हिन्दी ग़जल : लगाया दांव पर दिल को...

शनिवार,दिसंबर 3, 2016
घबराइए मत…! अभी बारिश का मौसम शुरू नहीं हुआ है यह तो इंद्रदेव अपनी पिचकारी चेक कर रहे थे…होली आने वाली है रंगों से ...

आजाद की क्रांतिकारी शायरी

गुरुवार,जुलाई 23, 2015
चंद्रशेखर आजाद का नाम भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में अमिट है। ऐसा निडर, सहज और निष्कलंक चरित्र वाला इतिहास में ...

होली की रोमांटिक शायरी

सोमवार,मार्च 2, 2015
होली की रोमांटिक शायरी- नेचर का हर रंग आप पर बरसे। हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे। रंग दे आपको सब मिलकर इतना। कि वह रंग ...
लिपट जाता हूं मां से और मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं, हिन्दी मुस्कुराती है
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नई शायरी : अजब हाल है

मंगलवार,अक्टूबर 22, 2013
कमर बांधे हुए चलने को यों तैयार बैठे हैं, बहुत आगे गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं

अगर दरिया मिले तो...

बुधवार,सितम्बर 11, 2013
अगर दरिया मिले तो पार करना, सफ़र को और भी दुश्‍वार करना बहादुर हो तो इतना याद रखना, जगाकर दुश्‍मनों पर वार करना

नई शायरी - फ़ातिहा

शनिवार,अगस्त 31, 2013
तुम्हारी क़ब्र पर मैं फ़ातिहा पढ़ने नहीं आया, मुझे मालूम था, तुम मर नहीं सकते तुम्हारी मौत की सच्ची खबर

उसके करम की बात न पूछो...

गुरुवार,जून 13, 2013
उसके करम1 की बात न पूछो वो सबके होले है इक दरवाजा बंद, अगर हो सौ दरवाजे खोले हैं उसकी वाणी लहरों में है, झरनों में हैं ...
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लफ्जों की बरसात....

शुक्रवार,मई 24, 2013
रात गए लफ्जों1 की बरसात हुई एक मुरस्सा2 नज्म हमारी जात हुई आंधी आई रस्ते में बरसात हुई अपनी मंजिल जैसे अपने साथ हुई छत ...

होली की रंगबिरंगी शायरी

सोमवार,मार्च 25, 2013
गुलजार खिले हो परियों के, और मंजिल की तैयारी हो

किससे जाकर बोले मेरी गजल

गुरुवार,फ़रवरी 28, 2013
जैसा मौका देखे वैसा हो ले मेरी गजल वो बातें जो मैं नहीं बोलूं बोले मेरी गजल चांद-सितारे अर्श1 पे जाके जब चाहें ले आएं ...

अच्‍छाई को बोया कर...

मंगलवार,फ़रवरी 26, 2013
घर से बाहर निकला कर दुनिया को भी देखा कर फसलें काट बुराई की अच्‍छाई को बोया कर ने की डाल के दरिया में अपने आपसे धोखा ...
झूठ का लेकर सहारा जो उबर जाऊंगा मौत आने से नहीं शर्म से मर जाऊंगा सख्त1 जां हो गया तूफान से टकराने पर लोग समझते थे कि ...
बादल दरिया पर बरसा हो, ये भी तो हो सकता है खेत हमारा सूख रहा हो, ये भी तो हो सकता है मंजिल से वो दूर है अब तक शायद ...

जो मंजर तलाश करता है....

सोमवार,अक्टूबर 29, 2012
जो फन में फिक्र के मंजर तलाश करता है वो राहबर भी तो बेहतर तलाश करता है न जाने कौन सा पैकर तलाश करता है फकीर बनके वो ...
कम से कम बच्चों के होंठों की हँसी की ख़ातिर ऐसे मिट्‍टी में मिलाना कि खिलौना हो जाऊँ
याद आने लगा एक दोस्त का बरताव मुझे, टूट कर गिर पड़ा जब शाख़ से पत्ता कोई ...

छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा

शुक्रवार,जून 18, 2010
बुझ गई आस, छुप गया तारा थरथराता रहा धुआँ तन्हा ज़िन्दगी क्या इसी को कहते हैं जिस्म तन्हा है और जाँ तन्हा ...

ऐसे सवाल मत करना

शुक्रवार,जून 18, 2010
बिगड़ते रिश्तों को फिर से बहाल मत करना, जो टूट जाएँ तो उनका ख़याल मत करना।