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सिर्फ एक दिन ही क्यों?

शुक्रवार,जनवरी 15, 2010
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स्त्री, महिला, खवातीन, औरत, वामा, नारी और वुमन। यह है देश की आधी आबादी को नवाजे जाने वाले संबोधन। संबोधनों की इस भीड़ ...
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स्त्री को स्त्री होने के लिए स्त्री जैसा ही सोचना, समझना और रहना होगा। उसे साहस, संकल्प और एकजुटता का परिचय देना होगा। ...
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ये है उन महिलाओं के विचार व सफलता मंत्र, जो आज कुशल गृहिणियाँ होने के साथ-साथ अपने कार्यक्षेत्र में भी सफलता अर्जित कर ...
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यहाँ पर प्रवचनों का आधार शंकराचार्य का आध्‍यात्‍मि‍क उपदेश है। वर्ष में तीन उत्‍सवों के दौरान यहाँ दूर दूर से लोग आते ...
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नारी का गुणगान ना आँको भैया नारी तो बस नारी है। अनंत काल से आज तक नारी ही रही है जिसने हर कठिन समय में भी ...
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जिंदगी बहुत कशमकश में उलझी हुई हैं। रोजमर्रा की भागती-दौड़ती जिंदगी में और वह भी खासकर जब सिर्फ गृहिणी न होकर उसके ...
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मैं नारी हूँ

मंगलवार,मार्च 3, 2009
मैं नारी हूँ मुझे किसी ने न जाना किसी ने न पहचाना मैं नारी हूँ मेरा काम है लड़ते जाना। लड़ती हूँ मैं पुराने ...
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इस सदी के आधुनिक कोने पर खड़े होकर हम आज फिर इसकी आधी आबादी के विषय में सोचने के लिए मजबूर हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला ...
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एक दिवस आता है और हम अपने आपको समूचा उड़ेल देते हैं, नारों, भाषणों, सेमिनारों और आलेखों में। बड़े-बड़े दावे, बड़ी-बड़ी ...
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर वर्ष 8 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। इस दिन सम्पूर्ण विश्व की महिलाएँ देश, जात-पात, ...
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