अगर दरिया मिले तो...

नई शायरी

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अगर दरिया मिले तो पार करना,
सफ़र को और भी दुश्‍वार करना

बहादुर हो तो इतना याद रखना,
जगाकर दुश्‍मनों पर वार करना

कड़कती धूप में चलना हो मुश्‍किल,
दरख्‍़तों से न इतना प्‍यार करना
चलो, चलते हैं 'अलवी' मैक़दे से,
वहीं सचाई का इज़हार करना।

- मोहम्‍मद अलवी

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