जो मंजर तलाश करता है....

- अजीज अंसारी

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जो फन1 में फिक्र2 के मंजर3 तलाश करता है
वो राहबर4 भी तो बेहतर तलाश करता है

न जाने कौन सा पैकर5 तलाश करता है
फकीर बनके वो घर-घर तलाश करता है

बहादुरों की तो लाशें पड़ी हुई हैं मगर
वो मेरा जिस्म, मेरा सर तलाश करता है

यकीं जरा भी नहीं अपने जोरोबाजू6 परहथेलियों में मुकद्दर तलाश करता है

मैं उसके वास्ते गुलदस्ता लेकर आया हूं
वो मेरे वास्ते पत्थर तलाश करता है

हमारे कत्ल को मीठी जुबान7 है काफी
अजीब शख्स है खंजर8 तलाश करता है

परिन्दे उसको खलाओं में ढूंढ आए 'अजीज'बशर अजल9 से जमीं पर तलाश करता है।

1. कला 2. सोच-विचार 3.दृश्य 4. रास्ता बताने वाला 5. शरीर 6. बाजुओं की शक्ति 7. भाषा-बोली 8. छुरी-चाकू 9. दुनिया का पहला दिन

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