाओं और कुरीतियों को मिटाकर लाना चाहते हैं,
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सृष्टि के आरंभ से ही नारी, रचयिता ब्रह्मा से लेकर देवताओं तक, पौराणिक पात्रों से लेकर राजा-महाराजाओं की सल्तनत तक के ...
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अब तक हम सुनते आए हैं कि हर सफल इंसान के पीछे एक महिला का हाथ होता है, लेकिन अब हम कह सकते हैं कि हर सफल अंतरिक्ष मिशन ...
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8 मार्च अतंर्राष्ट्रीय महिला दिवस तो ठीक है, पर क्यों नहीं कभी पुरूष दिवस मनाया जाता ? आखि‍र वह भी तो इसी धरती का ...
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यूं तो महिला दिवस दुनिया भर की महिलाओं के सम्मान में मनाया जाता है, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो विशेष तौर पर इस ...
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नारी सम्मान की बातें और विचार वर्तमान की उपज तो नहीं है, बिल्कुल नहीं। बल्कि स्त्री का जो सम्मान वर्तमान में सुरक्षित ...
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हर साल हम 8 मार्च को विश्व की प्रत्ये‍क महिला के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं। लेकिन महिला दिवस मनाए ...
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टीवी चैनल्स में देख रही थी, महिला दिवस पर बेहतरीन कार्य करने वाली महिलाओं को राष्ट्रपति वर्ल्ड वूमंस डे पर सम्मानित ...
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जैसे-जैसे महिला दिवस नजदीक आता है, वैसे-वैसे मन खुश होने के बजाए कुछ उदास सा हो जाता है। अपने ही अस्त‍ित्व पर गर्व होने ...
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नारी....नश्वर संसार की धुरी और धारा। शायद यही कारण है कि प्राचीन काल से लेकर आज तक कहने-सुनने के लिए ही सही, नारी को ...
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पराया धन क्यों कहते हो, तुम्हारा ही खजाना हूं, जीने दो कोख में मुझको, मैं जीने को बहाना हूं
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स्त्री जाग गई है, स्त्री, बुहार रही हैं आंगन, फेंक देगी आज बीती रात की चुभती किरचें
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सुनो, कल डिनर बाहर करेंगे। तुम्हारा महिला दिवस है। क्यों, ठीक है न?” “नहीं, ठीक नहीं है।” “अच्छा! जाने का मन नहीं है, ...
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